राजस्थान में सरकारी स्कूलों की सुधरेगी तस्वीर, 401 करोड़ रुपये का बड़ा बजट जारी
राजस्थान में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बच्चों को बेहतर माहौल देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बदहाल भवनों को सुधारने और नए कमरे बनाने के लिए सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है। नाबार्ड आरआईडीएफ-एक्सएक्सएक्सआईआई के तहत प्रदेश के 472 सरकारी स्कूलों में नए भवनों के निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए कुल 401.03 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है। इस फैसले से ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में पढ़ने वाले बच्चों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस स्वीकृत बजट के दायरे में कुल 472 स्कूल आ रहे हैं। इनमें 261 प्राथमिक विद्यालय, 128 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 83 सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बच्चा खुले आसमान के नीचे या जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर न हो। इन पैसों से न सिर्फ स्कूल की इमारतें सुधरेंगी, बल्कि पढ़ाई का पूरा माहौल आधुनिक और सुविधाजनक बनाया जाएगा।
पिछले कुछ समय से राज्य के कई सरकारी स्कूलों में कमरों की कमी, टूटी हुई छतें और बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स और ग्राउंड रिपोर्टों में लगातार सामने आ रहा था कि कई जगहों पर बच्चे बेहद दयनीय स्थिति में पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार का यह नया वित्तीय पैकेज उस कमी को पूरा करने की दिशा में एक बेहद ठोस पहल माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस बजट का उपयोग तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा ताकि धरातल पर इसका स्पष्ट असर दिखाई दे।
संबंधित खबरें
प्राथमिक से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूलों तक के लिए तय हुआ अलग-अलग बजट
स्कूलों की जरूरत और वहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट में श्रेणीवार बजट का निर्धारण किया गया है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, प्राथमिक स्कूलों के लिए प्रति स्कूल औसतन 41 लाख रुपये, उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए 65 लाख रुपये और बड़े सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए प्रति स्कूल 2.54 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि यह बजट सिर्फ दीवारों और छतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अन्य जरूरी शिक्षण संसाधनों को भी शामिल किया गया है।
स्वीकृत की गई इस भारी-भरकम राशि के तहत भवन निर्माण के साथ-साथ स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए आधुनिक फर्नीचर, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के लिए उपकरण, और स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना जैसे कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा, स्कूलों में बिजली की सुचारू व्यवस्था और साफ-सुथरे पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। आकस्मिक व्यय और निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े खर्चों को भी इसी बजट में समाहित किया गया है ताकि किसी भी तरह की लापरवाही न हो सके।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद से अब तक अकेले स्कूल भवनों के निर्माण और विकास के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। सरकार का स्पष्ट विजन है कि राज्य का प्रत्येक विद्यालय भवन-विहीन या सुविधाओं से वंचित न रहे। प्राथमिकता के आधार पर उन स्कूलों को पहले चुना जा रहा है जिनकी स्थिति सबसे ज्यादा खराब है और जहां बच्चों को तुरंत बेहतर कमरों की जरूरत है।
उदयपुर को मिला सबसे बड़ा हिस्सा, जिलों को बांटी गई राशि
इस नई प्रशासनिक स्वीकृति के तहत जिलावार आवंटन में उदयपुर जिले को सबसे बड़ा फायदा मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर में सबसे अधिक 113 सरकारी स्कूलों के भवन निर्माण और विकास के लिए बजट स्वीकृत किया गया है। आदिवासी बहुल इस इलाके में स्कूलों की बुनियादी स्थिति को सुधारना एक बड़ी चुनौती रहा है, जिसे इस बजट के जरिए हल करने की कोशिश की जा रही है। उदयपुर के अलावा झालावाड़ जिले के 84 स्कूलों और सवाई माधोपुर के 39 स्कूलों के लिए भी राशि मंजूर की गई है।
अन्य जिलों की बात करें तो बांसवाड़ा जिले के 33 और बारां जिले के 27 सरकारी स्कूलों के लिए भी वित्तीय स्वीकृति जारी हुई है। वहीं, राजधानी जयपुर जिले के 10 सरकारी स्कूलों में भी नए भवन बनाने के लिए बजट पास किया गया है। प्रशासनिक स्वीकृति के आदेशों में यह बहुत स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत की गई राशि का उपयोग केवल और केवल उन्हीं गतिविधियों पर किया जाएगा जिनके लिए इसे जारी किया गया है। यदि किसी स्कूल में अनुमानित खर्च से ज्यादा राशि की जरूरत पड़ती है, तो इसके लिए सक्षम स्तर के अधिकारियों से विशेष अनुमति लेनी होगी।
भ्रष्टाचार और निर्माण कार्यों में होने वाली लीपापोती को रोकने के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। नियमों के मुताबिक, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जब तक पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) जारी नहीं किया जाता, तब तक ठेकेदार या एजेंसी को अंतिम भुगतान नहीं किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे व्यक्तिगत रूप से इन सभी निर्माण कार्यों की निगरानी करें और तय समय सीमा में काम पूरा करवाएं ताकि सरकारी धन का सही इस्तेमाल हो सके।
शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर जोर और आगे की राह
राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में भवन निर्माण के लिए करोड़ों रुपये बांटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहरी इलाकों के स्कूलों में भी संसाधनों को बेहतर बनाने की योजनाएं चल रही हैं। जानकारों का मानना है कि केवल इमारतें खड़ी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई के स्तर पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। हालांकि, अच्छी और सुरक्षित इमारतें मिलने से बच्चों का मनोबल जरूर बढ़ता है और माता-पिता भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने में अधिक भरोसा दिखाते हैं।
राज्य के कई इलाकों में अभी भी ऐसे स्कूल मौजूद हैं जहां शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक दुरुस्त नहीं हैं। ऐसे में 401 करोड़ रुपये के इस पैकेज से उन तमाम स्कूलों में एक नई उम्मीद जगी है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी सरकार के इस कदम की सराहना की है, बशर्ते जमीनी स्तर पर ठेकेदार और अधिकारी ईमानदारी से काम करें। आने वाले महीनों में इन 472 स्कूलों का कायाकल्प किस तरह होता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन फिलहाल शिक्षा विभाग के इस बड़े फैसले से राजस्थान के शैक्षणिक गलियारों में सकारात्मक चर्चा जरूर शुरू हो गई है।
"राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी कोशिश है कि प्रदेश का कोई भी विद्यालय भवन विहीन न रहे और बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतरीन माहौल मिले। इसी के तहत प्राथमिकता के आधार पर लगातार बजट जारी किया जा रहा है।" — मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री, राजस्थान




