मुंबई/नई दिल्ली: 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम। देश के राजनीतिक गलियारों और चुनावी स्वतंत्रता के मोर्चे पर एक बार फिर पारा चढ़ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कथित कामकाज और फैसलों के खिलाफ सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और विपक्षी 'INDIA' गठबंधन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। हमारी जमीनी पड़ताल और विभिन्न विश्वसनीय सूत्रों से मिले इनपुट के मुताबिक, आगामी 2 अक्टूबर को मुंबई की धरती से 'CJP Protest 2.0' का बिगुल फूंका जाएगा, जिसकी गूंज दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में सुनाई देगी।
'ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बिना नहीं बनेगी बात'
मुंबई में होने वाले इस बड़े प्रदर्शन से ठीक पहले CJP के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो टूक कह दिया है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया की उम्मीद नहीं की जा सकती। संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों, विशेषकर अभिजीत दीपके और अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह देशव्यापी आंदोलन थमने वाला नहीं है। मुंबई के बाद इसे देश के अन्य महानगरों तक विस्तारित करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
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दिल्ली से मुंबई तक INDIA गठबंधन का 'एंटी-CEC' प्रोटेस्ट
इस विरोध प्रदर्शन को केवल एक गैर-राजनीतिक संगठन तक सीमित न रखते हुए, राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी 'INDIA' गठबंधन ने भी इसे अपना वैचारिक और मैदानी समर्थन देने का निर्णय लिया है। दिल्ली, मुंबई, पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख राजनीतिक केंद्रों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, आगामी दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ बड़े स्तर पर धरने-प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिसके केंद्र में वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त की नीतियां हैं।
अभिजीत दीपके की दो टूक: '2 अक्टूबर से थम-थम कर नहीं, लगातार चलेगा आंदोलन'
हमारी टीम द्वारा जुटाए गए बयानों के अनुसार, CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन महज एक दिन का सांकेतिक प्रदर्शन नहीं होगा। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के दिन को प्रतीकात्मक रूप से चुनते हुए संगठन ने अहिंसक लेकिन आक्रामक जन-आंदोलन का खाका खींचा है। दीपके ने मीडिया से बातचीत में दोहराया, “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, अन्यथा यह आंदोलन देश के कोने-कोने तक अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा।”
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ता दबाव और भविष्य का असर
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में चुनावी सुधारों और निष्पक्षता को लेकर नागरिकों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। CJP Protest 2.0 और INDIA गठबंधन की इस साझा हुंकार ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार या चुनाव आयोग की तरफ से इस मोर्चे पर कोई ठोस संवाद या सफाई नहीं आती है, तो यह विरोध आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है। 'द फ्रीलान्स' इस देशव्यापी आंदोलन के हर एक अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।








