मोबाइल रिचार्ज के पुराने गणित से मिलेगी मुक्ति
भारतीय मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए रिचार्ज का चक्र हमेशा से ही एक उलझन भरा विषय रहा है। अब तक देश के करोड़ों प्रीपेड यूजर्स को महीने भर के रिचार्ज का मतलब सिर्फ 28 दिनों की वैधता पाना ही समझ आता था। भले ही साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन इस 28 दिन के साइकिल की वजह से उपभोक्ताओं को पूरे 365 दिन चलाने के लिए साल भर में 13 बार रिचार्ज करवाना पड़ता था। इस व्यवस्था की वजह से हर साल ग्राहकों की जेब पर एक अतिरिक्त रिचार्ज का वित्तीय बोझ अनचाहे ही पड़ जाता था।
दबे पांव आम आदमी की जेब काटने वाली इस व्यवस्था पर अब भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने कड़ी नजर डाली है। ट्राई द्वारा उठाए गए इस कदम से देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नए नियमों के आने के बाद टेलीकॉम सेक्टर का पूरा गणित बदल जाएगा और कंपनियों को उपभोक्ताओं की सुविधा के अनुसार प्लान डिजाइन करने होंगे।
संबंधित खबरें
TRAI के नए नियमों से कैसे बचेगी आपकी गाढ़ी कमाई
टेलीकॉम सेक्टर के नए नियमों के तहत अब कंपनियों को अधिक लचीले और ग्राहक-हितैषी विकल्प देने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई उपभोक्ता पहले 300 रुपये का रिचार्ज 28 दिन की वैधता के साथ कराता था, तो उसे साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता था। इस हिसाब से उसका सालाना खर्च 3,900 रुपये बैठता था। वहीं, अगर यही रिचार्ज 30 दिन की वैधता के साथ मिले, तो साल भर में केवल 12 बार रिचार्ज की जरूरत पड़ेगी और खर्च घटकर 3,600 रुपये रह जाएगा।
इस प्रकार देखा जाए तो केवल वैधता के दिनों में बदलाव होने मात्र से ही ग्राहक को सालभर में लगभग एक पूरे रिचार्ज यानी करीब 7.7 प्रतिशत की सीधी बचत हो जाएगी। यही गणित छोटे और बड़े सभी प्रकार के प्लान्स पर लागू होता है, जिससे आम मध्यम वर्ग और खासकर सीमित आय वाले लोगों को सीधा वित्तीय लाभ पहुंचेगा।
बिना डेटा वाले सस्ते वॉइस और एसएमएस प्लान्स की वापसी
आज के दौर में बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने घर, ऑफिस या शिक्षण संस्थानों में वाई-फाई का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अपने स्मार्टफोन पर हर महीने मोबाइल डेटा की कोई खास आवश्यकता नहीं होती है। इसके बावजूद उन्हें मजबूरी में ऐसे प्लान खरीदने पड़ते थे जिनमें मंहगा डेटा बंडल साथ जुड़ा होता था। ऐसे यूजर्स केवल कॉलिंग और जरूरी ओटीपी या एसएमएस के लिए ही मोबाइल नेटवर्क का उपयोग करते हैं।
नए नियमों के लागू होने के बाद जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों को केवल वॉइस और एसएमएस वाले विशेष टैरिफ वाउचर देना अनिवार्य कर दिया गया है। इन प्लान्स की कीमत डेटा वाले प्लान्स की तुलना में काफी कम होगी, जिससे उन ग्राहकों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी जो बेकार के डेटा के लिए अपनी जेब ढीली करने को मजबूर थे।
संसद से लेकर सड़क तक गूंजा था प्रीपेड रिचार्ज का मुद्दा
मोबाइल रिचार्ज की इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से आम जनता में असंतोष था। कई लोगों ने इस मामले पर अपनी चिंताएं जनप्रतिनिधियों के सामने रखी थीं। इसी क्रम में सांसद राघव चड्ढा ने संसद के भीतर इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था और 28 दिन की वैधता वाले सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने उपभोक्ताओं की इस समस्या का समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास किए।
"प्रीपेड मोबाइल यूजर्स के लिए यह एक बेहद सुखद खबर है। हमने संसद में इस मुद्दे को उठाया था ताकि आम जनता को कंपनियों की इस पेचीदा व्यवस्था से बचाया जा सके। नए नियमों से न केवल 30 दिन की वैधता मिलेगी, बल्कि बिना डेटा वाले सस्ते प्लान्स से भी लोगों को फायदा होगा।" — राघव चड्ढा, सांसद
नियामक प्राधिकरण द्वारा इस अधिसूचना को जारी किए जाने के बाद अब राजनीतिक हलकों में भी इसका स्वागत किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि टेलीकॉम कंपनियां इन नियमों को उनकी मूल भावना के साथ लागू करती हैं, तो यह भारतीय उपभोक्ताओं के डिजिटल सफर में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
आने वाले दिनों में टेलीकॉम बाजार पर पड़ेगा असर
भारतीय टेलीकॉम बाजार दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिस्पर्धी बाजारों में से एक है। यहां हर दिन करोड़ों लोग अपने प्रीपेड प्लान को बदलते या रीन्यू कराते हैं। ऐसे में ट्राई के इस नए आदेश से कंपनियों की रणनीतियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कंपनियां इन नियमों को किस प्रकार धरातल पर उतारती हैं और क्या वे मौजूदा कीमतों पर ही 30 दिन की वैधता मुहैया कराती हैं, यह देखना अभी बाकी है।
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने ऑपरेटर द्वारा नए प्लान्स की घोषणा किए जाने के बाद अपनी जरूरत के हिसाब से सबसे किफायती विकल्प का चुनाव करें। यदि कंपनियां इन नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करती हैं, तो मोबाइल उपभोक्ताओं का हर साल होने वाला अनावश्यक खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।







