उत्तर प्रदेश की बदली आर्थिकी और औद्योगिक बदलाव की कहानी
देश के सबसे बड़े सूबे के तौर पर पहचाना जाने वाला उत्तर प्रदेश अब केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी एक नई इबारत लिख रहा है। कभी बदहाल कानून-व्यवस्था और औद्योगिक सुस्ती के लिए कुख्यात रहा यह राज्य आज दुनिया भर के निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इसका ताजा और जीवंत उदाहरण उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला यानी यूपीआईटीएस के मंच पर साफ तौर पर दिखाई देता है। यह आयोजन महज एक व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह योगी सरकार के सुशासन और आर्थिक मॉडल का वह खुला रिपोर्ट कार्ड है, जिसे देश-दुनिया के नीति-निर्धारक बेहद गौर से देख रहे हैं।
बीते कुछ वर्षों में राज्य के प्रशासनिक ढांचे में आए बड़े बदलावों ने निवेशकों के मन से असुरक्षा का भाव पूरी तरह खत्म कर दिया है। आज स्थिति यह है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां उत्तर प्रदेश को केवल एक विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के सबसे सुरक्षित केंद्र के रूप में देख रही हैं। पारदर्शी नीतियां और समयबद्ध फैसलों ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
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ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से लेकर ट्रेड शो तक मजबूत होती पकड़
राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ही नतीजा है कि आज जापान, सिंगापुर, वियतनाम, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस जैसे देश उत्तर प्रदेश के साथ व्यापारिक साझेदारियों में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की भारी सफलता के बाद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले जैसे आयोजनों ने स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को वैश्विक फलक पर स्थापित कर दिया है। 'निवेश मित्र' और 'निवेश सारथी' जैसे सिंगल विंडो सिस्टम ने उद्यमियों के लिए कारोबार शुरू करने की राह बेहद आसान बना दी है, जिससे लालफीताशाही का दौर अब इतिहास बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और मजबूत होती कनेक्टिविटी ने इसे देश का लॉजिस्टिक्स हब बना दिया है। एक्सप्रेसवे का जाल, नए एयरपोर्ट और बेहतर रेल नेटवर्क ने औद्योगिक इकाइयों के लिए माल की आवाजाही को बहुत सुगम कर दिया है। यही कारण है कि देश के बड़े कॉरपोरेट हाउस अब नोएडा से लेकर पूर्वांचल तक भारी-भरकम निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं।
ओडीओपी योजना से चमक उठी पारंपरिक कारीगरी और हस्तशिल्प
योगी सरकार की महत्वाकांक्षी 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना ने राज्य के सुदूर अंचलों में छिपी प्रतिभा और हुनर को नई पहचान दिलाई है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, फिरोजाबाद के कांच उद्योग, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध सिल्क साड़ियों को अब अंतरराष्ट्रीय खरीदार सीधे मिल रहे हैं। इस व्यापार मेले के माध्यम से स्थानीय स्तर के छोटे कारोबारियों और बुनकरों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का सुनहरा मौका मिला है।
"उत्तर प्रदेश अब देश की रफ्तार को गति देने वाला एक प्रमुख इंजन बन चुका है। यहां का समावेशी विकास मॉडल और निवेशकों के अनुकूल नीतियां राज्य को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिला रही हैं।"— औद्योगिक विकास विशेषज्ञ
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि पारंपरिक पेश से जुड़े लोगों का पलायन रुका है और उन्हें अपने ही गृह जनपद में बेहतर आजीविका के साधन मिलने लगे हैं। सहायक उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को मिले इस नए प्रोत्साहन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी जबर्दस्त मजबूती मिली है।
समावेशी विकास और जन-कल्याण का अनूठा संतुलन
आमतौर पर यह माना जाता है कि तेज औद्योगिकीकरण और कॉरपोरेट निवेश के चक्कर में आम आदमी के कल्याण की योजनाएं पीछे छूट जाती हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश ने इस धारणा को मजबूती से झुठलाया है। एक तरफ जहां बड़े निवेशकों को लुभाने के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के पहुंचाया जा रहा है।
अन्त्योदय की भावना के साथ गरीबों को मुफ्त राशन, पक्के मकान, आयुष्मान भारत का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच और उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लगातार मिल रहे हैं। इसके साथ ही अयोध्या, काशी और मथुरा के भव्य सांस्कृतिक पुनरुद्धार ने पर्यटन उद्योग में ऐसा उछाल लाया है कि छोटे चाय बेचने वाले से लेकर बड़े होटल मालिकों तक की आमदनी कई गुना बढ़ गई है।
वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर तेजी से बढ़ता कदम
राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, और इस दिशा में उठाए जा रहे कदम पूरी तरह से परिणाम-उन्मुख नजर आते हैं। डेटा सेंटर्स की स्थापना, फूड प्रोसेसिंग पार्कों का विस्तार और डिफेंस कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाएं इस बात का सबूत हैं कि राज्य का भविष्य तकनीक और उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था पर टिका हुआ है।
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और वोकेशनल ट्रेनिंग के जरिए स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की यह आर्थिक कायाकल्प यात्रा इस बात का स्पष्ट संदेश देती है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां स्पष्ट हों, तो किसी भी बड़े राज्य की तस्वीर को पूरी तरह बदला जा सकता है। आज 'ब्रांड यूपी' देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के निवेशकों के लिए भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है।



