उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज, रालोद का बड़ा सामाजिक अभियान
उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से सुगबुगाहट तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गढ़ मुजफ्फरनगर से एक नए सियासी और सामाजिक अभियान का शंखनाद कर दिया है। मुजफ्फरनगर के पचेड़ा कलां गांव में आयोजित एक विशाल सामाजिक समरसता सम्मेलन के जरिए पार्टी ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में उनका मुख्य फोकस जागतिक सीमाओं से परे जाकर आपसी भाईचारे और संवाद को मजबूत करने पर रहेगा।
जनता इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित इस सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अपने संबोधन के दौरान साफ शब्दों में कहा कि समाज में व्याप्त दूरियों को पाटने का एकमात्र रास्ता केवल और केवल संवाद है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में राजनीति अपनी जगह है, लेकिन सामाजिक ताना-बाना और आपसी भाईचारा किसी भी दल या व्यक्ति की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से बहुत ऊपर होना चाहिए। पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल भाषणों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर उतरकर आम जनता के बीच पहुंचना होगा।
संबंधित खबरें
चौधरी अजीत सिंह की कर्मभूमि से भाईचारे का संदेश
इस सम्मेलन के दौरान मुजफ्फरनगर की ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्ता का जिक्र करते हुए जयंत चौधरी ने अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजीत सिंह को याद किया। उन्होंने कहा कि यह धरती हमेशा से देश और समाज को एक नई दिशा देने वाली रही है। चौधरी अजीत सिंह ने अपने जीवनकाल में हमेशा विभिन्न वर्गों, जातियों और समुदायों को एक मंच पर लाने का अथक प्रयास किया था। आज उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं की यह जिम्मेदारी है कि वे उस वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाएं और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच बनाएं।
जयंत चौधरी ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे केवल अपने परिचितों या रिश्तेदारों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव के हर घर और हर गली में दस्तक दें। लोगों की समस्याओं को सुनें और उनके समाधान की दिशा में प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में 'यह अपना और यह पराया' वाली संकीर्ण मानसिकता पूरी तरह से खत्म नहीं होगी, तब तक एक सशक्त और समृद्ध समाज की कल्पना करना बेमानी है। खान-पान, संस्कृति और विचार भले ही अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना अटूट होनी चाहिए।
"राजनीतिक और सामाजिक संबंध केवल जातीय पहचान के आधार पर नहीं होने चाहिए। चौधरी चरण सिंह की विचारधारा समाज को जाति से ऊपर उठकर मानवता, बराबरी और सम्मान की दिशा में ले जाने की बात करती है। जब तक हम भेदभाव की सोच नहीं छोड़ेंगे, वास्तविक समरसता संभव नहीं है।" — जयंत चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, रालोद एवं केंद्रीय मंत्री
बाबा साहेब और चौधरी चरण सिंह के विचारों पर जोर
अपने संबोधन के दौरान रालोद प्रमुख ने देश के महान विचारकों और समाज सुधारकों को भी याद किया। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि उनके आदर्श किसी एक वर्ग विशेष की बपौती नहीं हैं, बल्कि वे पूरे राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक हैं। बाबा साहेब ने हमेशा समाज में समानता, बंधुत्व और मानवीय गरिमा की वकालत की थी। भारत की असली ताकत उसकी विविधता में ही निहित है और यहां की अलग-अलग परंपराएं व संस्कृतियां ही देश की असल पहचान को गढ़ती हैं।
उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के योगदान को याद करते हुए शिक्षण संस्थानों में जातीय नामों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उनके पुराने प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी की मोहताज नहीं होनी चाहिए और वह समाज के हर वर्ग के लिए पूरी तरह समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। देश के महापुरुषों के इन विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए रालोद ने आगामी 31 अक्टूबर यानी सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती तक लगातार अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता ग्रामीण इलाकों और बस्तियों में जाकर सामाजिक समरसता की अलख जगाएंगे।
किसान, नौजवान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के ज्वलंत मुद्दे
केवल सामाजिक समरसता ही नहीं, बल्कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरोकार यानी खेती-किसानी और नौजवानों के रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी जयंत चौधरी ने पूरी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण अंचल का बुजुर्ग और युवा इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि आने वाली पीढ़ी खेती से दूर होती है, तो उनके पास रोजगार के क्या विकल्प होंगे। इसके अलावा किसानों को उनकी उपज का उचित और समय पर मूल्य मिल रहा है या नहीं, यह देश की रीढ़ से जुड़ा हुआ सवाल है।
गन्ने के भुगतान और हालिया एथेनॉल नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ समय में किसानों के गन्ना भुगतान की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। एथेनॉल नीति से न केवल चीनी मिलों बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े छोटे दुकानदारों, मजदूरों और कोल्हू संचालकों को भी सीधा लाभ मिल रहा है। खेती से जुड़ी यह पूरी अर्थव्यवस्था एक चक्र की तरह है, जिसके हर हिस्से को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को किसानों और नौजवानों के इन वाजिब सवालों से भागने के बजाय उनके समाधान के लिए ईमानदारी से काम करना चाहिए।
विपक्षी दलों पर निशाना और आगामी राजनीतिक कार्यक्रम
विपक्षी दलों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौरव और समाज को लेकर किसी भी तरह की भ्रामक या आपत्तिजनक बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज का सम्मान किसी की व्यक्तिगत राजनीति का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। राजनीतिक दलों को जनता को जातियों और वर्गों में बांटने के बजाय विकास, भाईचारे और रोजगार जैसे असल मुद्दों पर बात करनी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की। उन्होंने बताया कि आगामी 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जो इस बार उनके पैतृक गांव नूरपुर में आयोजित होगा। इसके साथ ही राजा महेंद्र प्रताप की स्मृति में होने वाली पदयात्रा और अन्य आयोजनों में भी पार्टी पूरी ताकत से हिस्सा लेगी। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं को इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया।




