ग्रे मार्केट में एनएसई के आईपीओ की चमक फीकी, जीएमपी में आई बड़ी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे चर्चित और प्रतीक्षित आईपीओ में शुमार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग को लेकर ग्रे मार्केट से चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं। एक समय जिस आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी को लेकर बाजार में भारी उत्साह था और इसका भाव 310 रुपये के ऊंचे स्तर को छू रहा था, वह अब तेजी से गोता लगाते हुए मात्र 61 रुपये के स्तर पर सिमट गया है। इस भारी गिरावट ने निवेशकों की त्यौरियां चढ़ा दी हैं और बाजार के गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रे मार्केट में यह गिरावट निवेशकों के सेंटीमेंट में आए बदलाव को दर्शाती है। शुरुआती दौर में जब इस आईपीओ की चर्चाएं परवान चढ़ी थीं, तब निवेशकों को उम्मीद थी कि यह शेयर बाजार में बंपर लिस्टिंग गेन देकर मालामाल कर देगा। हालांकि, जैसे-जैसे इश्यू खुलने की तारीखें आगे बढ़ीं और बाजार की चाल में उतार-चढ़ाव देखा गया, वैसे-वैसे जीएमपी का ग्राफ नीचे की तरफ खिसकता चला गया। मौजूदा 61 रुपये का प्रीमियम यह संकेत देता है कि निवेशकों को अब उम्मीद के मुताबिक भारी-भरकम मुनाफे की बजाय सामान्य रिटर्न मिलने की ही संभावना है।
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कैसा रहा सब्सक्रिप्शन का हाल और निवेशकों का रुझान
एनएसई का यह मेगा आईपीओ निवेशकों के लिए 17 सितंबर को खुला था और इस पर दांव लगाने की आखिरी तारीख 21 सितंबर तय की गई थी। शुरुआती दो दिनों के भीतर ही इस इश्यू को निवेशकों की तरफ से ठीक-ठाक रिस्पांस मिला और यह पूरा भर गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो दो दिनों के भीतर ही आईपीओ कुल मिलाकर 1.04 गुना सब्सक्राइब किया जा चुका था। इसमें अलग-अलग श्रेणियों के निवेशकों ने अलग-अलग रुख दिखाया।
रिटेल निवेशकों (Retail Category) के वर्ग में इस आईपीओ को 0.69 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जो यह बताता है कि आम छोटे निवेशकों ने थोड़ा संभलकर कदम रखा। वहीं दूसरी ओर, क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा 1.32 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) का कोटा 1.46 गुना भरा। इसके अलावा, एंकर निवेशकों के लिए यह बड़ा इश्यू 16 सितंबर को ही खोल दिया गया था, जहां से कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए 6,746.18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटाने में सफलता हासिल की थी।
बदला गया इश्यू का साइज, पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल पर आधारित
एनएसई के इस आईपीओ से जुड़ी एक अहम बात यह भी है कि इसकी कुल साइज में कटौती की गई है। शुरुआत में इस आईपीओ का आकार 30,000 करोड़ रुपये के आसपास अनुमानित था, जिसे बाद में घटाकर 22,561.57 करोड़ रुपये कर दिया गया। यह पूरा का पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत लाया गया है। इसका साफ मतलब यह है कि कंपनी इस आईपीओ के जरिए कोई नया फ्रेश कैपिटल बाजार से नहीं जुटा रही है, बल्कि इसके मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल रहे हैं या अपने शेयरों को भुना रहे हैं।
प्राइस बैंड की बात करें तो कंपनी ने इसके लिए 1,700 रुपये से लेकर 1,785 रुपये प्रति शेयर का दायरा तय किया है। निवेशकों के लिए इसका लॉट साइज 8 शेयरों का रखा गया है। इसका मतलब यह है कि किसी भी रिटेल या अन्य निवेशक को कम से कम एक लॉट खरीदने के लिए कम से कम 14,280 रुपये का दांव लगाना होगा। कंपनी ने अपने कर्मचारियों का खास ख्याल रखते हुए उनके लिए प्रति शेयर 170 रुपये की विशेष छूट का प्रावधान भी किया है। इस आईपीओ की फाइनल लिस्टिंग 24 सितंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर प्रस्तावित की गई है।
मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह: क्या शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लिए लगाएं पैसा?
ग्रे मार्केट में जीएमपी के लगातार टूटने के बाद फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स और स्टॉक मार्केट एनालिस्ट्स की तरफ से निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। जानकारों का कहना है कि सिर्फ लिस्टिंग के दिन ही तुरंत मोटा मुनाफा कमाने यानी शॉर्ट-टर्म लिस्टिंग गेन की उम्मीद में इस आईपीओ में कूदना समझदारी भरा कदम नहीं होगा। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए बाजार में टिकने की हिम्मत रखते हैं, केवल उन्हें ही इसमें पैसा लगाने के बारे में सोचना चाहिए।
"एनएसई के आईपीओ में निवेश करने से पहले निवेशकों को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के क्षितिज (Investment Horizon) का आकलन जरूर करना चाहिए। सिर्फ ग्रे मार्केट के आंकड़ों के आधार पर बड़ा फैसला लेना खतरनाक हो सकता है।" — बाजार विशेषज्ञ, फाइनेंशियल एडवाइजरी डेस्क
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि चूंकि लिस्टिंग के ठीक 6 महीने बाद प्री-आईपीओ निवेशक भी अपने शेयरों को बेचने के लिए स्वतंत्र हो जाएंगे, इसलिए उस समय स्टॉक में बड़ी हलचल या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैल्यूएशन के लिहाज से बीएसई के मुकाबले यह आईपीओ भले ही थोड़ा सस्ता नजर आ रहा हो, लेकिन इसकी सालाना ग्रोथ रेट को लेकर एक्सपर्ट्स पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। यही वजह है कि निवेशकों को हर पहलू की गहराई से जांच करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेना चाहिए।








