नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और रूस के कूटनीतिक रिश्ते एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अपने एक बयान में रूस के साथ पुराने संबंधों को मजबूती से याद किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब दुनिया के कई देश पाकिस्तान के पक्ष में खड़े थे, तब रूस ने भारत का साथ निभाया था। कश्मीर समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रूस ने हमेशा भारत का समर्थन किया है। जयशंकर के इस बयान ने दोनों देशों के बीच की पुरानी और गहरी दोस्ती को एक बार फिर से दुनिया के सामने ला दिया है।
कूटनीतिक बयानों के बीच भारत और रूस के आर्थिक व कामकाजी रिश्ते भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हालिया सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दिनों में करीब 70 हजार भारतीय वर्कर्स रूस में नौकरी करने जा सकेंगे। रूसी बाजार में विभिन्न सेक्टरों में कुशल कामगारों की भारी मांग है। भारत सरकार ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि इन नए रोजगार अवसरों से देश के युवाओं को बड़ा फायदा मिलेगा। निर्माण, तकनीक और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में इन नौकरियों के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है।
साइबेरिया में प्लेग का खतरा और प्रशासन की सख्ती
एक तरफ जहां रोजगार और कूटनीति के मोर्चे पर सकारात्मक खबरें हैं, वहीं रूस से कुछ चिंताजनक अपडेट भी सामने आए हैं। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में प्लेग फैलने का खतरा मंडराने लगा है। एक महिला रिसर्चर की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर लगभग 200 लोगों को क्वारंटीन में भेज दिया गया है। हालांकि आम जनता के बीच स्थिति को लेकर ज्यादा पैनिक नहीं है, लेकिन अमेरिकी एजेंसियों समेत दुनिया भर के स्वास्थ्य संगठन इस पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों को पूरी सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ब्लैक सी स्थित निजी आवास के विस्तार को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा गर्म है। बीबीसी की एक विशेष जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि पुतिन के इस बड़े आवास परिसर में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस विस्तार के पीछे की वजहों को लेकर विश्लेषक अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं। सुरक्षा और भू-राजनीतिक कारणों को इसका मुख्य आधार माना जा रहा है, हालांकि रूसी प्रशासन की ओर से इस पर पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई है।
भारत-रूस आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का भविष्य
भारत और रूस के बीच पिछले सात दशकों से चले आ रहे रिश्ते आज भी मजबूत बने हुए हैं। कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में वीटो पावर के इस्तेमाल से लेकर रक्षा सौदों तक, रूस ने हमेशा एक भरोसेमंद साझेदार की भूमिका निभाई है। वर्तमान भू-राजनीतिक हालात में जब पश्चिमी देश रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रहे हैं, तब भी भारत और रूस के बीच तेल व्यापार और कूटनीतिक संवाद लगातार जारी है। यह स्वतंत्र विदेश नीति भारत की कूटनीतिक ताकत को दर्शाती है।
अब देखना यह होगा कि रूस में 70 हजार भारतीय कामगारों के जाने का यह नया अध्याय दोनों देशों के मानवीय संबंधों को कितनी मजबूती देता है। इसके साथ ही साइबेरिया में उपजे स्वास्थ्य संकट पर रूस किस तरह से नियंत्रण पाता है, इस पर भी पूरी दुनिया की नजर टिकी है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि रूस से जुड़े ये सभी घटनाक्रम आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और भारत की विदेश नीति पर गहरा असर डालने वाले हैं।


