नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस और यूरोप के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत मौजूदा हालात में मॉस्को के लिए एक प्राकृतिक विकल्प साबित हो रहा है। हमारी टीम ने इस बयान के बाद दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों में हलचल को बहुत करीब से देखा है। रूस के साथ हमारे संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं और पश्चिमी देशों के दबाव के बाद भी भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति नहीं छोड़ी है। विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया की नजरें रूस और यूरोप के बीच चल रही तनातनी पर टिकी हुई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत ने हमेशा शांति और बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं जिससे व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में बहुत बदलाव आए हैं। ऐसे समय में भारत और रूस के बीच तेल और अन्य जरूरी सामानों का कारोबार लगातार बढ़ा है। हमारे विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि वह अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। रूस के लिए भी यूरोप के दरवाजे बंद होने के बाद एशियाई बाजार और खासकर भारत सबसे बड़ा और सुरक्षित सहारा बन गया है।
रूस और यूरोप के बीच तनाव का भारत पर असर
रूस और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे इस टकराव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें ऊपर-नीचे हो रही हैं और सप्लाई चेन पूरी तरह से हिल गई है। इन सबके बीच भारत ने समझदारी दिखाते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे पहले रखा है। हमने रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदा जिससे देश की जनता को महंगाई से बड़ी राहत मिली। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत का यह रुख पूरी तरह से देशहित में है और किसी भी बाहरी दबाव के आगे न झुकने की हमारी नीति को पुख्ता करता है।
यूरोपीय देश लगातार भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव बना रहे थे। लेकिन भारत ने अपनी कूटनीतिक कौशल से यह साबित कर दिया कि हम सबके साथ अच्छे संबंध रख सकते हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने बयानों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि भारत की नीति किसी के इशारे पर नहीं चलती। रूस के साथ हमारे पुराने रक्षा और व्यापारिक रिश्ते हैं जिन्हें किसी भी कीमत पर कम नहीं किया जा सकता है। मॉस्को के लिए आज के समय में भारत एक ऐसा दोस्त है जिस पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है।
चीन को लेकर विदेश मंत्री की दो टूक सलाह
इस पूरे मामले में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने केवल रूस और यूरोप की बात नहीं की, बल्कि चीन को भी एक बहुत साफ संदेश दिया है। एशिया में चीन और भारत के बीच के रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं। सीमा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल रहा है। जयशंकर ने चीन को सलाह देते हुए कहा है कि पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान बहुत जरूरी है। चीन को अपनी विस्तारवादी सोच छोड़कर क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, भारत और चीन का यह त्रिकोण वैश्विक राजनीति में बहुत मायने रखता है। रूस के साथ चीन के भी गहरे संबंध हैं, लेकिन भारत के साथ रूस की दोस्ती ऐतिहासिक और ज्यादा भरोसेमंद है। ऐसे में भारत का यह कहना कि वह मॉस्को के लिए प्राकृतिक विकल्प है, बीजिंग के लिए भी सोचने का विषय है। भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी बात बहुत ही बेबाकी से रखता है और किसी भी देश के सामने झुकने को तैयार नहीं है।
स्वतंत्र विदेश नीति और भविष्य की कूटनीतिक राह
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि भारत की विदेश नीति अब पूरी तरह से बदल चुकी है। हम दुनिया के किसी भी देश के पिछलग्गू बनकर नहीं रहते बल्कि बराबरी के स्तर पर बात करते हैं। रूस-यूरोप के इस भारी तनाव के बीच भारत ने अपनी स्थिति बहुत मजबूत कर ली है। आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका और ज्यादा बड़ी होने वाली है। सरकार के इन सख्त और स्पष्ट फैसलों से देश का कद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ऊंचा हो रहा है।







