मेरठ शहर में इंसानियत को झकझोर देने वाले बहुचर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस खौफनाक मामले में मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मौत की सजा सुनाई है। इस खूनी खेल की स्क्रिप्ट लिखने वाले दोनों आरोपियों को जब न्यायाधीश ने फांसी पर लटकाए जाने का फरमान सुनाया, तो दोनों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। अदालत कक्ष में मौजूद हर शख्स इस खौफनाक सजा को सुनकर सन्न रह गया और खुद को बेकसूर साबित करने की नाकाम कोशिश करने वाले दोनों आरोपी फूट-फूटकर रोने लगे।
यह पूरा मामला कुछ महीने पहले सामने आया था जब मेरठ के एक घर से नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में सौरभ राजपूत का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था। पुलिस की शुरुआती जांच और चार्जशीट के मुताबिक, पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया था। दोनों ने मिलकर पहले सौरभ को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया और फिर बेरहमी से उसकी जान ले ली। इस वारदात को छिपाने के लिए शव को एक नीले ड्रम में भरकर ठिकाने लगाने की साजिश रची गई थी। जब पुलिस ने इस मामले की परतें खोलीं, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए थे क्योंकि हत्या के बाद भी आरोपियों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।
फांसी की सजा सुनते ही अदालत में फूट-फूटकर रोए मुस्कान और साहिल
अदालत में जब सुनवाई चल रही थी और दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी थीं, तब से ही आरोपियों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। जैसे ही जज ने अपना फैसला पढ़ना शुरू किया, अदालत कक्ष में सन्नाटा पसर गया। मौत की सजा का ऐलान होते ही साहिल सन्न रह गया और उसके मुंह से एक शब्द नहीं निकला, जबकि मुस्कान फफक-फफक कर रोने लगी। दोनों ने शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके इस नापाक गुनाह की इतनी बड़ी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी। पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत दोनों को अपनी गिरफ्त में लिया और जिला कारागार भेजने की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी।
फैसला सुनाते वक्त जज ने समाज में फैल रही इस तरह की आपराधिक मानसिकता पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने अपनी टिप्पणी में साफ कहा कि ऐसे जघन्य अपराध समाज के ताने-बाने को अंदर से खोखला कर रहे हैं। न्याय के सिद्धांत को समझाते हुए अदालत ने अपने फैसले में प्राचीन भारतीय ग्रंथ महाभारत का भी विशेष जिक्र किया। जज ने टिप्पणी की कि धर्म और न्याय की रक्षा के लिए पाप और जुर्म के अनुरूप सजा देना ही सबसे बड़ा धर्म है। अदालत के इस महाभारत वाले संदर्भ ने साफ कर दिया कि इस तरह के मामलों में नरमी बरतना समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
सौरभ के परिवार को मिला इंसाफ, मां के छलके आंसू
इस फैसले के आने के बाद मृतक सौरभ राजपूत के परिवार ने चैन की सांस ली है। सौरभ की बुजुर्ग मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, लेकिन उनके चेहरे पर इस बात का सुकून जरूर था कि उनके बेटे के कातिलों को कानून ने सही अंजाम तक पहुंचा दिया है। मीडिया से बात करते हुए सौरभ की मां ने कहा कि अदालत के इस फैसले से उनकी आत्मा को थोड़ी शांति मिली है क्योंकि उनके बेटे को न्याय मिल गया है। परिवार ने शुरू से ही मांग की थी कि इस मामले में फांसी से कम कोई भी सजा मंजूर नहीं होगी और आज अदालत ने उनकी यह मांग पूरी कर दी।
दूसरी ओर, साहिल की तरफ से मामले को मोड़ने और इसे अलग रंग देने की कोशिशें भी लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन पुख्ता सबूतों और गवाहों के आगे आरोपियों की एक न चली। पुलिस की सख्त पैरवी और मजबूत फॉरेंसिक सबूतों के दम पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में साबित कर दिया कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि एक बेहद ठंडे दिमाग से रची गई खौफनाक साजिश थी। इस फैसले के बाद मेरठ से लेकर आसपास के इलाकों तक यही चर्चा है कि कानून के लंबे हाथों से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, चाहे वह साजिश कितनी भी सफाई से क्यों न रचे।
समाज में प्रेम प्रसंग के नाम पर बढ़ते अपराधों पर बड़ा संदेश
द फ्रीलान्स की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल बताती है कि इस तरह के मामलों ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर अवैध संबंधों के चक्कर में अपनों की जान लेने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मेरठ के इस नीले ड्रम केस ने यह साबित कर दिया है कि जब हवस और लालच इंसान की आंखों पर पट्टी बांध देते हैं, तो वह अपनों का ही खून करने से नहीं हिचकिचाता। हालांकि, इस बार न्यायपालिका ने त्वरित और सख्त रुख अपनाकर समाज में एक कड़ा संदेश देने का काम किया है।
अब इस फैसले के बाद कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले को उच्च अदालतों में भी चुनौती दी जा सकती है, लेकिन निचली अदालत का यह फैसला भारतीय न्याय संहिता के इतिहास में एक कड़ा मील का पत्थर साबित होगा। पुलिस प्रशासन और जेल प्रशासन ने भी फैसले के बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। 'द फ्रीलान्स' की इस विशेष रिपोर्ट में हमने यह जाना कि कैसे एक खौफनाक साजिश का अंत अदालत के इस कड़े फैसले के साथ हुआ, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।







