हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर एक-दूसरे पर खूब चलाए जा रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन के बीच जुबानी जंग अब खुलकर सामने आ गई है। मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा दिए गए एक बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी सांसद हर्ष महाजन ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि 'गुरु गुरु होता है और चेला चेला होता है।' महाजन के इस बयान के बाद से प्रदेश की सियासत में एक बार फिर से गर्माहट आ गई है और दोनों दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं।
क्यारकोटि दौरे के दौरान सीएम सुक्खू पर बरसे हर्ष महाजन
हाल ही में बीजेपी सांसद हर्ष महाजन शिमला जिले के क्यारकोटि क्षेत्र के दौरे पर थे। इस दौरान वे स्थानीय लोगों की मांग पर एक एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में उनके साथ पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज और क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य खुश विक्रम सेन समेत कई अन्य स्थानीय नेता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हर्ष महाजन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया बयानों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इन दिनों बिना किसी ठोस आधार के और बिना सोचे-समझे बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे उनकी प्रशासनिक और राजनीतिक अपरिपक्वता झलकती है।
हर्ष महाजन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री के लिए आने वाला राजनीतिक समय पूरी तरह से अंधेरे से भरा हुआ है, जबकि इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी के लिए आगे का रास्ता उजाले और सफलताओं की ओर जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी की नीतियां जनता के हित में बहुत स्पष्ट हैं और पार्टी आने वाले हर चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। महाजन ने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का अंदाजा राज्य के मौजूदा पंचायती चुनावों से ही आसानी से लगाया जा सकता है, जहां जनता अब बदलाव चाहती है।
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वीरभद्र सिंह के साथ पुराने संबंधों और सलाहकार वाले बयान पर तंज
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ समय पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक सार्वजनिक मंच से बयान दिया था। सीएम सुक्खू ने तंज कसते हुए कहा था कि हर्ष महाजन जब-जब कांग्रेस पार्टी के सलाहकार रहे, तब-तब पार्टी को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि महाजन आजकल भारतीय जनता पार्टी के सलाहकार बने हुए हैं और वे जिसके भी सलाहकार रहे, उसका कभी भला नहीं हुआ। सीएम ने यह भी दावा किया था कि महाजन की सलाह के कारण ही दिवंगत नेता वीरभद्र सिंह कभी कांग्रेस सरकार को लगातार दोबारा सत्ता में रिपीट नहीं कर पाए थे।
"गुरु गुरु होता है और चेला चेला होता है। मुख्यमंत्री बिना सोचे-समझे बयानबाजी कर रहे हैं। उनके लिए आगे केवल अंधेरा है, जबकि भाजपा के लिए उजाला है। हमारी नीति स्पष्ट है और हम आगामी हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" — हर्ष महाजन, राज्यसभा सांसद, बीजेपी
इस बयान का कड़ा जवाब देते हुए हर्ष महाजन ने कहा कि वे दिवंगत मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के राजनीतिक शिष्य रहे हैं और उन्होंने उनके साथ लंबा राजनीतिक सफर तय किया है। महाजन ने कहा कि वीरभद्र सिंह अपने जीवन के अंतिम समय तक और 84 वर्ष की उम्र तक राजनीति में पूरी तरह सक्रिय रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनेता जीवित रहने तक राजनीति से जुड़ा रहता है और इस तरह के बयानों से किसी के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता है।
विक्रमादित्य सिंह के बयान को बताया सिर्फ राजनीतिक शिगूफा
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हर्ष महाजन ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा दिए गए बयानों पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। महाजन ने विक्रमादित्य सिंह के बयानों को केवल एक राजनीतिक बयान करार दिया और कहा कि इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कांग्रेस पार्टी के नेता अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह की बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं। महाजन ने जोर देकर कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की कार्यशैली को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले समय में जनता इसका करारा जवाब देगी।
कर्मचारियों के बकाया भुगतान और सुशासन के मुद्दों पर घेराव
राजनीतिक बयानों के इस दौर में केवल व्यक्तिगत टिप्पणियां ही नहीं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया भुगतान के संबंध में कुछ बयान दिए थे। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि वर्तमान सरकार अपने वित्तीय प्रबंधन में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को उनके हक का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे समाज के हर वर्ग में सरकार के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय और आगामी राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं, वैसे-वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और अधिक तीखी होती जाएगी। हर्ष महाजन के तीखे तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी इस मुद्दे पर0 सरकार को आसानी से ছাড়ने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी इन हमलों का किस प्रकार से राजनीतिक जवाब देती है और राज्य की जनता इन सियासी बयानों को किस रूप में लेती है।



