नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के कई राज्यों में अक्टूबर के इस महीने में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मानसून की विदाई के बाद भी कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दिल्ली से लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक झमाझम बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं और शहरों की सड़कों पर दरिया जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। द फ्रीलान्स की टीम ने जमीनी स्तर पर जाकर इन हालातों का जायजा लिया और पाया कि अचानक हुई इस बारिश से प्रशासन की तैयारियां भी धरी की धरी रह गई हैं।
राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्र में अचानक हुई भारी बारिश के कारण हवाई यातायात पर भी गहरा असर पड़ा है। दिल्ली एयरपोर्ट पर खराब मौसम और कम दृश्यता के चलते करीब पच्चीस उड़ानों को रद्द करना पड़ा या उनके मार्ग बदलने पड़े। सुबह के वक्त दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी ट्रैफिक जाम और जलभराव का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग का कहना है कि ऊपरी हवा के चक्रवात के कारण इस तरह की बेमौसम बारिश देखने को मिल रही है जो अभी कुछ और दिनों तक लोगों को परेशान कर सकती है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में बांधों और नदियों का उफान
राजस्थान के कई जिलों में पिछले चौबीस घंटों से लगातार बारिश हो रही है जिसके चलते जल स्रोतों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। दौसा जिले में मोरेल बांध पर पांच इंच की चादर चल रही है जिसे देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ जुट रही है। कोटपूतली और बहरोड़ इलाकों में मुख्य सड़कें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं और संपर्क मार्ग कट गए हैं। जयपुर और अलवर में लगातार हो रही बरसात के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है। जयपुर में एक घंटे से अधिक समय तक हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है और खैरथल में अंडरपास पूरी तरह पानी से भर जाने के कारण रास्ता बंद करना पड़ा है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है और कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में पच्चीस अक्टूबर तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बने रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण बीसलपुर बांध में चार सेंटीमीटर नया पानी आया है जो राहत की बात है, लेकिन कोटा में नोनेरा और ऐबरा बांध के तीन गेट खोलने पड़े हैं ताकि पानी के बढ़ते दबाव को नियंत्रित किया जा सके। करौली के हिंडौन इलाके में जलभराव के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है और स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है।
उत्तर प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात और पुलिस चौकियां डूबीं
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश ने आफत खड़ी कर दी है। वाराणसी और उसके आसपास के मैदानी इलाकों में गंगा और अन्य सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी घुस गया है। वाराणसी में स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई जगहों पर पुलिस चौकियां तक पानी में डूब चुकी हैं जिससे पुलिसकर्मियों को अपना कामकाज सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में किसानों के खेतों में पानी भर जाने से धान और अन्य खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार नजर बनाए हुए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा के रुख में बदलाव और कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हालांकि आने वाले कुछ दिनों में बारिश की रफ्तार कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन तब तक लोगों को एहतियात बरतने की सख्त जरूरत है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले रास्तों और उफनते नालों के पास जाने से बचें ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
किसानों की चिंताएं बढ़ीं और प्रशासन की चेतावनी
इस बेमौसम बारिश ने देश के अन्नदाता यानी किसानों की नींद उड़ा दी है। कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें खेतों में बिछ गई हैं और लगातार पानी भरने से उनमें सड़न पैदा होने का खतरा बन गया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश थमने के बाद ही फसलों के नुकसान का सही आंकलन किया जा सकेगा। फिलहाल सरकार और स्थानीय निकाय जल निकासी के काम में तेजी लाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जा सके।







