बदलते मौसम के साथ क्यों बढ़ जाता है डेंगू और मलेरिया का खतरा?
हर साल जब भी मौसम में बदलाव होता है, तापमान में उतार-चढ़ाव आता है, तो मच्छर जनित बीमारियों का खतरा अपने चरम पर पहुंच जाता है। मानसून के बाद का यह दौर मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। जलभराव, नमी और तापमान में हल्की गिरावट के कारण एडीज और एनोफिलीज मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है। यही वजह है कि देश के विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों से लगातार डेंगू और मलेरिया के नए मरीजों के सामने आने की खबरें मिल रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय बेहद संवेदनशील होता है। थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, बदन दर्द और कमजोरी के मरीजों की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा रहा है, जिसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती रिपोर्ट्स से भी होती है।
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नगर निगम और प्रशासन की तरफ से फॉगिंग और एंटी-लारवा का अभियान
बढ़ते मामलों को देखते हुए नगर निगम ने एक बार फिर से शहर के विभिन्न वार्डों में व्यापक स्तर पर फॉगिंग अभियान शुरू कर दिया है। निगम की विशेष टीमें घर-घर जाकर कूलर, गमले, और पानी की टंकियों की जांच कर रही हैं। जिन जगहों पर पानी जमा मिलने की आशंका है, वहां एंटी-लारवा का छिड़काव किया जा रहा है ताकि मच्छरों के लार्वा को पनपने से पहले ही नष्ट किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे रोस्टर के हिसाब से सख्ती से लागू किया जाएगा। विशेष तौर पर घनी बस्तियों, पार्कों के आसपास और जलभराव वाले निचले इलाकों में फॉगिंग की गाड़ियों को नियमित रूप से भेजा जा रहा है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए लाउडस्पीकर और पंपलेट्स के जरिए संदेश भी प्रसारित किए जा रहे हैं।
अस्पतालों में विशेष इंतजाम, स्वास्थ्य विभाग का हाई अलर्ट
मरीजों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। अस्पतालों में फीवर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं ताकि संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच हो सके। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे दवाओं, किट और बेड की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित करें। प्लेटलेट्स की मांग को देखते हुए ब्लड बैंकों को भी पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, बशर्ते समय रहते इलाज शुरू करवा दिया जाए। यदि किसी को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं होती हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की पर्ची के कोई भी दवा खाने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह: बचाव ही इस बीमारी का सबसे बड़ा इलाज
चिकित्सकों का मानना है कि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने का सबसे कारगर तरीका इनसे बचाव करना है। घरों के आसपास पानी इकट्ठा न होने देना सबसे अहम कदम है। गमलों, फ्रिज की ट्रे, पक्षियों के पानी के बर्तन और कूलर के पानी को हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर साफ करना चाहिए। पानी की टंकियों को ढककर रखना बेहद जरूरी है।
"डेंगू और मलेरिया से डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। नागरिकों को यह समझना होगा कि निगम या प्रशासन तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, जब तक आम लोग खुद अपने घरों में मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म न करें। थोड़ा सा अनुशासन हमें गंभीर बीमारी से बचा सकता है।"— डॉ. आलोक शर्मा, वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं epidemiologist
इसके अलावा, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना, ओडोमास या अन्य कीट प्रतिकर्षक (mosquito repellents) का इस्तेमाल करना और शाम के समय खिड़की-दरवाजे बंद रखना सुरक्षा के पुख्ता उपाय हैं। बच्चों को विशेष रूप से पूरी बाजू के कपड़े पहनाने की सलाह दी जा रही है ताकि उन्हें मच्छरों के काटने से बचाया जा सके।
सामूहिक सहभागिता से ही संभव है मच्छरों के प्रकोप पर विजय
नगर निगम के प्रयासों और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के बावजूद, यह लड़ाई तब तक अधूरी है जब तक इसमें जन-सहभागिता न जुड़े। कई बार लोग अपने घरों के अंदर सफाई तो रखते हैं, लेकिन बालकनी या बेसमेंट में रखे कबाड़ और पुराने टायरों में पानी जमा रहने देते हैं, जो मच्छरों की फौज तैयार करने के लिए काफी होता है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और स्थानीय कमेटियों को भी इस अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में और अधिक सख्ती बरती जाएगी तथा उन जगहों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है जहां बार-बार चेतावनी देने के बाद भी पानी का ठहराव पाया जाएगा। कुल मिलाकर, बदलते मौसम की इस चुनौती से पार पाने के लिए प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर एक साझा प्रयास करना होगा, तभी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ सकेगी।









