उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे से सामने आया अनोखा मामला
उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग से एक बेहद अजीबोगरीब और चौंकाने वाला वाकया सामने आया है, जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की शपथ लेने वाला एक सिपाही खुद ही चुनावी समर में कूदने की तैयारी में जुट गया है। मामला गोरखपुर का है, जहां डायल-112 में तैनात रहे एक पुलिसकर्मी पर महकमे के नियमों को ताक पर रखकर राजनीति करने का गंभीर आरोप लगा है। यह सिपाही न केवल अपनी ड्यूटी से लंबे समय तक नदारद रहा, बल्कि अब एक प्रमुख राजनीतिक दल के मंच से खुलकर चुनावी हुकूम भरता हुआ भी दिखाई दे रहा है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला अनुशासनहीनता, सरकारी सेवा नियमों के उल्लंघन और एक पुलिसकर्मी द्वारा राजनीतिक दल से जुड़ने की सीमा पार करने से जुड़ा हुआ है। महकमे के भीतर इस बात को लेकर भारी चर्चा है कि आखिर कैसे एक निलंबित कर्मचारी खुलेआम राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो सकता है और वह भी तब जब उसकी विभागीय जांच चल रही हो। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस प्रकरण में कड़ा रुख अपनाते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे घटनाक्रम में और कौन-कौन सी खामियां रहीं।
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कौन है आरोपी सिपाही और क्या है उसकी पृष्ठभूमि?
चर्चा के केंद्र में आए इस सिपाही की पहचान श्याम सुंदर चौहान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से संतकबीर नगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नैना झला गांव का रहने वाला है। श्याम सुंदर उत्तर प्रदेश पुलिस बल का पुराना सिपाही है और वह 1994 बैच का पासआउट है। साल 2023 के दौरान उसका स्थानांतरण कुशीनगर से गोरखपुर जिले में हुआ था, जहां उसे डायल-112 सेवा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन गोरखपुर आने के बाद उसने अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया और उसका झुकाव धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की ओर बढ़ने लगा।
शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि सिपाही ने पिछले कुछ समय से अपने कार्यक्षेत्र से दूरी बना ली थी और वह पूरी तरह से संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट पर सक्रिय हो गया था। स्थानीय स्तर पर वह समाजवादी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने लगा और धीरे-धीरे पार्टी के स्थानीय नेताओं के साथ उसकी नजदीकियां बढ़ती चली गईं। कुछ ही महीनों में उसकी सक्रियता इतनी बढ़ गई कि वह पार्टी के पोस्टरों और बैठकों में प्रमुखता से नजर आने लगा, जिसके बाद यह पूरा मामला पुलिस के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया।
ड्यूटी से लंबी गैरहाजिरी और निलंबन के बाद भी लापरवाही
पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, श्याम सुंदर चौहान लंबे समय से अपनी ड्यूटी से बिना किसी आधिकारिक सूचना के अनुपस्थित चल रहा था। जब अधिकारियों को उसकी इस लंबी गैरहाजिरी और कार्य के प्रति उदासीनता की जानकारी मिली, तो लगभग तीन महीने पहले उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। नियम के मुताबिक निलंबन की कार्रवाई के बाद कर्मचारी को संबंधित पुलिस लाइन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है और विभागीय प्रक्रिया का पालन करना होता है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि निलंबन के इतने दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी सिपाही ने पुलिस लाइन में रिपोर्ट नहीं किया। वह अपनी ड्यूटी और विभागीय कार्रवाई की परवाह किए बिना लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहा। हाल ही में धनघटा क्षेत्र के लोहरेया में आयोजित समाजवादी पार्टी की एक समीक्षा बैठक में उसने मंच से न केवल भाषण दिया, बल्कि खुद को पुलिस विभाग का सिपाही बताते हुए संगठन को मजबूत करने की बात भी कही। इस दौरान उसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनमें वह सपा की लाल टोपी पहने हुए नजर आ रहा है।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की चाहत
मीडिया और जांच एजेंसियों के सामने आने के बाद सिपाही श्याम सुंदर चौहान ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर खुलकर बात की है। उसका कहना है कि वह लंबे समय से समाजवादी पार्टी की नीतियों और उसकी विचारधारा से गहराई से प्रभावित रहा है। उसका तर्क है कि पुलिस विभाग की नौकरी में रहकर वह आम जनता की उस तरह से सेवा और मदद नहीं कर पा रहा था, जैसी उसकी इच्छा थी। इसी विवशता के चलते उसने खाकी वर्दी छोड़कर चुनावी राजनीति में उतरने का मन बनाया।
"मुझे ऐसा महसूस हुआ कि पुलिस विभाग में रहते हुए मैं आम जनता को न्याय नहीं दिला सकता और न ही उनकी पूरी तरह से मदद कर सकता हूँ। इसलिए मैंने राजनीति में आने का पक्का फैसला किया है। यदि पार्टी मुझे मौका देती है, तो मैं पूरी ताकत से मैदान में उतरूंगा।" — श्याम सुंदर चौहान, निलंबित सिपाही
चौहान का दावा है कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से लगातार धनघटा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहा है और स्थानीय जनता के सुख-दुख में शामिल हो रहा है। उसकी योजना आने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अपनी किस्मत आजमाने की है। हालांकि, एक सेवारत सरकारी कर्मचारी रहते हुए इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां चलाना कानूनन पूरी तरह वर्जित है।
उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों के आचरण और नियमों को लेकर बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों के मुताबिक, कोई भी सरकारी सेवक किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नहीं जुड़ सकता है। ‘उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956’ के प्रावधानों के तहत किसी भी कर्मचारी का चुनाव प्रचार करना, राजनीतिक मंचों से भाषण देना या किसी दल की सदस्यता लेना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि श्याम सुंदर चौहान के मामले में इन सभी नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है। न केवल उसने बिना अनुमति के लंबी अनुपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि खुलेआम राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर वर्दी की गरिमा को भी दांव पर लगा दिया। यही वजह है कि पुलिस विभाग इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है और उसके खिलाफ कानूनी व विभागीय शिकंजा कसता जा रहा है।
एसएसपी का कड़ा एक्शन, एसपी क्राइम कर रहे हैं विस्तृत जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कौस्तुभ ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया और तत्काल प्रभाव से विस्तृत जांच के आदेश दे दिए। एसएसपी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सिपाही को पहले ही लंबी गैरहाजिरी के आरोप में निलंबित किया जा चुका है और वर्तमान में इस पूरे मामले की विभागीय जांच एसपी क्राइम द्वारा की जा रही है।
जांच के दायरे में यह भी शामिल किया जा रहा है कि आखिर इतने लंबे समय तक उसकी गैरहाजिरी के बावजूद किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत हाजिरी दर्ज होती रही। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उसके राजनीतिक पोस्ट और कार्यक्रमों में शामिल होने की पुष्टि के बाद उन साक्ष्यों को भी जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी सिपाही के खिलाफ और भी कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि महकमे में अनुशासनहीनता का ऐसा उदाहरण दोबारा न पेश हो सके।








