नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — इन दिनों देश भर से सांपों के निकलने और अजीबोगरीब घटनाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर भी सांपों से जुड़े वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहे हैं। कभी गन्ने के खेतों में खतरनाक संघर्ष की तस्वीरें सामने आती हैं, तो कभी घरों के भीतर सांपों के छुपने की खबरें लोगों को डरा देती हैं। गूगल ट्रेंड्स पर भी इन विषयों को लेकर लोगों की उत्सुकता काफी बढ़ गई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर अचानक इस तरह की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं और इनसे कैसे बचा जाए।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक गन्ने के खेत में जहरीले धामिन सांप और नेवले के बीच लगभग पैंतालीस मिनट तक खूनी संघर्ष चला। दोनों की इस खतरनाक लड़ाई को देखने के लिए आसपास के कई लोग इकट्ठा हो गए और इसका वीडियो भी बना लिया। आखिर में इस संघर्ष में जहरीले धामिन सांप की मौत हो गई। वन विभाग के जानकारों का कहना है कि खेतों की कटाई और इंसानी दखल के कारण अक्सर ऐसे जीव आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे इस तरह की प्राकृतिक लड़ाई देखने को मिलती है।
पंद्रह फीट का अजगर और सेल्फी की दीवानगी
दूसरी तरफ, ग्रामीण इलाकों से भी लगातार ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जो खतरे और लापरवाही दोनों को दिखाती हैं। एक अन्य घटना में गांव के पास अचानक पंद्रह फीट लंबा अजगर निकल आया। विशालकाय अजगर को देखकर लोगों के होश उड़ गए, लेकिन डरने के बजाय स्थानीय युवाओं ने उसके साथ सेल्फी लेना शुरू कर दिया। वीडियो और फोटो खिंचवाने की ऐसी होड़ मची कि मानो कोई बड़ा सेलेब्रिटी आ गया हो। गनीमत यह रही कि बाद में पांच समझदार लोगों ने मिलकर उस अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया और जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह जंगली जीवों के पास जाकर सेल्फी लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
गुजरात के कच्छ इलाके से एक बहुत ही सुखद और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों को एक ऐसा सांप दिखा है जो इस क्षेत्र में पूरे डेढ़ सौ साल बाद नजर आया है। इस दुर्लभ प्रजाति के सांप के मिलने से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। वैज्ञानिक अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि आखिर इतने लंबे समय बाद यह जीव अचानक कहां से प्रकट हुआ। इस तरह की खोजें यह बताती हैं कि हमारे जंगलों और रेगिस्तानों में अब भी कई ऐसे रहस्य छुपे हैं जिनके बारे में इंसानों को पूरी जानकारी नहीं है।
रसोई और दफ्तरों तक पहुंचे जहरीले मेहमान
सिर्फ जंगल और खेत ही नहीं, बल्कि अब शहरी इलाकों और दफ्तरों के अंदर भी सांप सुरक्षित महसूस करने लगे हैं। हाल ही में एक कंपनी के अंदर बिस्कुट की पेटी खोलते ही उसमें से एक फुफकारता हुआ सांप निकल आया और उसने एक कर्मचारी को डस लिया। इस घटना के बाद दफ्तर में हड़कंप मच गया और घायल कर्मचारी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। ऐसी घटनाएं यह चेतावनी देती हैं कि गोदामों और बंद डिब्बों में सामान रखते समय कितनी सावधानी बरतने की जरूरत है। अंधेरी और ठंडी जगहें सांपों को बहुत पसंद आती हैं, इसलिए वे ऐसी जगहों पर छुपकर बैठ जाते हैं।
घरों के अंदर सांपों के आने को लेकर पर्यावरण वैज्ञानिकों ने कुछ खास बातें बताई हैं। घरों के आसपास जमा होने वाला कचरा, नमी, चूहों का उपद्रव और कुछ खास तरह की गंध सांपों को अपनी तरफ खींचती है। रसोई या घर के कोनों से आने वाली सड़ी-गली चीजों की गंध से भी सांप आकर्षित होकर घरों में घुस आते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि घर के आसपास पूरी सफाई रखनी चाहिए और किसी भी तरह का मलबा या गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसलिए मानसून या गर्मियों के दिनों में विशेष सतर्कता बरतना बहुत जरूरी है।
सांपों के बढ़ते हमलों से बचने के लिए क्या करें?
वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हमें इन बेजुबान जीवों से डरने की बजाय इनके व्यवहार को समझने की जरूरत है। इंसानों द्वारा जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवासों को नष्ट करने की वजह से सांप मजबूरन बस्तियों का रुख कर रहे हैं। यदि कभी घर या आसपास कोई सांप दिखाई दे, तो तुरंत स्थानीय सपेरे या वन विभाग की टीम को सूचना देनी चाहिए। खुद से उसे पकड़ने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। सावधानी और समझदारी से ही इंसानों और वन्यजीवों दोनों की जान बचाई जा सकती है, और इसी में सबकी भलाई है।









