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रूस में संसदीय चुनाव संपन्न: शुरुआती रुझानों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी का जलवा बरकरार

रूस में तीन दिनों तक चले संसदीय चुनावों के मतदान समाप्त हो चुके हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी भारी बढ़त के साथ सबसे आगे चल रही है, जबकि इस दौरान यूक्रेन संघर्ष का असर भी चुनाव प्रक्रिया पर साफ देखने को मिला।
The Freelance ब्यूरो
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21 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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रूस में संसदीय चुनाव संपन्न: शुरुआती रुझानों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी का जलवा बरकरार
📷 रूस में संसदीय चुनाव संपन्न: शुरुआती रुझानों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी का जलवा बरकरार — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • रूस के संसदीय चुनावों में केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार कुल 56.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है।
  • शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल के मुताबिक सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।
  • चुनाव प्रक्रिया के दौरान यूक्रेन की ओर से बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।
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रूस में तीन दिवसीय संसदीय चुनावों का समापन

दुनियाभर की नजरें इस समय रूस की राजनीतिक हलचल पर टिकी हुई हैं। रूस में संसद के निचले सदन 'स्टेट ड्यूमा' के चुनाव के लिए तीन दिनों तक चला मतदान अब समाप्त हो चुका है। इन चुनावों को लेकर वैश्विक स्तर पर खासी चर्चा हो रही है, क्योंकि मौजूदा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासनकाल में हो रहे इस चुनाव में उनके सामने कोई भी मजबूत विपक्षी दल या बड़ा राजनीतिक चेहरा मैदान में नहीं था। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक पहले से ही यह मानकर चल रहे थे कि क्रेमलिन और सत्ताधारी पार्टी का संसद पर वर्चस्व पूरी तरह से बरकरार रहेगा।

देशभर के 11.1 करोड़ पात्र मतदाताओं के लिए यह मतदान शुक्रवार को शुरू हुआ था, जो रविवार तक चला। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब देश का केंद्रीय चुनाव आयोग तेजी से वोटों की गिनती और परिणामों को साझा करने में जुटा हुआ है। शुरुआती रुझान साफ तौर पर यह संकेत दे रहे हैं कि जनता ने एक बार फिर वर्तमान नेतृत्व और नीतियों पर अपनी मुहर लगाई है।

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केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़े और मतदान प्रतिशत

रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से साझा किए गए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस बार के चुनावों में कुल 56.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, हालांकि मजबूत विपक्ष के अभाव में मतदान के आंकड़ों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। आयोग के अनुसार, वोटों की गिनती अभी जारी है और जैसे-जैसे परिणाम सामने आ रहे हैं, सत्ताधारी दल की स्थिति मजबूत होती जा रही है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों की मानें तो शुरुआती नतीजों में सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी 57.54 प्रतिशत वोटों के साथ सबसे आगे चल रही है। हालांकि, अंतिम परिणामों के आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि संसद के निचले सदन में किस दल को कितनी सीटें मिलती हैं और विपक्ष की क्या स्थिति रहती है।

एग्जिट पोल के अनुमान और प्रमुख दलों की स्थिति

इंटरफैक्स (IFX) और अन्य प्रमुख एजेंसियों द्वारा जारी एग्जिट पोल के अनुमानों में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की तस्वीर साफ होने लगी है। इन अनुमानों के मुताबिक, सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी को लगभग 49.4 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही देश की कम्युनिस्ट पार्टी दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरती दिख रही है, जिसे करीब 14.2 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है।

इसके अलावा, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ रूस को 10.7 प्रतिशत और न्यू पीपल पार्टी को 9.7 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद जताई गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन शुरुआती आंकड़ों और एग्जिट पोल के अनुमानों में ज्यादा फेरबदल होने की संभावना कम ही है, क्योंकि सत्ताधारी पार्टी की पकड़ पूरे देश में बेहद मजबूत मानी जाती है।

यूक्रेन संघर्ष के बीच हुए चुनाव और अंतर्राष्ट्रीय आपत्तियां

इस बार के रूसी संसदीय चुनाव बेहद तनावपूर्ण माहौल में संपन्न हुए हैं। रूस के मुख्य भूभाग के अलावा, यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों और क्रीमिया में भी मतदान कराया गया, जिन पर रूस का नियंत्रण है। यूक्रेन के अधिकारियों और यूरोपीय संघ (EU) ने इन क्षेत्रों में चुनाव कराए जाने को अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से इन चुनावों और उनके नतीजों को सिरे से खारिज करने की अपील की है।

दूसरी ओर, क्रेमलिन का मानना है कि इन चुनावों के माध्यम से देश की जनता का रुख साफ हो गया है और यह मौजूदा नीतियों तथा यूक्रेन में चल रहे सैन्य अभियान को जनसमर्थन प्रदान करने का एक जरिया है। कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के बीच हुए इन चुनावों ने एक बार फिर रूस और पश्चिमी देशों के बीच की दूरियों को और बढ़ा दिया है।

चुनाव के दौरान मॉस्को पर अब तक का बड़ा ड्रोन हमला

मतदान के ठीक आखिरी दिन रूस और यूक्रेन के बीच का तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया के दौरान यूक्रेनी सेना ने रूस पर एक हजार से ज्यादा ड्रोन दागे। इनमें से सैकड़ों ड्रोन विशेष तौर पर राजधानी मॉस्को की तरफ भेजे गए थे, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। रूसी रक्षा मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन ने इन हमलों को नाकाम करने का दावा किया, लेकिन इस बड़ी सैन्य कार्रवाई ने चुनावों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

"इन चुनावों के जरिए रूस ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक दिशा और आंतरिक स्थिरता को साबित करने का प्रयास किया है, भले ही इसके सामने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चुनौतियां और विरोध क्यों न रहे हों।" — राजनीतिक विश्लेषक

निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक तस्वीर

रूस में संपन्न हुए इन संसदीय चुनावों की मतगणना अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। केंद्रीय चुनाव आयोग जल्द ही सभी सीटों के अंतिम और आधिकारिक परिणामों की घोषणा करेगा, जिसके बाद नई 'स्टेट ड्यूमा' की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। भले ही शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी की भारी जीत का संकेत दे दिया हो, लेकिन देश के भीतर और बाहर जिस तरह के राजनीतिक और सैन्य हालात बने हुए हैं, वे आने वाले दिनों में रूस की नीतियों को गहराई से प्रभावित करेंगे।

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