मलयालम सिनेमा के गलियारों से एक नई और बेहद दिलचस्प थ्रिलर फिल्म सामने आई है। इस फिल्म का नाम 'प्रथम दृष्ट्या कुट्टक्कर' है जो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो चुकी है। रिलीज होते ही इस फिल्म ने दर्शकों के बीच तगड़ा बज बना लिया है। फिल्म की कहानी इतनी दमदार है कि लोग इसकी तुलना मोहनलाल की सुपरहिट फिल्म दृश्यम से कर रहे हैं। आईएमडीबी पर इस फिल्म को आठ की शानदार रेटिंग मिली है। चार पुलिसवाले और दो लाशों के इर्द-गिर्द घूमती इस कहानी ने सस्पेंस प्रेमियों को पूरी तरह बांध लिया है।
इस फिल्म में दक्षिण भारत की जानी-मानी अभिनेत्री पार्वती थिरुवोथु ने एक तेज-तर्रार पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है। उनका यह नया और सख्त पुलिसिया अवतार दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है। फिल्म के मेकर्स ने जब पार्वती थिरुवोथु का पहला लुक जारी किया था, तभी से सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। फिल्म की कहानी एक ऐसे उलझे हुए मामले पर आधारित है जहां कानून के रखवाले खुद ही शक के घेरे में आ जाते हैं। हर एक सीन के बाद क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है।
ओटीटी पर इस हफ्ते की सबसे बड़ी रिलीज
दिसंबर के इस हफ्ते में कई क्षेत्रीय फिल्में ओटीटी पर आई हैं, लेकिन मलयालम सिनेमा की इस पेशकश ने बाजी मार ली है। एस्कवायर इंडिया और द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दर्शक लंबे समय से इस फिल्म के डिजिटल प्रीमियर का इंतजार कर रहे थे। अब जब यह फिल्म घर बैठे देखने के लिए उपलब्ध है, तो सोशल मीडिया पर इसके रिव्यू आने शुरू हो गए हैं। फिल्म की पटकथा बहुत ही टाइट है और एक भी पल ऐसा नहीं लगता कि कहानी अपनी रफ्तार खो रही हो। निर्देशक ने हर एक किरदार को बहुत बारीकी से गढ़ा है।
फिल्म के भीतर दिखाए गए पुलिस थाने के दृश्य और आपसी खींचतान एकदम असली लगते हैं। चार पुलिसकर्मियों के बीच का तनाव और दो लाशों के मिलने से मचा हड़कंप पूरी कहानी की रीढ़ है। पार्वती थिरुवोथु ने अपने अभिनय से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण भूमिका को बखूबी निभा सकती हैं। उनके संवाद बोलने का तरीका और जांच के दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज फिल्म में जान फूंक देती है। फिल्म के तकनीकी पक्ष जैसे कि बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी भी उच्च स्तर के हैं।
दृश्यम से क्यों हो रही है इस फिल्म की तुलना
आम तौर पर जब भी कोई मलयालम थ्रिलर फिल्म आती है, तो उसकी तुलना दृश्यम से होना लाजिमी हो जाता है। इस फिल्म के मामले में भी दर्शक सोशल मीडिया पर यही कह रहे हैं कि इसका प्लॉट उतना ही उलझा हुआ है। फिल्म की शुरुआत में ही एक ऐसा मोड़ आता है जो पूरे सिस्टम को हिलाकर रख देता है। पुलिस विभाग के अंदर की राजनीति और सच को छुपाने की कोशिशें इस फिल्म को और भी ज्यादा रोमांचक बनाती हैं। फिल्म का हर एक किरदार अपनी एक अलग कहानी और मजबूरी के साथ सामने आता है।
अगर आप मिस्ट्री और थ्रिलर फिल्में देखने के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके वीकेंड के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इसे आप अपने परिवार के साथ घर बैठे ओटीटी पर आसानी से देख सकते हैं। फिल्म की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह अन्य भाषाओं के दर्शकों के बीच भी चर्चा का विषय बनेगी। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कंटेंट आधारित दक्षिण भारतीय फिल्मों का क्रेज हिंदी पट्टी के दर्शकों में लगातार बढ़ रहा है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और आगे का प्रभाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आम दर्शकों से लेकर फिल्म समीक्षकों तक सभी ने इस फिल्म की जमकर तारीफ की है। लोगों का कहना है कि यह फिल्म शुरू से लेकर आखिर तक बांधे रखती है और अंत में जो खुलासा होता है, वह चौंकाने वाला है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मलयालम सिनेमा की पहुंच अब वैश्विक स्तर पर हो चुकी है, और ऐसी फिल्में इस दायरे को और चौड़ा कर रही हैं। फिल्म की सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बड़े स्टार्स के बजाय मजबूत कहानी और दमदार अभिनय ही किसी फिल्म की असली ताकत होते हैं।







