बिहार के गांवों में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे पंचायत सरकार भवन?
बिहार के ग्रामीण इलाकों में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए बनाए जा रहे पंचायत सरकार भवनों की निर्माण गुणवत्ता पर अब बड़े सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों से इन भवनों के निर्माण में व्यापक स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थिति यह है कि कई जगहों पर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार होने वाले ये आधुनिक भवन उद्घाटन से पहले ही खस्ताहाल होने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं और जनसुविधाओं को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन भवनों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
हाल ही में पंचायती राज विभाग के सामने कई ऐसे मामले आए हैं, जहां ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों की लापरवाही के कारण जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बनने वाली इन इमारतों की नींव ही कमजोर कर दी गई है। इन तमाम शिकायतों को बेहद गंभीरता से लेते हुए राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार का यह कदम उन सभी लोगों और एजेंसियों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है जो सरकारी धन के दुरुपयोग और घटिया निर्माण कार्यों में संलिप्त पाए जाते हैं।
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कटिहार से लेकर सासाराम तक निर्माण कार्यों में भारी खामियां
बिहार के विभिन्न जिलों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, निर्माण एजेंसियों द्वारा बरती जा रही लापरवाही के परिणाम अब साफ दिखने लगे हैं। कटिहार जिले की रौनियां पंचायत का मामला इसका एक सबसे ताजा और ज्वलंत उदाहरण है। यहां करीब तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि भवन बनने के महज एक महीने के भीतर ही उसकी दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। इतनी बड़ी लागत से तैयार इमारत का इतनी जल्दी जर्जर होना सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और मानकों की अनदेखी की ओर इशारा करता है।
कुछ ऐसा ही हाल रोहतास जिले के सासाराम स्थित खैरा शाहमल पंचायत का भी है। यहां बिना काम को पूरी तरह से मुकम्मल किए ही भवन को संबंधित विभाग को हैंडओवर करने की कोशिश की गई, जबकि दीवारों में अभी से दरारें उभरने लगी थीं। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जब इन मामलों पर आवाज उठाई, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी। भभुआ जिले में भी घटिया निर्माण की पुख्ता शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित संवेदक की सुरक्षा राशि और देय भुगतानों पर रोक लगा दी थी, साथ ही कार्यपालक अभियंता से इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण भी तलब किया गया था।
मंत्री दीपक प्रकाश का कड़ा रुख, जमुई दौरे पर खुली पोल
विभिन्न जिलों से मिल रही लगातार शिकायतों के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने मामले की गंभीरता को खुद परखा। पिछले दिनों जब मंत्री अपने विभागीय दौरे पर जमुई जिले में थे, तो वहां स्थानीय लोगों ने पंचायत सरकार भवन के निर्माण में भारी गड़बड़ियों की शिकायत उनके सामने रखी। मंत्री ने बिना किसी देरी के खुद मौके पर जाकर निर्माणाधीन भवन की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। वहां की स्थिति देखकर मंत्री ने कड़ा रोष व्यक्त किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य में सुधार लाने तथा मानकों का सख्ती से पालन करने के कड़े निर्देश दिए।
विभाग के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पंचायत सरकार भवन ग्रामीण विकास की धुरी हैं। इन भवनों के जरिए ही ग्रामीण जनता को पंचायत स्तर पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विभिन्न पेंशन योजनाओं की जानकारी, और अन्य प्रशासनिक कार्य सुलभ तरीके से मिलने हैं। ऐसे में यदि भवन की बुनियाद ही कमजोर होगी, तो आने वाले समय में यह जनता के लिए सुरक्षित भी नहीं रहेगा। मंत्री के निर्देश के बाद अब पूरे राज्य में उन सभी भवनों की सूची तैयार की जा रही है जहां निर्माण कार्य को लेकर किसी भी प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
क्या होगी जांच में पड़ताल और कैसे तय होगी जवाबदेही?
पंचायती राज विभाग द्वारा शुरू की जाने वाली इस व्यापक जांच के दायरे में कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होंगे। जांच टीम मुख्य रूप से भवन की संरचना (स्ट्रक्चरल डिजाइन), उसमें इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों, और एस्टीमेट यानी प्राक्कलन की बारीकी से जांच करेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि काम वास्तविक रूप से नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं। यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, मिलीभगत या लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और दोषी पाए जाने वाले सरकारी इंजीनियरों व अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
विभाग के अनुसार, दोषी पाए जाने वाले संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई के साथ-साथ उनसे वित्तीय वसूली भी की जा सकती है। पंचायती राज विभाग लगातार राज्य भर के सभी पंचायत सरकार भवनों की प्रगति और स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि प्रत्येक पंचायत में बनने वाला भवन पूरी तरह से मजबूत, टिकाऊ और निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हो, ताकि ग्रामीण जनता को लंबे समय तक इसका निर्बाध लाभ मिल सके।
ग्रामीण विकास में मील का पत्थर साबित होने चाहिए ये भवन
पंचायत सरकार भवन महज ईंट-गारे की दीवारें नहीं हैं, बल्कि यह गांवों में लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुशासन के जीवंत केंद्र हैं। सरकार की मंशा इन भवनों के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और शहर की तर्ज पर सभी जरूरी प्रशासनिक सुविधाएं गांव के ही एक कोने में उपलब्ध कराने की है। जब तक बुनियादी ढांचे मजबूत नहीं होंगे, तब तक ग्रामीण विकास की परिकल्पना को पूरी तरह से साकार नहीं किया जा सकता है। सरकार की इस सख्ती से निर्माण क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और एजेंसियों पर अब गुणवत्ता से समझौता न करने का भारी दबाव बन गया है।
"पंचायत सरकार भवन ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक और जनसेवा का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में इनके निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।" — दीपक प्रकाश, पंचायती राज मंत्री, बिहार सरकार
आने वाले दिनों में इस जांच की रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अब पूरी मुस्तैदी के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। बिहार सरकार का यह कदम यदि अपनी मंजिल तक पहुंचता है, तो यह न केवल भ्रष्ट तंत्र पर लगाम कसेगा, बल्कि भविष्य में बनने वाले सभी ग्रामीण भवनों की गुणवत्ता को भी पुख्ता करेगा।




