नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सिनेमाघरों में इन दिनों साउथ के लोकप्रिय अभिनेता विजय देवरकोंडा और अभिनेत्री रश्मिका मंदाना की नई फिल्म 'रणबाली' को लेकर काफी चर्चा है। फिल्म के मेकर्स ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इसका एक दमदार पोस्टर जारी किया था जिसमें विजय देवरकोंडा तिरंगे में लिपटे हुए एक योद्धा के रूप में नजर आए थे। इसके बाद से ही फैंस के बीच इस फिल्म को लेकर उत्साह बहुत ज्यादा बढ़ गया था। लेकिन जैसे ही फिल्म पर्दे पर आई, जनता की प्रतिक्रिया बिल्कुल उम्मीद के उलट निकली और दर्शक मायूस होकर सिनेमाघरों से बाहर आए।
फिल्म के रिलीज होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों की समीक्षाओं की बाढ़ आ गई है। आज तक और गुड न्यूज टुडे जैसे मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म देखने पहुंचे आम दर्शकों ने इसे सीधे तौर पर 'टॉर्चर' करार दिया है। थिएटर्स से बाहर आ रहे लोगों का कहना है कि फिल्म की कहानी और उसका निर्देशन बहुत कमजोर है। फैंस का यह भी कहना है कि विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना जैसे बड़े कलाकारों से सजी इस फिल्म को देखकर उन्होंने अपना माथा पकड़ लिया और उनका पैसा पूरी तरह बर्बाद हो गया है।
उदयपुर की शाही शादी के बाद मिला था बड़ा सरप्राइज
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हाल ही में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने उदयपुर में एक बहुत ही भव्य और राजेशाही समारोह में एक-दूसरे के साथ सात फेरे लिए थे। इन दोनों की शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर हफ्तों तक छाए रहे थे। शादी के तुरंत बाद इस जोड़े ने अपने फैंस को सरप्राइज देते हुए 'रणबाली' फिल्म का अपना नया लुक साझा किया था। फैंस को उम्मीद थी कि जिस तरह इनकी रियल लाइफ की जोड़ी चर्चा में है, वैसी ही जादूगरी इनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी भी पर्दे पर दिखाएगी।
लेकिन फिल्म का टीजर जितना दमदार और रोंगटे खड़े करने वाला था, पूरी फिल्म उतनी ही फीकी साबित हुई है। मेकर्स ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब इसका पोस्टर लॉन्च किया था, तब लोगों ने इसकी देशभक्ति की भावना और युद्ध के दृश्यों की काफी तारीफ की थी। इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस फिल्म के लुक्स को लेकर काफी हाइप बनाई गई थी। दर्शकों को लगा था कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।
कमजोर पटकथा और खराब निर्देशन पर उठे सवाल
सिनेमा विशेषज्ञों और समीक्षकों का मानना है कि फिल्म 'रणबाली' की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कमजोर पटकथा और खराब निर्देशन है। बड़े पर्दे पर भव्य दृश्य दिखाने के चक्कर में कहानी की मूल आत्मा कहीं खो गई है। विजय देवरकोंडा ने एक योद्धा के रूप में अपनी तरफ से पूरी मेहनत की है और उनके अभिनय में वो जोश भी साफ दिखाई देता है, लेकिन कमजोर संवाद और लंबी खींचतान भरी कहानी ने उनके सारे प्रयासों पर पानी फेर दिया है। रश्मिका मंदाना का जादू भी इस बार बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पाया है।
जमीनी स्तर पर सिनेमाघरों के बाहर खड़े दर्शकों से जब हमारी टीम ने बात की, तो उनका गुस्सा साफ झलक रहा था। लोगों का कहना है कि आज के समय में जब दर्शक अच्छी और दमदार कहानियों वाली फिल्में देखना पसंद करते हैं, तब इस तरह की पुरानी और बोरिंग कहानी पर पैसा खर्च करना उन्हें मूर्खतापूर्ण लगता है। सोशल मीडिया पर भी मीम्स और नेगेटिव रिव्यूज की बाढ़ आ गई है, जो फिल्म निर्माताओं के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का भविष्य और आगे की चुनौतियां
इन तीखी और नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का सीधा असर फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर पड़ता साफ दिखाई दे रहा है। वीकडेज में सिनेमाघरों के भीतर खाली कुर्सियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि 'रणबाली' दर्शकों को अपनी तरफ खींचने में पूरी तरह असफल रही है। जिन फैंस ने अपनी पसंदीदा जोड़ी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए एडवांस बुकिंग कराई थी, वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। आने वाले दिनों में फिल्म के लिए अपनी लागत निकालना भी बहुत मुश्किल साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, 'रणबाली' का यह सफर इस बात का एक और बड़ा उदाहरण है कि सिर्फ बड़े कलाकारों और भारी-भरकम बजट के दम पर किसी फिल्म को सफल नहीं बनाया जा सकता है। जब तक कहानी में दम और दर्शकों से जुड़ाव नहीं होगा, तब तक पब्लिक किसी भी फिल्म को स्वीकार नहीं करेगी। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना के लिए यह समय अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर बेहद सावधानी से कदम उठाने का है, ताकि वे अपने नाराज फैंस का भरोसा दोबारा जीत सकें।








