सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न प्राप्त करने वाले नागरिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी अपडेट सामने आया है। यदि आपने भी नए राशन कार्ड के लिए आवेदन किया है या फिर आपका नया राशन कार्ड बनकर तैयार हो चुका है, तो यह खबर आपके लिए सीधा असर डालने वाली है। अक्सर लोगों को लगता है कि एक बार डिजिटल या कागजी रूप में राशन कार्ड हाथ में आ जाने के बाद सरकारी कोटे से मिलने वाला राशन स्वतः मिलना शुरू हो जाएगा, लेकिन अब नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया गया है। केवल कार्ड जारी हो जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको अगले ही महीने से गेहूं, चावल और अन्य खाद्य सामग्री का लाभ मिलने लगेगा।
कार्ड मिलने के बाद भी क्यों जरूरी है नया नियम
खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नए राशन कार्डों को इस्तेमाल के लिए एक्टिवेट यानी सक्रिय कराना अनिवार्य है। इस सक्रियकरण की प्रक्रिया का सबसे अहम चरण ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा करना है। जब तक कोई लाभार्थी अपने नए राशन कार्ड पर दर्ज सभी सदस्यों का बायोमेट्रिक या आधार आधारित सत्यापन नहीं करवा लेता, तब तक सिस्टम उस कार्ड को निष्क्रिय श्रेणी में रखेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और पात्र व्यक्ति तक ही सरकारी योजना का लाभ पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो सके।
विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब पात्रता की जांच हो जाती है और सभी संबंधित अधिकारी अपनी संस्तुति दे देते हैं, तब जाकर नया राशन कार्ड जनरेट होता है। लेकिन इसके तुरंत बाद मिलने वाला कार्ड 'डॉर्मेंट' या बिना एक्टिवेशन के होता है। इसे चालू हालत में लाने के लिए संबंधित कार्डधारक को प्रशासनिक प्रक्रिया के अगले चरण यानी ई-केवाईसी से गुजरना ही होगा। ऐसा नहीं करने पर कोटेदार की मशीन पर पर्ची नहीं कटेगी और आपको खाली हाथ लौटना पड़ सकता है।
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नजदीकी सरकारी राशन की दुकान पर ऐसे होगी प्रक्रिया
इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लाभार्थियों को किसी भी प्रकार के सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने इसके लिए बेहद आसान व्यवस्था बनाई है। जिन नागरिकों के नए कार्ड बन चुके हैं, वे अपने क्षेत्र की उचित दर की दुकान यानी सरकारी कोटे की दुकान पर जा सकते हैं। वहां दुकान संचालक के पास उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल यानी ई-पोस (e-PoS) मशीन के माध्यम से यह सत्यापन का काम पूरा किया जाता है।
दुकान पर जाते समय लाभार्थियों को अपने साथ अपना आधार कार्ड और परिवार के अन्य सभी सदस्यों का आधार कार्ड अनिवार्य रूप से ले जाना होगा। ई-पोस मशीन पर फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के जरिए जैसे ही मिलान सफल होगा, उस कार्ड की वैधता और सक्रियता सुनिश्चित कर दी जाएगी। जिला पूर्ति अधिकारियों ने भी साफ कर दिया है कि कोटेदार इस काम के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं ले सकते हैं, और यदि कोई इसमें आनाकानी करता है तो इसकी सीधी शिकायत जिला मुख्यालय पर की जा सकती है।
लंबित आवेदनों का सत्यापन और विभागीय जांच प्रक्रिया
प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस समय नए राशन कार्डों के लिए आए आवेदनों की भारी संख्या लंबित पड़ी है। उदाहरण के तौर पर, बाराबंकी जिले में ही दस हजार से अधिक नए आवेदन सत्यापन की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। जैसे-जैसे फील्ड वेरिफिकेशन का काम पूरा होता है, वैसे-वैसे नए कार्ड जारी किए जाते हैं। पत्रावली सबसे पहले पूर्ति निरीक्षक के पास जाती है, जहां से ग्राउंड लेवल की जांच रिपोर्ट तैयार होती है। इसके बाद फाइल जिला पूर्ति अधिकारी के पास पहुंचती है, जहां से डिजिटल अप्रूवल मिलता है।
यह लंबी प्रशासनिक कवायद इसलिए की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी अपात्र व्यक्ति इस योजना का गलत लाभ न उठा सके। जब यह पूरी छानबीन पूरी हो जाती है, तब जाकर कार्ड प्रिंट या डिजिटल रूप में सामने आता है। लेकिन जैसा कि पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है, प्रशासनिक मंजूरी मिलना और कोटेदार से राशन मिलना अब दो अलग-अलग चरण बन चुके हैं, जिन्हें बीच की ई-केवाईसी की कड़ी ही आपस में जोड़ती है।
पुराने राशन कार्डधारकों को क्या करना होगा
इस पूरी खबर को लेकर कई जगहों पर यह भ्रम भी फैल रहा है कि क्या राज्य के सभी पुराने राशन कार्ड अचानक बंद होने वाले हैं? इस संबंध में खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम मुख्य रूप से नए राशन कार्डों के सक्रियकरण से जुड़ा हुआ है। इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि पहले से चल रहे सभी पुराने और सक्रिय राशन कार्ड रातों-रात रद्द कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार समय-समय पर अभियान चलाकर पुराने कार्डों में भी सदस्यों की ई-केवाईसी या पुनर्सत्यापन का कार्य करवाती रही है ताकि फर्जी या मृत व्यक्तियों के नाम पर उठ रहे राशन को रोका जा सके।
यदि किसी पुराने कार्डधारक को भी विभाग की ओर से ई-केवाईसी कराने का निर्देश मिला है, तो उन्हें भी बिना देर किए अपनी उचित दर दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी करवा लेनी चाहिए। विभाग का मुख्य लक्ष्य खाद्यान्न वितरण प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता लाना है, ताकि एक भी जरूरतमंद नागरिक सरकारी मदद से वंचित न रह जाए।
"नया राशन कार्ड बन जाना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक कार्ड की ई-केवाईसी पूरी नहीं होगी तब तक वह सक्रिय नहीं होगा और उस पर खाद्यान्न का वितरण संभव नहीं हो पाएगा। सभी नए लाभार्थियों से अपील है कि वे समय रहते अपने नजदीकी कोटेदार के पास जाएं और आधार आधारित सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करवा लें ताकि उन्हें समय पर राशन मिल सके।" — जिला पूर्ति अधिकारी, खाद्य एवं रसद विभाग, उत्तर प्रदेश
सहायता और हेल्पलाइन की जानकारी
यदि किसी भी नागरिक को अपने नए राशन कार्ड के स्टेटस को चेक करने में या फिर ई-केवाईसी करवाने के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए वे अपने क्षेत्र के संबंधित पूर्ति कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं या फिर अपनी उचित दर दुकान के डीलर से मदद मांग सकते हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के साझा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोर्टल पर भी तमाम जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं।
किसी भी आपात स्थिति या शिकायत के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1800-180-0150 भी जनता के लिए जारी किया गया है, जहां फोन करके सहायता प्राप्त की जा सकती है। अंततः यही सलाह दी जाती है कि यदि आपको आपका नया राशन कार्ड मिल चुका है, तो केवल कागजों को संभालकर न रखें, बल्कि तुरंत अपनी ई-केवाईसी की स्थिति की जांच करें और प्रक्रिया पूरी करके अपने अधिकार को सुरक्षित करें।





