नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और रूस के कूटनीतिक रिश्ते एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक कार्यक्रम के दौरान रूस के साथ भारत की पुरानी और मजबूत दोस्ती को खुलकर दुनिया के सामने रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इतिहास गवाह है कि जब पूरी दुनिया पाकिस्तान के पक्ष में खड़ी थी, तब सिर्फ रूस ने भारत का साथ निभाया था। पिछले 70 सालों में कश्मीर समेत चार बड़े मौकों पर रूस ने भारत का कूटनीतिक समर्थन किया। विदेश मंत्री के इस बयान के बाद भारत और रूस के बीच आपसी सहयोग के नए रास्ते खुलते साफ नजर आ रहे हैं।
इसी कूटनीतिक मजबूती के बीच आम नागरिकों और युवाओं के लिए भी एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आने वाले दिनों में करीब 70 हजार भारतीय वर्कर्स रूस में नौकरी करने जा सकेंगे। रूस के अलग-अलग सेक्टर्स में कुशल कामगारों की भारी मांग है, जिसे पूरा करने के लिए भारत के युवाओं को वहां भेजा जा रहा है। सरकार की तरफ से उन सभीक्टर्स की सूची भी तैयार कर ली गई है जहां इन भारतीय युवाओं को रोजगार के बेहतरीन अवसर मिलने वाले हैं। इससे दोनों देशों के आर्थिक और कामकाजी संबंध और ज्यादा मजबूत होंगे।
रूस में प्लेग का खतरा और स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी
एक तरफ जहां रोजगार और कूटनीति के मोर्चे पर अच्छी खबरें हैं, वहीं रूस के साइबेरिया क्षेत्र से एक डराने वाली खबर भी आई है। साइबेरिया में प्लेग का खतरा मंडराने लगा है जिसके बाद वहां की स्थानीय जनता में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि आम जनता अभी भी इस खतरे को लेकर काफी बेफिक्र नजर आ रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने लोगों को कड़ी सावधानी बरतने के आदेश दिए हैं। एक महिला रिसर्चर की मौत के बाद रूस में प्लेग का खौफ फिर से पैदा हो गया है और एहतियात के तौर पर लगभग 200 लोगों को क्वारंटीन यानी एकांतवास में भेज दिया गया है। अमेरिका समेत कई अन्य देशों की इस स्थिति पर पैनी नजर है।
स्वास्थ्य से जुड़ी इन चिंताओं के साथ-साथ रूस की राजनीति और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निजी जीवन से जुड़ी गतिविधियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में बीबीसी की एक विशेष जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि राष्ट्रपति पुतिन के ब्लैक सी यानी काला सागर के पास स्थित आवास का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है। इस आलीशान आवास के आसपास निर्माण कार्यों की सैटेलाइट तस्वीरों और जांच रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जांच में इस बात की भी पड़ताल की गई है कि इस बड़े विस्तार के पीछे आखिर मुख्य वजह क्या है।
रोजगार और कूटनीति के बीच बदलती वैश्विक परिस्थितियां
भारत और रूस के बीच बढ़ते मानवीय और कामकाजी रिश्तों का दायरा सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहा है। रूस के जिन सेक्टर्स में 70 हजार भारतीयों को नौकरियां मिल रही हैं, उनमें निर्माण, तकनीकी और सेवा क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। भारत सरकार लगातार यह कोशिश कर रही है कि विदेश जाने वाले इन नागरिकों को किसी भी तरह की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के तहत कामगारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। रूस जाने वाले इन वर्कर्स के लिए वीजा प्रक्रिया और अन्य कागजी कार्रवाई को भी काफी सरल बनाया गया है।
वैश्विक स्तर पर रूस की स्थिति भले ही कई पश्चिमी देशों के साथ तनावपूर्ण चल रही हो, लेकिन भारत के साथ उसके संबंध लगातार प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। विदेश मंत्री जयशंकर के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि भारत अपनी पुरानी मित्रता को किसी भी बाहरी दबाव में नहीं भूलेगा। चाहे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा हो या फिर रक्षा और ऊर्जा का क्षेत्र, रूस ने हर मुश्किल वक्त में भारत का साथ निभाया है। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में भारत और रूस के रिश्ते रोजगार, कूटनीति और व्यापार के मोर्चे पर नए आयाम छूने वाले हैं।

