दिल्ली के सीमापुरी इलाके से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। यहाँ बुधवार को एक चार मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभरा कर नीचे गिर गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई है। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को इस बात की सूचना दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इमारत के मलबे के नीचे आठ से दस लोगों के दबे होने की आशंका है।
घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गया। पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। मलबे को हटाने के लिए बड़ी मशीनों और कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार तीन साल के एक छोटे बच्चे समेत आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इन सभी घायलों को इलाज के लिए पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।
घटनास्थल पर मचा कोहराम और स्थानीय लोगों की मदद
इमारत के अचानक ढहने से आसपास के लोगों में भारी दहशत फैल गई है। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर पास के लोग तुरंत अपनी दुकानों और घरों से बाहर निकल आए। धूल का गुबार उठने के बाद लोगों को समझ आया कि इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई है। प्रशासन के आने से पहले ही स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मलबा हटाना शुरू कर दिया था। लोगों ने मिलकर कुछ दबे हुए लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। दिल्ली में लगातार इस तरह से पुरानी इमारतों के गिरने के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में शहर के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह के हादसे देखने को मिले हैं। लोग अपने आशियानों में डर के साये में जीने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रशासन का राहत अभियान और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दुर्घटना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की रुकावट न आए। एनडीआरएफ और अन्य बचाव दल भी मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरा मलबा नहीं हटा लिया जाता, तब तक तलाश अभियान जारी रहेगा। एम्बुलेंस की गाड़ियों को लगातार अस्पताल के लिए तैयार रखा गया है ताकि घायलों को तुरंत मदद मिल सके।
दिल्ली में लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने सुरक्षा और निर्माण मानकों की पोल खोल दी है। बिना अनुमति के बनाई गई इमारतें या फिर बहुत पुरानी हो चुकी जर्जर इमारतें आम जनता के लिए मौत का जाल बनती जा रही हैं। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन की ओर से अभी तक घायलों की सटीक संख्या और नुकसान को लेकर पूरी रिपोर्ट आनी बाकी है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आगे की जांच
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि इमारत के निर्माण में नियमों की अनदेखी की गई होगी। पुरानी और कमजोर इमारतों की समय पर जांच न होने के कारण ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं। दिल्ली नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को अब शहर की ऐसी सभी जर्जर इमारतों की पहचान करनी होगी। लोगों की सुरक्षा के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।



