नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — राजधानी दिल्ली में सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस यानी CJP के नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक पारा अचानक काफी ऊपर चढ़ गया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा उठाए गए इन नेताओं को चौबीस घंटे तक हिरासत में रखा गया था। रिहाई के तुरंत बाद CJP के प्रमुख नेताओं ने तेवर कड़े कर लिए हैं और प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। देश की राजधानी में इन दिनों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है।
हिरासत से बाहर आने के बाद CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास सीधे स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। इन नेताओं का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। नेताओं ने पुलिस प्रशासन को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अगले चौबीस घंटे के भीतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की वैध तारीख तय करें। अगर प्रशासन ने ऐसा नहीं किया तो वे दोबारा बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
सोनम वांगचुक ने सरकार पर बोला तीखा हमला
इस पूरे मामले में जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एंट्री ने स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। सोनम वांगचुक ने CJP नेताओं की अचानक हुई गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश की राजधानी में अघोषित आपातकाल करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को बलपूर्वक नहीं रोका जा सकता। वांगचुक के इस समर्थन के बाद CJP का यह आंदोलन अब सिर्फ स्थानीय स्तर का न रहकर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों की वजह से स्थानीय ट्रैफिक व्यवस्था भी खासी प्रभावित हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति के राजधानी में भीड़ जुटाना कानून के खिलाफ है और इसी नियम के तहत पिछले दिनों कार्रवाई की गई थी। हालांकि, नेताओं और समर्थकों का जोश देखकर लगता है कि आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए हालात संभालना आसान नहीं होगा।
नया आंदोलन और आगे की रणनीति
CJP नेताओं का यह नया तेवर इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि वे आसानी से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सौरव दास और आशुतोष रांका ने मीडिया से बात करते हुए दो टूक कहा है कि उनका यह विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना जानते हैं, लेकिन पुलिस का यह दमनकारी रवैया उनके हौसले को और ज्यादा मजबूत कर रहा है।
जमीनी स्तर पर हमारी टीम ने जब पुराने पुलिस थाने और जंतर-मंतर के आसपास का जायजा लिया, तो वहां बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात दिखाई दिए। आम नागरिकों और राहगीरों को भी इस राजनीतिक सरगर्मी की वजह से थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले चौबीस घंटे इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करने में सबसे अहम साबित होने वाले हैं, क्योंकि पुलिस और प्रदर्शनकारी दोनों ही अपने रुख पर पूरी तरह कायम नजर आ रहे हैं।






