पंजाब के जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में हाल ही में उपजे तनाव ने न केवल शैक्षणिक जगत बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 'द फ्रीलान्स' के वरिष्ठ फील्ड रिपोर्टर के रूप में जब हमने कैंपस और उसके आसपास के इलाकों का दौरा किया, तो स्थिति की गंभीरता और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच एक बड़ा अंतर साफ दिखाई दिया। इस बीच, यूनिवर्सिटी के फाउंडर और सांसद अशोक मित्तल ने चुप्पी तोड़ते हुए इसे स्पष्ट रूप से एक 'बड़ी साजिश' बताया है, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति और हिंदू-सिख समुदाय के बीच आपसी भाईचारे में दरार डालना है।
कैंपस के भीतर का माहौल और शुरुआती चिंगारी
हमारी ऑन-ग्राउंड इंवेस्टिगेशन के दौरान यह बात सामने आई कि विवाद की शुरुआत एक छोटी सी गलतफहमी से हुई थी, जिसे असामाजिक तत्वों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। कैंपस के छात्रों और सुरक्षाकर्मियों से बातचीत में पता चला कि कैसे कुछ बाहरी ताकतों ने इस अकादमिक संस्थान को अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का अखाड़ा बनाने की कोशिश की। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया, लेकिन तब तक सोशल मीडिया के जरिए कई भ्रामक वीडियो और संदेश वायरल किए जा चुके थे।
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अशोक मित्तल का बयान: 'शांति को तोड़ने की सोची-समझी साजिश'
यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक मित्तल ने मीडिया और छात्रों के सामने स्पष्ट किया कि LPU हमेशा से विभिन्न राज्यों, जातियों और धर्मों के छात्रों का एक गुलदस्ता रहा है, जहां राष्ट्रीय एकता सर्वोपरि है। मित्तल ने कहा, 'यह सिर्फ एक साधारण छात्र विवाद नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश थी जिसके जरिए हिंदू और सिख समुदायों के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश की गई।' उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ जांच में सहयोग कर रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ और पंजाब का सामाजिक ताना-बाना
पंजाब की भूमि हमेशा से गुरुओं और संतों की रही है, जहां सांप्रदायिक सद्भाव को तोड़ने के प्रयास अतीत में भी विफल किए गए हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी राज्य में स्थिरता को चुनौती देने की कोशिश हुई, जनता ने परिपक्वता का परिचय दिया है। बाबरी विध्वंस के सबसे बुजुर्ग वादी मोहम्मद हाशिम अंसारी के निधन जैसे ऐतिहासिक न्याय और सामाजिक सौहार्द के उदाहरणों से हमें यह सीखने की जरूरत है कि समाज को जोड़ने वाली ताकतों से ही देश मजबूत होता है। LPU जैसी संस्थाओं में देश के कोने-कोने से छात्र आते हैं, और ऐसे परिसरों को प्रयोगशाला बनाकर ध्रुवीकरण की राजनीति करना बेहद खतरनाक है।
प्रशासनिक और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण
घटना के बाद स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने अपनी चौकसी बढ़ा दी है। साइबर सेल उन तमाम सोशल मीडिया प्रोफाइल्स की गहन जांच कर रहा है जिन्होंने इस विवाद को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। रेलवे और अन्य सार्वजनिक परिसरों में सुरक्षा मामलों जैसे- 2016 में रेलवे संपत्ति चोरी के मामलों में हुई कड़ी कार्रवाई और सुरक्षा तंत्र के अनुभवों से सबक लेते हुए, अब शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर भी नए एसओपी (Standard Operating Procedures) तैयार किए जा रहे हैं।
भविष्य का असर और सुधार के कदम
इस पूरी घटना ने देश भर के विश्वविद्यालयों के लिए एक चेतावनी की घंटी बजा दी है। आज के डिजिटल युग में फेक न्यूज और हेट स्पीच किसी भी संस्थान की छवि को पलक झपकते ही धूमिल कर सकती है। LPU प्रबंधन अब छात्रों के बीच काउंसलिंग सेशन, क्रॉस-कल्चरल डायलॉग और डिजिटल लिटरेसी प्रोग्राम शुरू करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की साजिशों को जड़ से खत्म किया जा सके।
- कैंपस में शांति बहाل के लिए प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों की उच्चस्तरीय बैठक।
- सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज।
- हिंदू और सिख छात्र संगठनों के नेताओं ने संयुक्त रूप से शांति और भाईचारे की अपील की।
- सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक।
हमारी जमीनी पड़ताल यह साबित करती है कि भले ही ताकतों ने दरार डालने की कोशिश की हो, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों समुदायों के छात्रों का आपसी रिश्ता अब भी मजबूत है और वे इस साजिश को नाकाम करने के लिए पूरी तरह से एकजुट हैं।








