दिल्ली कोर्ट से लौटने के बाद तेजस्वी यादव का आक्रामक तेवर
आईआरसीटीसी होटल टेंडर घोटाला मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दिल्ली से पटना वापस लौट चुके हैं। पटना एयरपोर्ट पर उतरते ही मीडिया से मुखातिब हुए तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन उनकी पार्टी इस तानाशाही रवैये से डरने वाली नहीं है और कानूनी स्तर पर हर लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि देश में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (Income Tax Department) जैसी स्वायत्त एजेंसियों का खुला दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि वे या उनके दल के अन्य नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो जाते, तो उन्हें देश का सबसे बड़ा हरिश्चंद्र मान लिया जाता और उनके सारे कथित दाग एक ही पल में धुल जाते।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
केंद्र सरकार के साथ-साथ तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी कड़े शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि हालिया समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करने के बजाय सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने इसे महज़ भूल नहीं बल्कि एक बड़ा 'पाप' करार दिया।
राजद नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आज जो लोग संवैधानिक कुर्सियों पर बैठकर मनमानी कर रहे हैं और सत्ता के संरक्षण में नियमों को ताक पर रख रहे हैं, उन्हें भविष्य में इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली को देश की जनता बहुत बारीकी से देख रही है और समय आने पर इसका लोकतांत्रिक जवाब दिया जाएगा।
"भाजपा सरकार में बैठे लोगों के लिए नियम अलग हैं और विपक्ष के लिए अलग। अगर हम आज उनकी पार्टी में चले जाएं, तो हम हरिश्चंद्र बन जाएंगे। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं, जनता सब देख रही है और इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।" — तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार
बिहार विधान परिषद चुनाव और महागठबंधन की रणनीति पर स्थिति स्पष्ट
आगामी विधान परिषद (MLC) चुनावों को लेकर महागठबंधन के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद या खींचतान की खबरों को तेजस्वी यादव ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजद का पुराना इतिहास रहा है कि स्थानीय निकाय, स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में पार्टी की रणनीति समय और परिस्थितियों के अनुसार तय होती है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में भी राजद ने अपने दम पर कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और शानदार सफलता हासिल करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी।
तेजस्वी ने दावा किया कि इस बार भी पार्टी अपने दम-खम और सांगठनिक मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और बेहतर परिणाम हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सभी दलों को अपनी रणनीति बनाने और चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है, जिसे किसी भी तरह का मतभेद नहीं माना जाना चाहिए।
संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण पर राष्ट्रीय स्तर पर छिड़ी बहस
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश की सभी प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्ट्स ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरे सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ सहित तमाम महत्वपूर्ण सरकारी और स्वतंत्र संस्थाओं को दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे आम जनता का भरोसा इन तंत्रों से उठ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव के इन तीखे तेवरों से बिहार की सियासत आने वाले दिनों में और अधिक गर्म होने वाली है। एक तरफ जहां राजद कानूनी मुकदमों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी राजनीतिक मोर्चे पर भी आक्रामक रुख अपनाकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। देखना यह होगा कि आने वाले चुनावी और राजनीतिक घटनाक्रमों में इन बयानों का जमीन पर कितना असर देखने को मिलता है।




