नई कार खरीदने का उत्साह और डिलीवरी के समय की जाने वाली बड़ी चूक
अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से पहली नई कार खरीदना किसी भी परिवार के लिए बेहद खास और भावनात्मक पल होता है। शोरूम के अंदर नई गाड़ी पर से पर्दा उठने का इंतजार, केबिन में मिलने वाली ताजी खुशबू और चमकता हुआ पेंट इंसान के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। लोग इस खास मौके को कैमरे में कैद करने और दोस्तों के साथ जश्न मनाने में इतने मशरूफ हो जाते हैं कि वे मुख्य कागजी औपचारिकताओं और गाड़ी की तकनीकी जांच को नजरअंदाज कर देते हैं। यही वह पल होता है जहां से डीलरशिप या शोरूम कर्मचारियों द्वारा खेल शुरू किए जाने की गुंजाइश बन जाती है।
कई बार लोग उत्साह में आकर डिलीवरी पेपर पर बिना सोचे-समझे हस्ताक्षर कर देते हैं और बाद में घर ले जाने पर गाड़ी में मामूली डेंट, पेंट का शेड अलग मिलने या किसी पार्ट में खराबी की शिकायत सामने आती है। ऐसे मामलों में डीलर की जिम्मेदारी लगभग खत्म हो जाती है क्योंकि आपने गाड़ी रिसीव करते समय उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। इसी नुकसान से बचने और ग्राहक को धोखाधड़ी से बचाने के लिए ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स 'प्री-डिलिवरी इंस्पेक्शन' यानी PDI करवाने की सलाह देते हैं। यह एक ऐसा हथियार है जिसकी मदद से आप शोरूम वालों की किसी भी चालाकी को वक्त रहते पकड़ सकते हैं।
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आखिर क्या होता है PDI और क्यों है यह कार खरीदारों के लिए सबसे जरूरी कदम?
PDI का पूरा मतलब 'प्री-डिलिवरी इंस्पेक्शन' यानी वाहन मिलने से पहले उसकी गुणवत्ता की गहन जांच होता है। जब कोई कार फैक्ट्री से बनकर डीलरशिप के स्टॉकयार्ड में पहुंचती है, तो जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह से दोषमुक्त हो। ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लंबी यात्रा में खरोंच लग सकती है, मौसम की मार से कुछ हिस्सों पर असर पड़ सकता है या फिर किसी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट में तकनीकी खामी आ सकती है। इसके अलावा, कई बार डीलर्स ग्राहकों को पुराना स्टॉक या पिछले साल निर्मित गाड़ियां भी बेचने की कोशिश करते हैं।
जब आप खुद या किसी ऑटोमोबाइल जानकार के साथ शोरूम के स्टॉकयार्ड में जाकर गाड़ी के हर एक हिस्से की फिजिकली और मेकैनिकली जांच करते हैं, तो उसे PDI कहा जाता है। देश के जाने-माने ऑटो पत्रकार और विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि कभी भी कागजों पर साइन करने और पेमेंट पूरी करने से पहले गाड़ी को अपनी आंखों से अच्छी तरह परख लें। ऐसा करने से आप हजारों-लाखों रुपये के संभावित नुकसान और मानसिक तनाव से बच सकते हैं.
VIN नंबर की जांच से खुलेगा सच: ऐसे पहचानें पुरानी गाड़ी का खेल
कार खरीदने के दौरान सबसे बड़ा खेल उसके मैन्युफैक्चरिंग ईयर और महीने के साथ खेला जाता है। कई बार डीलर आपको महीनों पुरानी या पिछला स्टॉक क्लियर करने के लिए नई कार कहकर बेच देते हैं। इससे बचने का सबसे अचूक तरीका है गाड़ी पर अंकित VIN यानी 'व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर' की जांच करना। यह नंबर आमतौर पर ड्राइवर साइड पिलर, इंजन बे या फ्रंट पैसेंजर सीट के नीचे खुदा होता है।
आपको इस VIN नंबर को अपने अलॉटमेंट लेटर, टैक्स इनवॉइस और बीमा दस्तावेजों से बारीकी से मिलाना चाहिए। इस यूनीक नंबर के जरिए आप आसानी से यह डिकोड कर सकते हैं कि गाड़ी का निर्माण किस महीने और साल में हुआ था। यदि डीलर ने आपको हाल ही की बनी कार कहकर कोई पुरानी गाड़ी थमाने की कोशिश की है, तो VIN नंबर तुरंत इसका पर्दाफाश कर देगा। ऐसे में आप तुरंत डिलीवरी लेने से मना कर सकते हैं और दूसरी गाड़ी की मांग कर सकते हैं।
शाम के वक्त या बेसमेंट में कभी न करवाएं PDI, जानें सही तरीका और समय
अक्सर कार डीलरशिप्स ग्राहकों को शाम के समय या शोरूम के बेसमेंट में डिलीवरी लेने के लिए बुलाती हैं, जहां कृत्रिम और हल्की रोशनी होती है। ऐसी जगहों पर गाड़ी के पेंट की असली फिनिश, माइनर डेंट या बॉडी पैनल्स पर लगे स्क्रैच दिखाई नहीं देते। ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स की मानें तो PDI हमेशा खुले आसमान के नीचे प्राकृतिक दिन के उजाले में ही होना चाहिए।
"कभी भी शाम के वक्त या कम रोशनी वाले तहखाने में PDI न करवाएं। पेंट के छिलने, पैनलों के गलत संरेखण और बारीक खरोंचों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए प्राकृतिक दिन का प्रकाश बेहद आवश्यक है। डीलर के जल्दबाजी दिखाने पर भी कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे का समय मांगें और इत्मीनान से जांच करें।" — ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स गाइड
निरीक्षण के दौरान गाड़ी के चारों टायर्स और स्पेयर व्हील की मैन्युफैक्चरिंग डेट (DOT कोड) को भी जरूर देखना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि टायर बहुत पुराने तो नहीं हैं। इसके अलावा सभी दरवाजों, बोनट और बूट लिड को खोलकर यह परखें कि वे बिना किसी आवाज के सुचारू रूप से काम कर रहे हैं या नहीं।
पेंट क्वालिटी, पैनल गैप और ग्लास एरिया की बारीकी से करें पड़ताल
गाड़ी के एक्सटीरियर की जांच करते समय उसके बॉडी पैनल्स के बीच की दूरी को गौर से देखें। हुड, दरवाजे, बूट लिड और फेंडर्स के चारों ओर की फिनिशिंग लाइनें बिल्कुल एक समान होनी चाहिए। यदि कहीं भी पैनल गैप में असमानता दिखती है, तो इसका मतलब है कि गाड़ी की असेंबली में कोई गड़बड़ी है या वह रीपेयर की गई है। इसके साथ ही बंपर और मेटल बॉडी के बीच पेंट के शेड का अंतर भी अच्छी तरह जांच लें।
आगे और पीछे की विंडशील्ड तथा सभी खिड़कियों के कांच पर किसी भी तरह के स्टोन चिप्स या बारीक दरारें नहीं होनी चाहिए। हेडलाइट्स, टेललाइट्स और फॉग लैंप्स की हाउसिंग में नमी या दरार की जांच भी जरूरी है। जब आप इन सभी पहलुओं पर खरा उतरने के बाद ही गाड़ी की चाबी अपने हाथ में लेते हैं, तभी आपका कार खरीदने का यह अनुभव पूरी तरह सुरक्षित और आनंददायक बनता है।




