होम/देश/टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर घमासान: एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर भड़के नोएल टाटा, कोर्ट जाने की तैयारी
देशपढ़ने में समय: 7 मिनट

टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर घमासान: एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर भड़के नोएल टाटा, कोर्ट जाने की तैयारी

टाटा ग्रुप के भीतर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। एन चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने के फैसले के खिलाफ नोएल टाटा ने वोटिंग की है और इसे कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी चल रही है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
21 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर घमासान: एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर भड़के नोएल टाटा, कोर्ट जाने की तैयारी
📷 टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर घमासान: एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर भड़के नोएल टाटा, कोर्ट जाने की तैयारी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस आमने-सामने आ गए हैं।
  • टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए इसके खिलाफ वोटिंग की थी।
  • टाटा ट्रस्ट का तर्क है कि यह नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है क्योंकि ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का समर्थन अनिवार्य था।

टाटा ग्रुप के शीर्ष प्रबंधन में बड़ा घमासान, आमने-सामने आए टाटा ट्रस्ट और टाटा संस

देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित व्यावसायिक घरानों में शुमार टाटा ग्रुप के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। टाटा ग्रुप के दो सबसे बड़े पावर सेंटर्स यानी टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच वर्चस्व और नियमों की व्याख्या को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं। यह विवाद एन चंद्रशेखरन को दोबारा टाटा संस के चेयरमैन पद पर नियुक्त किए जाने के बाद से और गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी पचड़े में भी फंस सकता है।

हाल ही में टाटा ग्रुप के बाकी सदस्यों ने एन चंद्रशेखरन को एक बार फिर से टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। हालांकि, यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ बल्कि बोर्ड रूम में इसके खिलाफ कड़ी असहमति दर्ज की गई। टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख और टाटा संस के निदेशक नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। 4:1 के बहुमत से यह प्रस्ताव पास जरूर हो गया, लेकिन इस एक वोट के विरोध ने देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट साम्राज्य में अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे विवाद के अब कोर्ट तक पहुंचने के पूरे आसार हैं। टाटा ट्रस्ट और टाटा संस दोनों ही खेमों के अधिकारी और कानूनी सलाहकार अपने-अपने स्तर पर वकीलों की फौज तैयार करने में जुट गए हैं। सवाल यह है कि आखिर देश के सबसे अनुशासित और मूल्य आधारित माने जाने वाले इस बिजनेस ग्रुप के भीतर इतनी बड़ी खींचतान क्यों मची है और इसके पीछे के संवैधानिक और कानूनी तर्क क्या हैं?

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

महंगाई के दौर में भी इस स्कूटर पर फिदा हुए लोग: महज 31 दिनों में बिक गए पौने डेढ़ लाख वाहन, जानें क्या है इसकी खासियत

महंगाई के दौर में भी इस स्कूटर पर फिदा हुए लोग: महज 31 दिनों में बिक गए पौने डेढ़ लाख वाहन, जानें क्या है इसकी खासियत

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदा

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदा

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजरा

पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजरा

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

सैम ऑल्टमैन से कई गुना अमीर निकला ओपनएआई का ये को-फाउंडर, फोर्ब्स लिस्ट में चौंकाने वाली एंट्री

सैम ऑल्टमैन से कई गुना अमीर निकला ओपनएआई का ये को-फाउंडर, फोर्ब्स लिस्ट में चौंकाने वाली एंट्री

क्यों गैरकानूनी है एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति? टाटा ट्रस्ट का बड़ा तर्क

टाटा ट्रस्ट का स्पष्ट रूप से यह मानना है कि एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव कानूनी रूप से पूरी तरह अमान्य है। ट्रस्ट का तर्क है कि कंपनी के नियमों और उपनियमों के तहत इस प्रस्ताव को टाटा ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का अनिवार्य समर्थन मिलना चाहिए था, जो कि इस मामले में नहीं मिला है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी या मालिकाना हक है, जिसके चलते ग्रुप के फैसलों में ट्रस्ट की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

ट्रस्ट के अधिकारियों का कहना है कि 4:1 का कुल मतदान पूरी तरह से गलत और नियमों के खिलाफ था। टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट की ओर से दो चुने हुए निदेशक होते हैं। नियमों के मुताबिक, दोनों के बीच आपसी सहमति या बहुमत का मतलब यह होना चाहिए था कि दोनों ही निदेशक प्रस्ताव का समर्थन करते। चूंकि इनमें से एक निदेशक यानी खुद नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया, इसलिए टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत निर्धारित एक बहुत ही अहम शर्त पूरी नहीं हो पाई।

टाटा ट्रस्ट ने उन सभी चर्चाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि इस विरोध से बोर्ड के भीतर कोई गतिरोध या पॉलिसी पैरालिसिस जैसी स्थिति पैदा हो गई है। ट्रस्ट का कहना है कि जब बोर्ड में सदस्यों की संख्या समान यानी टाई की स्थिति में होती है, तब चेयरमैन के निर्णायक वोट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसी कोई बराबरी या टाई की स्थिति थी ही नहीं, इसलिए चेयरमैन के विशेष वोटों का यह इस्तेमाल पूरी तरह से अनुचित है।

आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन और अधिकारों की कानूनी जंग

इस पूरे विवाद के केंद्र में टाटा संस के वे आंतरिक नियम और अनुबंध हैं जो कंपनी के संचालन और प्रशासन को तय करते हैं। टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, बोर्ड के कोई भी बड़े फैसले केवल कुल पड़े वोटों की गिनती के गणित के आधार पर तय नहीं किए जा सकते। इसके लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा चुने गए निदेशकों की सकारात्मक सहमति और उनका सक्रिय समर्थन होना अनिवार्य रूप से जरूरी है।

बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' बोर्ड को यह छूट नहीं देते कि वह किसी भी फैसले को केवल साधारण बहुमत के आधार पर पास कर ले, खासकर तब जब ट्रस्ट के अपने नामित सदस्यों की विशेष शर्तें बीच में आती हैं। ट्रस्ट की दलील बेहद साफ है—कोई भी कानूनी शर्त या तो पूरी होती है या फिर नहीं होती है। इस मामले में चूंकि वह अनिवार्य शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए 4:1 के संख्या बल के बावजूद यह प्रस्ताव वैध नहीं माना जा सकता है।

यही वजह है कि टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के दोबारा चेयरमैन बनने के पूरे प्रस्ताव को शुरू से ही खारिज और निष्प्रभावी करार दिया है। कॉर्पोरेट मामलों के जानकारों का मानना है कि टाटा ग्रुप के इतिहास में यह अपने आप में एक अनूठा मामला है जहां ट्रस्ट और होल्डिंग कंपनी के बीच इस स्तर का वैचारिक और कानूनी मतभेद खुलकर सामने आया है।

क्या कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे नोएल टाटा? आगे क्या हो सकता है

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में चुप बैठने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। वे इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को देश की किसी अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। यदि यह मामला कोर्ट में जाता है, तो टाटा संस के गवर्नेंस स्ट्रक्चर और टाटा ट्रस्ट्स के साथ उसके संबंधों पर एक लंबी कानूनी बहस छिड़ सकती है।

टाटा ग्रुप के भीतर शेयरहोल्डिंग पैटर्न को देखें तो टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी करीब 66% है, जबकि बाकी हिस्सेदारी अन्य टाटा कंपनियों, शापूरजी पलोनजी परिवार (पूर्व में) और टाटा परिवार के अन्य सदस्यों के पास है। ऐसे में टाटा ट्रस्ट्स की मर्जी के बिना कोई भी बड़ा फैसला लेना लंबे समय में कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

"टाटा संस के बोर्ड में नियमों की अनदेखी करके बहुमत साबित करने का प्रयास किया गया है। ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों की सहमति के बिना यह नियुक्ति कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरती है। हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं।" — टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े करीबी सूत्र

देश के सबसे बड़े व्यावसायिक घराने पर इस विवाद का असर

टाटा ग्रुप न केवल भारत का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप है, बल्कि अपनी एथिक्स, वैल्यूज और पारदर्शी कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। ऐसे में इस ग्रुप के दो शीर्ष संस्थानों के बीच इस तरह की खींचतान आना निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।

एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने पिछले कुछ सालों में कई बड़े अधिग्रहण किए हैं और डिजिटल सेक्टर से लेकर एयरलाइंस तक अपने कारोबार को भारी विस्तार दिया है। ऐसे में नेतृत्व को लेकर चल रहा यह विवाद यदि जल्द ही आपसी बातचीत से नहीं सुलझा, तो इसका असर टाटा ग्रुप की भविष्य की रणनीतिक योजनाओं पर भी पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या टाटा ग्रुप के भीतर के बुजुर्ग और अनुभवी मार्गदर्शक इस मामले को अदालत तक जाने से रोक पाते हैं या फिर भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में एक नया कानूनी अध्याय शुरू होता है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

महंगाई के दौर में भी इस स्कूटर पर फिदा हुए लोग: महज 31 दिनों में बिक गए पौने डेढ़ लाख वाहन, जानें क्या है इसकी खासियतNATIONAL

महंगाई के दौर में भी इस स्कूटर पर फिदा हुए लोग: महज 31 दिनों में बिक गए पौने डेढ़ लाख वाहन, जानें क्या है इसकी खासियत

25 सित॰
शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदाNATIONAL

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदा

25 सित॰
बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानीNATIONAL

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

25 सित॰
ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्यNATIONAL

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

25 सित॰
बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारीNATIONAL

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

25 सित॰
पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजराNATIONAL

पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजरा

24 सित॰
बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशनNATIONAL

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

24 सित॰
सैम ऑल्टमैन से कई गुना अमीर निकला ओपनएआई का ये को-फाउंडर, फोर्ब्स लिस्ट में चौंकाने वाली एंट्रीTECH-AUTO

सैम ऑल्टमैन से कई गुना अमीर निकला ओपनएआई का ये को-फाउंडर, फोर्ब्स लिस्ट में चौंकाने वाली एंट्री

21 सित॰