होम/देश/सब्जी के बजट पर महंगाई की मार: सितंबर और अक्टूबर आते ही क्यों आसमान छूने लगते हैं प्याज के दाम?
देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

सब्जी के बजट पर महंगाई की मार: सितंबर और अक्टूबर आते ही क्यों आसमान छूने लगते हैं प्याज के दाम?

हर साल सितंबर और अक्टूबर के महीनों में प्याज की कीमतें अचानक क्यों बढ़ जाती हैं? उपभोक्ता मंत्रालय के नए आंकड़ों और फसल चक्र के गणित से समझिए कि क्यों आम आदमी की जेब पर इन दो महीनों में सबसे भारी मार पड़ती है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
22 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
सब्जी के बजट पर महंगाई की मार: सितंबर और अक्टूबर आते ही क्यों आसमान छूने लगते हैं प्याज के दाम?
📷 सब्जी के बजट पर महंगाई की मार: सितंबर और अक्टूबर आते ही क्यों आसमान छूने लगते हैं प्याज के दाम? — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार एक साल में प्याज के थोक भाव में करीब 135 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • सितंबर और अक्टूबर में फसल चक्र बदलने और पुराना स्टॉक खत्म होने की वजह से मंडियों में प्याज की आवक कम हो जाती है।
  • मौसम की मार और बारिश के कारण महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर फसल खराब होने से भी बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है।

रसोई के बजट को झटका दे रही प्याज की महंगाई

भारतीय रसोई में प्याज एक ऐसी चीज है जिसके बिना शायद ही किसी खाने की कल्पना की जा सकती है। सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक, प्याज का इस्तेमाल हर घर में प्रमुखता से होता है। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से प्याज की कीमतों में जिस तेजी से इजाफा हुआ है, उसने आम आदमी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चाहे इसे मौसम की मार कहें या फिर बाजार के कारोबारियों का खेल, इन दिनों प्याज के बढ़ते दामों ने घर के पूरे बजट को हिलाकर रख दिया है।

पिछले एक साल की बात करें तो प्याज की खुदरा और थोक कीमतों में इतनी तेजी से उछाल आया है कि हर कोई हैरान है। ऐसा हम अपनी तरफ से नहीं कह रहे हैं, बल्कि सरकार की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। आम आदमी को महंगाई की इस चुभन का अहसास तब और ज्यादा होता है जब वह सब्जी की दुकान पर जाकर अपनी जेब टटोलता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर इन आंकड़ों के पीछे की सच्चाई क्या है और क्यों हर साल साल के इन खास महीनों में ही प्याज के दाम आग उगलने लगते हैं।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट पर उबाल: वामपंथी दलों का ऐलान, केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ होगा बड़ा आर-पार का संघर्ष

महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट पर उबाल: वामपंथी दलों का ऐलान, केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ होगा बड़ा आर-पार का संघर्ष

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

सावधान! डेंगू और चिकनगुनिया का बढ़ता कहर: बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

सावधान! डेंगू और चिकनगुनिया का बढ़ता कहर: बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकार

बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकार

बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़की

बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़की

भारतीय राजनीति में एकात्म मानववाद का प्रभाव: जनसंघ से लेकर आज के राजनीतिक सफर की पूरी कहानी

भारतीय राजनीति में एकात्म मानववाद का प्रभाव: जनसंघ से लेकर आज के राजनीतिक सफर की पूरी कहानी

आधी आबादी को मिलेगा हक: महिलाओं और किशोरियों को जागरूक करने के लिए गांवों में शुरू हुई विशेष मुहिम

आधी आबादी को मिलेगा हक: महिलाओं और किशोरियों को जागरूक करने के लिए गांवों में शुरू हुई विशेष मुहिम

उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़े खोल रहे हैं पोल

हाल ही में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने प्याज की कीमतों को लेकर कुछ चौकाने वाले आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, थोक बाजार में प्याज के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। 21 सितंबर को प्याज का थोक भाव 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा था, जबकि ठीक एक साल पहले इसी अवधि में इसकी कीमतें करीब 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल थीं। यानी महज एक साल के भीतर प्याज की थोक कीमतों में लगभग 135 प्रतिशत तक की भारी बढ़त देखने को मिली है।

इन सरकारी आंकड़ों से एक बात साफ हो जाती है कि खुदरा बाजारों के मुकाबले थोक बाजारों में महंगाई की मार ज्यादा तेजी से पड़ी है। जब थोक में ही माल इतना महंगा मिलेगा, तो जाहिर है कि आम ग्राहकों को खुदरा दुकानों पर और भी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन में गड़बड़ी और जमाखोरी जैसी समस्याएं भी इस थोक महंगाई को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे आम जनता पिस रही है.

