डिजिटल प्रचार का नया दौर: अब रील्स से तय होगी सरकारी योजनाओं की सफलता
आज का दौर पूरी तरह से डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स का है। ऐसे में सरकारें भी अपनी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने के लिए नए-नए तौर-तरीके अपना रही हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बेहद दिलचस्प और आधुनिक कदम उठाया है। अब सरकारी योजनाओं से लाभान्वित होने वाले उद्यमी, कारीगर और युवा अपनी सफलता की कहानी फाइलों या कागजों तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि सोशल मीडिया रील्स के माध्यम से दुनिया को बताएंगे कि कैसे इन योजनाओं ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को 'सेवा की कहानी-डिजिटल व रील अभियान' का नाम दिया गया है। यह अभियान तय समय सीमा के तहत चलाया जा रहा है, जिसमें प्रशासनिक अमले से लेकर स्थानीय स्तर पर काम करने वाले उद्यमियों और लाभार्थियों को जोड़ा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी आंकड़ों से आगे निकलकर धरातल पर हुए बदलाव को डिजिटल माध्यम से आम जनमानस के सामने रखना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं से प्रेरित होकर आगे आ सकें।
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क्या है 'सेवा की कहानी-डिजिटल व रील अभियान'?
जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के अंतर्गत चलने वाली तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए इस विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। इस अभियान के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल वित्तीय वर्ष का बजट और खर्च का ब्योरा देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि योजना का जमीनी असर डिजिटल दुनिया में कितना दूर तक पहुंचा, इसका भी पूरा लेखा-जोखा रखा जाएगा।
इस अभियान के दायरे में कई प्रमुख योजनाएं शामिल हैं, जैसे मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना। इन सभी योजनाओं के माध्यम से राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमी (MSME), स्थानीय हस्तशिल्पकार, पारंपरिक कारीगर और युवा अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं। अब इन सभी को अपनी सफलता की दास्तां को एक छोटी सी वीडियो रील के रूप में सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
शासन को देना होगा रील्स और डिजिटल पहुंच का पूरा हिसाब
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रिपोर्टिंग के पैटर्न को पूरी तरह से बदल दिया गया है। पहले जहां जिला प्रशासन केवल यह बताता था कि उसने कितने कर्ज बांटे या कितनी यूनिट स्थापित कीं, वहीं अब शासन स्तर पर यह भी हिसाब मांगा जा रहा है कि विभाग की तरफ से कितनी रील्स बनाई गईं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसमें क्या योगदान दिया और यूट्यूबर्स या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने किस हद तक इसका प्रचार किया।
आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली कुल रील्स और उनके व्यूज का अलग-अलग ब्योरा देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए शासन की ओर से एक सख्त और स्पष्ट प्रारूप भी जारी किया गया है। हर जिले को तय फॉर्मेट में अधिकतम पांच तस्वीरों के साथ दिन, महीने और साल के हिसाब से डेटा भेजना होता है। तस्वीरों का साइज और फॉर्मेट भी तकनीकी मानकों के अनुसार तय किया गया है, ताकि डिजिटल डेटाबेस को दुरुस्त रखा जा सके।
लाभार्थी खुद बनेंगे अपनी सफलता के ब्रांड एंबेसडर
पारंपरिक विज्ञापनों और सरकारी विज्ञापनों से इतर, इस अभियान का सबसे बड़ा फोकस 'पीयर-टू-पीयर' यानी लाभार्थियों की जुबानी प्रचार करना है। जब कोई आम आदमी किसी योजना से जुड़कर अपना रोजगार खड़ा करता है और खुद कैमरे के सामने आकर अपनी संघर्ष गाथा और सफलता साझा करता है, तो उसका प्रभाव समाज पर बहुत गहरा पड़ता है।
"सरकार की योजनाओं से लाभांवित हुए लाभार्थियों की रील्स बनाई जा रही हैं। इससे लाभार्थियों की जुबानी योजनाओं का प्रचार प्रसार होगा, जिससे अन्य पात्र लोग भी इन योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। सभी डिजिटल गतिविधियों को तय पोर्टल पर समय से अपलोड किया जा रहा है।" — जिला उद्योग केंद्र अधिकारी
इस पहल से एक तरफ जहां योजना के वास्तविक लाभार्थियों को पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में बैठे युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है कि वे कैसे अपना खुद का स्टार्टअप या बिजनेस शुरू कर सकते हैं।
जिलों की होगी डिजिटल रैंकिंग, प्रशासनिक अमले में उत्साह
अभियान का यह चरण पूरा होने के बाद शासन स्तर पर एक व्यापक समीक्षा बैठक होगी। इस समीक्षा के आधार पर सभी जिलों के डिजिटल प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। जो जिले सोशल मीडिया पर सबसे अधिक, रचनात्मक और प्रभावी रील्स बनाएंगे और योजनाओं का जमीनी प्रचार प्रसार करेंगे, उन्हें विशेष रैंकिंग दी जाएगी।
इस रैंकिंग प्रणाली के आने से स्थानीय स्तर पर उद्योग केंद्रों और अधिकारियों के बीच भी एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। सभी जिले यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि उनके यहां के स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों की सफलता की कहानियां अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें। यह पहल निश्चित रूप से डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूत करने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं को पारदर्शी और जन-जन तक पहुंचाने का एक बेहतरीन माध्यम साबित हो रही है।





