नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट में जब भी सबसे खतरनाक और तेज शुरुआत करने वाले बल्लेबाजों की बात होती है, तो वीरेंद्र सहवाग का नाम सबसे ऊपर आता है। दिल्ली के नजफगढ़ से आने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से खेल की परिभाषा ही बदल दी थी। टेस्ट क्रिकेट हो या वनडे, सहवाग का बल्ला हमेशा विरोधी गेंदबाजों पर भारी पड़ता था। उनकी इसी आक्रामक शैली ने उन्हें दुनिया भर में 'नजफगढ़ का सुल्तान' और 'मुल्तान के सुल्तान' के रूप में मशहूर किया। क्रिकेट के मैदान पर उनका यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है।
क्रिसइन्फोटेक और अन्य खेल आंकड़ों के अनुसार, सहवाग ने भारत के लिए खेलते हुए कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए जो आज भी अमर हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से पहला तिहरा शतक जड़ने का कारनामा किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने करियर में दो बार टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने का ऐतिहासिक मील का पत्थर छुआ। पारंपरिक रूप से टेस्ट मैच को संभलकर खेलने की रणनीति को बदलते हुए, सहवाग ने हमेशा अपनी प्राकृतिक आक्रामक शैली पर भरोसा किया। चाहे लाल गेंद हो या सफेद गेंद, उनका मूल मंत्र हमेशा गेंद को मैदान से बाहर भेजने का होता था।
टेस्ट और वनडे में सहवाग के धमाकेदार आंकड़े
सहवाग के अंतरराष्ट्रीय करियर के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि वे अपने दौर के सबसे प्रभावी बल्लेबाजों में से एक थे। उन्होंने भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेले और हजारों रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनका स्ट्राइक रेट कई मध्य क्रम के बल्लेबाजों से भी बेहतर रहता था, जो एक ओपनर के रूप में हैरान करने वाला था। वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी उनका बल्ला जमकर बोला और उन्होंने साल 2011 के विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। वेस्ट इंडीज के खिलाफ उनका वनडे में दोहरा शतक इस बात का सबूत था कि वे लंबे फॉर्मेट के साथ छोटे फॉर्मेट में भी कितने माहिर थे।
उनके खेलने के तरीके में एक गजब का आत्मविश्वास झलकता था। गेंदबाज चाहे दुनिया का कोई भी तेज गेंदबाज या स्पिनर हो, सहवाग अक्सर क्रीज पर उतरते ही चौकों और छक्कों की बरसात शुरू कर देते थे। उन्होंने कई बार स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ भी आगे बढ़कर सीधे छक्के जड़े। यह उनके बेहतरीन हैंड-आई कोऑर्डिनेशन और गेंद को समय से पढ़ने की कला का नतीजा था। आधुनिक युग के कई युवा बल्लेबाज आज भी सहवाग की इस बेखौफ बल्लेबाजी शैली को अपना आदर्श मानते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं।
मैदान के बाहर और कमेंट्री बॉक्स में नई पारी
साल 2015 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी वीरेंद्र सहवाग खेल प्रेमियों से लगातार जुड़े रहे हैं। क्रिकेट के मैदान को छोड़ने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी अनोखी शैली और मजेदार टिप्पणियों से एक नई पहचान बनाई। इसके अलावा, वे क्रिकेट मैचों के दौरान हिंदी और अंग्रेजी कमेंट्री में भी काफी लोकप्रिय रहे। उनकी सीधी और बेबाक बातें दर्शकों को खूब पसंद आती हैं। वे अक्सर क्रिकेट के मौजूदा मुकाबलों पर अपनी पैनी और सटीक राय रखते हैं, जो खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन जाती है।
युवा खिलाड़ियों को तराशने और उन्हें आगे बढ़ाने में भी सहवाग की भूमिका समय-समय पर देखने को मिलती है। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उन्होंने कई युवा प्रतिभाओं को सलाह दी है। दिल्ली और आसपास के इलाकों से आने वाले कई युवा खिलाड़ी सहवाग को अपना गुरु मानते हैं। उनका यह सफर इस बात को साबित करता है कि मेहनत, लगन और अपने प्राकृतिक खेल पर भरोसा करके कोई भी खिलाड़ी खेल जगत में सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है। आज भी जब भारतीय क्रिकेट में विस्फोटक ओपनर की बात होती है, तो सहवाग का नाम सबसे पहले गूंजता है।
भारतीय क्रिकेट पर वीरेंद्र सहवाग का अमिट प्रभाव
वीरेंद्र सहवाग का प्रभाव सिर्फ उनके रनों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीय टीम की मानसिकता को बदला। उनके आने से पहले भारतीय ओपनर्स पारंपरिक रक्षात्मक खेल पर ज्यादा ध्यान देते थे। सहवाग ने टीम को यह सिखाया कि विदेशी धरती पर भी तेज गेंदबाजों पर दबाव कैसे बनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी मुश्किल पिचों पर जाकर रन बनाना उनकी बड़ी खासियत थी। आज का भारतीय क्रिकेट जो आक्रामक रवैया अपनाता है, उसकी नींव रखने वाले खिलाड़ियों में सहवाग का नाम सबसे प्रमुख है।