आखिर क्यों सिर्फ सितंबर और अक्टूबर में ही क्यों उछलते हैं दाम?

यह एक ऐसा सवाल है जो हर साल लोगों के मन में उठता है। साल के बाकी 10 महीनों में भले ही प्याज के दाम एक सामान्य दायरे में रहें या फिर शांत बने रहें, लेकिन सितंबर और अक्टूबर का महीना आते ही इसमें अचानक भूचाल आ जाता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक महीने पहले प्याज की जो औसत कीमत करीब 40.79 रुपये प्रति किलो थी, वह बढ़कर 21 सितंबर को 54.23 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई।

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण फसल चक्र और मंडियों में प्याज की आवक का गणित है। मार्च और अप्रैल के महीनों में रबी की फसल बाजार में आती है, जिसका स्टॉक किसी तरह अगली खरीफ की फसल आने तक चलाना होता है। ऐसे में सितंबर और अक्टूबर आते-आते पुराना स्टॉक लगभग समाप्त होने की कगार पर पहुंच जाता है। नए स्टॉक के बाजार में पूरी तरह उतरने से पहले के इस अंतराल (Transition Period) में मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है, जिससे कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

मौसम की मार और सरकारी गोदामों की स्थिति

फसल चक्र के अलावा मौसम की अनिश्चितता ने भी प्याज की कीमतों को अस्थिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछले कुछ महीनों के दौरान देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों, खासकर महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और गर्मी के प्रकोप ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में ही फसल सड़ जाने की वजह से उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है।

हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी एजेंसियों के पास जो बफर स्टॉक रखा होता है, उसमें से भी करीब 30 प्रतिशत प्याज गर्मी और नमी के कारण खराब हो गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ने और पड़ोसी देशों में उत्पादन के समीकरण बदलने से भारतीय बाजारों पर दबाव और अधिक बढ़ गया है। इन तमाम वजहों का सामूहिक असर यह हुआ है कि आम आदमी की थाली से प्याज का स्वाद फीका पड़ने लगा है।

बाजार विशेषज्ञों की राय और आगे की स्थिति

अर्थशास्त्रियों और कृषि बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक नई खरीफ की फसल मंडियों में बड़े पैमाने पर नहीं आ जाती, तब तक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है। हालांकि सरकार लगातार कीमतें नियंत्रित करने के लिए अपने स्टॉक से प्याज खुले बाजार में उतार रही है, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण तुरंत राहत मिलती नहीं दिख रही।

"प्याज की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से स्टोरेज क्षमता की कमी और फसल चक्र के अंतर के कारण होता है। जब तक किसानों के पास आधुनिक कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होगी, तब तक हर साल सितंबर-अक्टूबर में ऐसी ही महंगाई का सामना करना पड़ेगा।" — कृषि बाजार विशेषज्ञ

संक्षेप में कहें तो, जब तक देश में कृषि विपणन और भंडारण की व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक साल के इन खास महीनों में आम आदमी को महंगाई की इस आंधी का सामना करना ही पड़ेगा। फिलहाल ग्राहकों को यही सलाह दी जाती है कि वे जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करें और बजट को संतुलित रखें।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट पर उबाल: वामपंथी दलों का ऐलान, केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ होगा बड़ा आर-पार का संघर्षNATIONAL

महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट पर उबाल: वामपंथी दलों का ऐलान, केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ होगा बड़ा आर-पार का संघर्ष

24 सित॰
बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानीNATIONAL

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

25 सित॰
सावधान! डेंगू और चिकनगुनिया का बढ़ता कहर: बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनीNATIONAL

सावधान! डेंगू और चिकनगुनिया का बढ़ता कहर: बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

25 सित॰
ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्यNATIONAL

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

25 सित॰
बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकारNATIONAL

बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध पर उबाल: प्रशांत किशोर बोले- अनपढ़ और अपराधी चला रहे सरकार

25 सित॰
बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़कीNATIONAL

बिहार में इंसानियत शर्मसार: स्कूटी सवार युवक-युवती से दबंगई, पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही लड़की

25 सित॰
भारतीय राजनीति में एकात्म मानववाद का प्रभाव: जनसंघ से लेकर आज के राजनीतिक सफर की पूरी कहानीNATIONAL

भारतीय राजनीति में एकात्म मानववाद का प्रभाव: जनसंघ से लेकर आज के राजनीतिक सफर की पूरी कहानी

25 सित॰
आधी आबादी को मिलेगा हक: महिलाओं और किशोरियों को जागरूक करने के लिए गांवों में शुरू हुई विशेष मुहिमNATIONAL

आधी आबादी को मिलेगा हक: महिलाओं और किशोरियों को जागरूक करने के लिए गांवों में शुरू हुई विशेष मुहिम

25 सित॰