बदलते मौसम और तापमान में लगातार आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच मौसमी बीमारियों ने लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां वायरल फीवर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घातक स्वाइन फ्लू और मच्छर जनित डेंगू ने भी दस्तक दे दी है। हाल ही में जांच के दौरान स्वाइन फ्लू का एक और डेंगू के तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों ने सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित प्रमुख जिला अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।
तापमान में बदलाव से पनप रहे वायरस और मच्छर
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंडक का यह मिलाजुला मौसम वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए बेहद अनुकूल होता है। इस मौसम में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी भी प्रभावित होती है, जिसके चलते संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। प्रभावित क्षेत्र में नए मरीज मिलने के बाद सर्विलांस टीमों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि संक्रमण का प्रसार दूसरे इलाकों में न हो सके।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संबंधित इलाकों में घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। इसके अलावा जिन घरों में डेंगू के मरीज मिले हैं, उनके आसपास 50 से 100 मीटर के दायरे में एंटी-लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराने के सख्त आदेश नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को दिए गए हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को पानी जमा न होने देने की हिदायत भी दी जा रही है।
"संक्रामक बीमारियों से घबराने की नहीं, बल्कि समय पर सावधानी और इलाज की जरूरत है। अस्पतालों में दवाओं और जांच किट का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। अगर किसी को भी लगातार तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो वह फौरन सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच कराए।"
— मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), स्वास्थ्य विभाग
संबंधित खबरें
स्वाइन फ्लू और डेंगू के लक्षणों में अंतर समझना जरूरी
अक्सर देखा गया है कि लोग सामान्य मौसमी फ्लू, स्वाइन फ्लू (H1N1) और डेंगू के लक्षणों के बीच भ्रमित हो जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बीमारियों के शुरुआती लक्षण मिलते-जुलते लग सकते हैं, लेकिन समय रहते इनकी पहचान बेहद जरूरी है। स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है जो खांसने, छींकने या संक्रमित सतह को छूने के बाद मुंह-नाक पर हाथ लगाने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, गले में तेज खराश या दर्द, सूखी खांसी, अत्यधिक थकान, सिरदर्द और गंभीर मामलों में सांस फूलना शामिल है।
दूसरी ओर, डेंगू मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू के मुख्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार के साथ आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में असहनीय दर्द (हड्डी तोड़ बुखार), त्वचा पर लाल चकत्ते (रैशेज), उल्टी और जी मिचलाना शामिल हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स काउंट तेजी से गिरने का खतरा रहता है, इसलिए समय पर ब्लड टेस्ट कराना जीवनरक्षक साबित होता है।
अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड सक्रिय और दवाओं का इंतजाम
संक्रामक रोगों के खतरे को देखते हुए जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों में विशेष फीवर ओपीडी और आइसोलेशन वार्ड आरक्षित कर दिए गए हैं। स्वाइन फ्लू के संभावित मरीजों के लिए टैमीफ्लू (Tamiflu) जैसी जरूरी एंटीवायरल दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही डेंगू वार्डों में मच्छरदानी युक्त बिस्तरों की व्यवस्था की गई है ताकि अस्पताल परिसर के भीतर अन्य मरीजों या तीमारदारों तक संक्रमण न फैले।
ब्लड बैंकों को भी प्लेटलेट्स का पर्याप्त बैकअप बनाए रखने को कहा गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी चिकित्सा प्रभारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी मरीज को बिना जांच लौटाया न जाए। संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर तत्काल आरटी-पीसीआर और एलिसा टेस्ट के लिए भेजे जा रहे हैं ताकि समय रहते बीमारी की सही पुष्टि हो सके और त्वरित उपचार शुरू किया जा सके।
खुद से दवा लेने की गलती पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को सख्त चेतावनी दी है कि वे बुखार आने पर खुद डॉक्टर न बनें। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में यह आम प्रवृत्ति देखी गई है कि लोग बुखार होते ही नजदीकी मेडिकल स्टोर से बिना पर्ची के पैरासिटामोल के साथ तेज एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाएं (पेनकिलर) खरीदकर खाने लगते हैं। डेंगू के संक्रमण में ब्रूफेन, एस्पिरिन जैसी दवाएं प्लेटलेट्स को और तेजी से गिरा सकती हैं और अंदरूनी ब्लीडिंग का कारण बन सकती हैं।
वरिष्ठ फिजिशियन का कहना है कि बुखार होने पर केवल सादा पानी, ओआरएस का घोल, नारियल पानी और सुपाच्य तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। यदि 48 घंटे के भीतर बुखार नियंत्रित न हो, तो बिना देर किए योग्य चिकित्सक को दिखाकर सीबीसी (CBC) और जरूरी सीरोलॉजिकल टेस्ट करवाने चाहिए। देर से अस्पताल पहुंचने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
नागरिकों के लिए जरूरी एहतियाती कदम
बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से घरेलू स्तर पर जागरूकता बरतने की अपील की है:
- पानी का जमाव रोकें: कूलर, गमलों, पुराने टायरों, पानी की टंकियों और घर की छतों पर किसी भी बर्तन में साफ पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी हफ्ते में कम से कम दो बार पूरी तरह सुखाकर बदलें।
- पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें: एडीज मच्छर अमूमन दिन के समय काटता है। इसलिए बच्चों और बुजुर्गों को पूरे शरीर को ढंकने वाले हल्के रंग के कपड़े पहनाएं और मच्छर भगाने वाली क्रीम का प्रयोग करें।
- हाथों की स्वच्छता और मास्क: स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें, बार-बार साबुन-पानी से हाथ धोएं और बिना हाथ धोए चेहरे, आंख या नाक को न छुएं।
- इम्युनिटी मजबूत करें: ताजे मौसमी फल, हरी सब्जियां, गिलोय, तुलसी और पर्याप्त मात्रा में गुनगुने पानी का सेवन करें जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
मौसम के इस संवेदनशील दौर में थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार को परेशानी में डाल सकती है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों के प्रयासों के साथ-साथ आम जनता की सतर्कता ही इन संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने में सबसे बड़ा हथियार साबित होगी। यदि आपके आसपास किसी में फ्लू या तेज बुखार के लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाने के लिए प्रेरित करें।







