नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच अब राहत की बड़ी खबर सामने आ रही है। मौसम विभाग यानी आईएमडी ने मानसून के आगमन को लेकर ताजा और बेहद उत्साहजनक आंकड़े जारी किए हैं। इस साल मानसून तय समय से पहले देश के कई हिस्सों में पहुंच सकता है। पिछले चौबीस घंटों में गूगल ट्रेंड्स पर भी 'रुतुपव' यानी मानसून से जुड़े सर्च में अचानक जबरदस्त उछाल देखा गया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके राज्य में बारिश कब तक दस्तक देगी और इस बार गर्मी से राहत कब मिलेगी।
प्राथमिक पड़ताल के मुताबिक, दक्षिण भारत के तटों पर मानसून के बढ़ने की रफ्तार काफी अच्छी बनी हुई है। केरल और उसके आसपास के इलाकों में मानसून की पहली बौछारें जून के पहले हफ्ते तक पहुंचने की पूरी संभावना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अल नीनो का असर कमजोर पड़ रहा है और ला नीना की स्थिति बन रही है। यह बदलाव भारत में अच्छी और झमाझम बारिश के लिए बहुत ही अनुकूल माना जाता है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि समय पर बारिश होने से धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई समय पर शुरू हो जाएगी।
किसानों के चेहरों पर लौटी उम्मीद की चमक
देश के अन्नदाता यानी किसान हर साल मानसून के आने का इंतजार बड़ी बेसब्री से करते हैं। पिछले कुछ महीनों से पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे किसानों के लिए यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी इस बार सामान्य से बेहतर बारिश होने का अनुमान जताया गया है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। किसान भाई अपने खेतों की जुताई और बीजों के इंतजाम में जुट गए हैं ताकि बारिश शुरू होते ही बिना किसी देरी के बुवाई का काम शुरू किया जा सके।
स्थानीय स्तर पर प्रशासन और जल निगम के अधिकारियों ने भी अपनी कमर कस ली है। पिछले साल जिन इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखी गई थी, वहां इस बार पहले से ही जल संरक्षण के उपाय किए जा रहे हैं। तालाबों की सफाई और पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने का काम तेजी से चल रहा है। सरकार का यह भी प्रयास है कि बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाया जाए ताकि भूजल स्तर को सुधारा जा सके। आम नागरिकों को भी उम्मीद है कि इस बार गर्मी के रिकॉर्ड टूटेंगे और मौसम सुहाना हो जाएगा।
शहरी इलाकों में जलभराव से निपटने की चुनौती
एक तरफ जहां मानसून की बारिश राहत लेकर आती है, वहीं दूसरी तरफ बड़े शहरों के लिए यह हर साल एक बड़ी चुनौती बन जाती है। मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली जैसे महानगरों में भारी बारिश के बाद जलभराव और ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है। हमारी ग्राउंड टीम ने पाया है कि महानगरों के नगर निगम अभी से नालों की सफाई और सीवर लाइन दुरुस्त करने के दावों में जुटे हैं। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में डर है कि पहली ही बारिश में इन दावों की पोल खुल सकती है।
आम जनता से बातचीत में यह बात सामने आई कि लोग मानसून का स्वागत तो करना चाहते हैं लेकिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका भरोसा पूरी तरह नहीं बन पा रहा है। सड़कों पर गड्ढे और खुले हुए नाले प्रशासन की लापरवाही की पोल खोलते रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को केवल कागजी दावे करने के बजाय धरातल पर ठोस काम करना चाहिए ताकि बारिश का पानी सड़कों पर न भरे और जनजीवन अस्त-व्यस्त न हो। बिजली आपूर्ति विभाग ने भी आंधी और भारी बारिश के दौरान फॉल्ट ठीक करने के लिए विशेष टीमें तैनात करने की बात कही है।
आगामी दिनों में मौसम का मिजाज और तापमान की स्थिति
मौसम विभाग का यह भी कहना है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिलेंगी। इससे तापमान में कुछ गिरावट आएगी और चिलचिलाती गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, कुछ राज्यों में अभी भी लू का प्रकोप जारी रह सकता है, इसलिए लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही मौसम विभाग की तरफ से कोई नया बुलेटिन जारी होगा, हम सबसे पहले आप तक सटीक जानकारी पहुंचाएंगे।










