उत्तर प्रदेश में जल्द दौड़ेगी मुंबई जैसी लोकल ट्रेन
देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए एक बेहद काम की और राहत भरी खबर सामने आ रही है। जिस तरह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, कोलकाता और देश की राजधानी दिल्ली में लोकल ट्रेनें आम जनता की जीवनरेखा मानी जाती हैं, ठीक उसी तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश में भी लोकल और मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू होने जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) प्रशासन ने इस दिशा में बहुत तेजी से अपनी कवायद शुरू कर दी है। रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद उन तमाम रूटों का खाका तैयार किया जा रहा है, जहां रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की संख्या सबसे अधिक है और जहां मंथली सीजन टिकट (MST) धारकों की तादाद बहुत ज्यादा है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों और उनके आसपास के इलाकों में नौकरी करने वाले लोगों, छोटे व्यापारियों और विशेष रूप से रोजाना स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाले छात्रों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। वर्तमान में लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में भीड़भाड़ के कारण दैनिक यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब लोकल ट्रेनों के आने से न सिर्फ सफर आरामदायक होगा, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस योजना से यात्रियों को आवागमन का एक बेहतर, सुगम और किफायती विकल्प मिल सकेगा।
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वाराणसी और लखनऊ मंडल के रूटों पर रहेगा विशेष फोकस
पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले वाराणसी और लखनऊ मंडल को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शुरुआती केंद्र बनाया गया है। रेलवे बोर्ड ने इन दोनों मंडलों से उन तमाम व्यस्त रेल रूटों की विस्तृत रिपोर्ट और आंकड़े मांगे हैं, जहां ट्रेनों में हमेशा पैर रखने की जगह नहीं मिलती है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की भारी भीड़ और एमएसटी धारकों की संख्या के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण स्टेशनों के नाम और रूटों के प्रस्ताव तैयार कर रेलवे बोर्ड के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड स्तर पर इन प्रस्तावों का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। जैसे ही रेलवे बोर्ड की तरफ से इन रूटों पर हरी झंडी मिलेगी, ट्रेनों के संचालन की रूपरेखा धरातल पर उतरनी शुरू हो जाएगी। शुरुआती चरण में भीड़ के भारी दबाव वाले चुनिंदा रूटों पर इन ट्रेनों को चलाया जाएगा और बाद में जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या और दायरे को और बढ़ाया जाएगा। रेलवे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों को कम अंतराल (फ्रीक्वेंसी) पर ट्रेनें मिल सकें, ताकि उन्हें लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर इंतजार न करना पड़े।
जेब पर नहीं पड़ेगा भारी बोझ, बेहद कम होगा किराया
आम आदमी के लिए परिवहन के साधन चुनते समय सबसे बड़ा सवाल हमेशा किराए का होता है। उत्तर प्रदेश में शुरू होने जा रही इन नई लोकल और मेमू ट्रेनों को लेकर रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इनका किराया पूरी तरह से सामान्य पैसेंजर श्रेणी के किराए के अनुरूप ही रखा जाएगा। लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों या सुपरफास्ट ट्रेनों के मुकाबले यह विकल्प आम आदमी, मजदूरों और छोटे दुकानदारों की जेब पर बिल्कुल भारी नहीं पड़ेगा।
बढ़ती महंगाई के दौर में रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा वर्ग के लिए यह ट्रेनें किसी वरदान से कम साबित नहीं होंगी। कम किराए में सुरक्षित और तेज सफर पूरा होने से लोगों के मासिक खर्च में भी काफी कमी आएगी। रेलवे जानकारों का कहना है कि एमएसटी धारकों के लिए ये ट्रेनें समय और पैसे दोनों की बचत कराने वाली साबित होंगी।
"मुंबई और कोलकाता की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के चुनिंदा अत्यधिक व्यस्त रूटों पर लोकल और मेमू ट्रेनें चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत प्रस्ताव तैयार कर भेजे जा चुके हैं, जिससे दैनिक यात्रियों का सफर सुगम और किफायती हो सके।" — पूर्वोत्तर रेलवे अधिकारी
त्योहारी सीजन में रेलवे का बड़ा तोहफा, कई स्पेशल ट्रेनें शुरू
एक तरफ जहां लोकल ट्रेनों के संचालन की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए पूर्वोत्तर रेलवे ने यात्रियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्पेशल ट्रेनों के संचालन का भी बड़ा ऐलान किया है। दीपावली और छठ जैसे महापर्वों पर घर जाने वाले यात्रियों को अक्सर कंफर्म टिकट के लिए भारी मारामारी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए रेलवे ने रूटवार स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मऊ और अंबाला कैंट के बीच वाया गोरखपुर एक साप्ताहिक त्योहार स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। ट्रेन संख्या 05301 और 05302 कुल 9 फेरे लगाएगी, जो एक अक्टूबर से 27 नवंबर तक पटरियों पर दौड़ेगी। इसके अलावा योगनगरी ऋषिकेश से कोलकाता के बीच आरक्षित त्योहार स्पेशल एक्सप्रेस (04312-04311) का संचालन 16 अक्टूबर से 22 नवंबर तक किया जाएगा। अमृतसर और कोलकाता के बीच भी विशेष एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जा रही हैं, ताकि उत्तर भारत से पूर्वी राज्यों की यात्रा करने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
लंबी दूरी की ट्रेनों में नो रूम की स्थिति, वेटिंग हुई लंबी
मौजूदा समय में त्योहारों के नजदीक आते ही देश की तमाम प्रमुख ट्रेनों में टिकटों की बुकिंग फुल हो चुकी है। श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस, लखनऊ एसी सुपरफास्ट, बनारस गरीब रथ, अयोध्या कैंट स्पेशल और एसी डबल डेकर एक्सप्रेस जैसी प्रतिष्ठित ट्रेनों में सीटों के लिए भयंकर मारामारी चल रही है। दीपावली के आसपास के दिनों में इन ट्रेनों में अभी से 'नो रूम' और रिग्रेट के हालात बन चुके हैं।
हावड़ा, कोलकाता, जयनगर और अमृतसर जाने वाली कई प्रमुख स्पेशल ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट का आंकड़ा 100 के पार पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में रेलवे द्वारा चलाई जा रही नई त्योहार स्पेशल ट्रेनें और भविष्य में शुरू होने वाली लोकल ट्रेनें यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत का जरिया बन सकती हैं। रेलवे लगातार यह कोशिश कर रहा है कि यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा किया जाए और हर व्यक्ति तक परिवहन की सुगम सुविधा पहुंचाई जा सके।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में लोकल और मेमू ट्रेनों के संचालन की यह पहल राज्य के परिवहन ढांचे में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी। जिस प्रकार महानगरों में लोकल ट्रेनें लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं, उसी प्रकार यूपी के इन रूटों पर भी आम आदमी का सफर बेहद आसान होने की उम्मीद है। त्योहारी सीजन में स्पेशल ट्रेनों का संचालन और दैनिक यात्रियों के लिए लोकल ट्रेनों की यह योजना रेलवे की यात्री-कल्याण नीतियों को मजबूती प्रदान करती है। आने वाले दिनों में जब यह योजना पूरी तरह लागू हो जाएगी, तो उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों को लंबी लाइनों और भीड़भाड़ से काफी हद तक मुक्ति मिल जाएगी।





