भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से पूर्व भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के उत्पादों, खासकर उनके देसी घी को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। बृजभूषण शरण सिंह ने एक नया खुलासा करते हुए बताया कि जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से पतंजलि के घी की गुणवत्ता और उसके विज्ञापनों पर सवाल उठाए थे, तो उसके ठीक अगले दिन पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण का उनके पास फोन आया था।
उत्तर प्रदेश की राजनीति और गोंडा-कैसरगंज इलाके में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य और देश के डेयरी किसानों के हितों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उनके इस नए खुलासे के बाद एक बार फिर पतंजलि के उत्पादों और योग गुरु बाबा रामदेव के व्यावसायिक साम्राज्य पर बहस छिड़ गई है।
बालकृष्ण का फोन और बातचीत का पूरा सच
बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि जब उन्होंने महर्षि पतंजलि के नाम का इस्तेमाल कर बेचे जा रहे घी की शुद्धता पर सार्वजनिक मंच से सवाल खड़ा किया था, तो उद्योग जगत और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी। उन्होंने कहा, "मेरे बयान देने के अगले ही दिन आचार्य बालकृष्ण जी का मेरे पास फोन आया। उन्होंने मुझसे बात की और पूरे मामले पर चर्चा करने की कोशिश की।"
बृजभूषण सिंह के अनुसार, उन्होंने आचार्य बालकृष्ण से फोन पर बहुत स्पष्ट और कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा में ऋषियों-मुनियों का नाम बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसे में महर्षि पतंजलि जैसे महान योग गुरु के नाम का सहारा लेकर यदि बाजार में मिलावटी या घटिया स्तर का सामान बेचा जाएगा, तो वे इसके खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे।
"मैंने बालकृष्ण जी से सीधे कहा कि आप महर्षि पतंजलि के नाम पर व्यापार कर रहे हैं, इसलिए आपकी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है। यदि जनता को शुद्ध घी नहीं मिलेगा और भ्रामक दावे किए जाएंगे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।"
— बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व सांसद
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'महर्षि पतंजलि के नाम पर मिलावट बर्दाश्त नहीं': बृजभूषण का कड़ा रुख
बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि उन्होंने यह मुद्दा किसी निजी रंजिश के तहत नहीं उठाया है। उनका मानना है कि गांव-देहात के गरीब किसान और पशुपालक रात-दिन मेहनत करके दूध और घी का उत्पादन करते हैं। लेकिन बड़े-बड़े कॉरपोरेट घराने भ्रामक विज्ञापन चलाकर बाजार पर कब्जा कर लेते हैं और आम जनता को शुद्धता के नाम पर भ्रमित करते हैं। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद के नाम पर भरोसा करने वाले करोड़ों भारतीयों के साथ किसी भी तरह का धोखा नहीं होना चाहिए।
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि देश में पतंजलि जैसी कंपनियों को यह समझना होगा कि वे केवल एक व्यावसायिक संस्था नहीं हैं, बल्कि उन्होंने योग और धर्म के नाम पर लोगों का विश्वास जीता है। ऐसे में जब उनके किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, तो उससे करोड़ों लोगों का भरोसा टूटता है। बृजभूषण ने दोहराया कि वे आगे भी खानपान में मिलावट और नकली सामान के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे, चाहे सामने कोई भी बड़ी हस्ती क्यों न हो।
बाबा रामदेव और पतंजलि ब्रांड के विज्ञापनों पर पहले भी उठे हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब पतंजलि और बाबा रामदेव को लेकर इस तरह के विवाद सामने आए हों। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पतंजलि के भ्रामक विज्ञापनों को लेकर बेहद सख्त सुनवाई हो चुकी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद को एलोपैथी दवाओं और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के खिलाफ झूठे और भ्रामक प्रचार करने पर कड़ी फटकार लगाई थी। उस दौरान बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण दोनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी कंपनी को मनगढ़ंत दावे करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पतंजलि के घी और अन्य खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) द्वारा समय-समय पर सैंपल लिए जाते रहे हैं। कई मौकों पर लैब रिपोर्ट में गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर पतंजलि पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
देसी घी और खानपान में मिलावट का बढ़ता जाल
भारत में खाद्य पदार्थों में मिलावट एक बेहद गंभीर और संवेदनशील समस्या बनी हुई है। त्योहारों के मौसम से लेकर सामान्य दिनों तक बाजार में नकली घी, मावा और दूध की बिक्री की खबरें आती रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वनस्पति तेल, सिंथेटिक केमिकल और फ्लेवर का इस्तेमाल करके बाजार में नकली देसी घी तैयार किया जाता है, जो मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक है। इससे हृदय रोग, लिवर और किडनी की गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।
ऐसे में जब कोई जनप्रतिनिधि या वरिष्ठ नेता इस तरह का मुद्दा उठाता है, तो आम जनता का ध्यान इस तरफ आकर्षित होता है। स्थानीय दूध उत्पादकों का कहना है कि ब्रांडेड कंपनियों के आने से बेशक बाजार बड़ा हुआ है, लेकिन छोटे किसानों को उनके दूध और घी का उचित दाम नहीं मिल पाता। उपभोक्ता भी महंगे दामों में डिब्बाबंद घी खरीदकर खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं यदि उसकी गुणवत्ता शुद्ध न हो।
सियासी गलियारों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक चर्चा तेज
बृजभूषण शरण सिंह के इस नए खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और अयोध्या जैसे जिलों में बृजभूषण की बातों को जनसमर्थन भी मिल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खानपान की शुद्धता पर बात करना हर नागरिक का अधिकार है और किसी भी बड़ी कंपनी को जवाबदेही से भागना नहीं चाहिए।
फिलहाल इस पूरे मामले पर पतंजलि आयुर्वेद या आचार्य बालकृष्ण की ओर से कोई आधिकारिक नया बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के इस दावे ने एक बार फिर बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड की कार्यप्रणाली और उनके उत्पादों के मानकों पर सवालिया निशान लगा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पतंजलि इस पर क्या सफाई देती है।





