नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — क्रिकेट की दुनिया में वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पिछले कुछ घंटों में भारत के खेल प्रेमियों ने इंटरनेट पर इस बोर्ड के बारे में बहुत ज्यादा खोजबीन की है। इस अचानक आई तेजी के पीछे खिलाड़ियों के करार, घरेलू सीरीज और बोर्ड के नए प्रशासनिक नियम अहम वजह माने जा रहे हैं। कैरेबियाई क्रिकेट हमेशा से अपने तूफानी खिलाड़ियों और अनोखी शैली के लिए जाना जाता है। ऐसे में बोर्ड के स्तर पर होने वाला हर छोटा बदलाव पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों का ध्यान खींचता है।
खेल जानकारों का मानना है कि वेस्टइंडीज क्रिकेट में पैसों और फ्रेंचाइजी लीग के बीच का पुराना विवाद फिर से गहरा रहा है। कई बड़े खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलने की बजाय दुनिया भर की टी-ट्वेंटी लीग में खेलना पसंद कर रहे हैं। इससे वेस्टइंडीज बोर्ड को अपनी राष्ट्रीय टीम तैयार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बोर्ड ने इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ सख्त नियम बनाए हैं। इन नियमों का असर सीधे तौर पर खिलाड़ियों के चयन और उनकी मैच फीस पर पड़ रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और खेल पोर्टल्स पर इन दिनों कैरेबियाई क्रिकेट की खूब चर्चा हो रही है।
खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच क्यों बढ़ रही है खींचतान?
वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड और वहां के शीर्ष खिलाड़ियों के रिश्ते लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। खिलाड़ी हमेशा से बेहतर वेतन और केंद्रीय अनुबंध की मांग करते आए हैं। दूसरी तरफ बोर्ड का तर्क है कि उनके पास आईपीएल या अन्य अमीर लीगों जितना पैसा नहीं है। इस वित्तीय अंतर के कारण कई दिग्गज खिलाड़ी बोर्ड के साथ अनुबंध करने से बचते हैं। वे साल भर अलग-अलग देशों की टी-ट्वेंटी लीग में खेलकर अपनी कमाई पर ज्यादा ध्यान देते हैं। जब वेस्टइंडीज की टीम अंतरराष्ट्रीय मैचों में हारती है, तो इसका ठीकरा इसी पुरानी खींचतान पर फोड़ा जाता है।
भारतीय दर्शकों के बीच इस विषय के ट्रेंड होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां के लोग वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को आईपीएल में बहुत पसंद करते हैं। निकोलस पूरन, आंद्रे रसेल और सुनील नरेन जैसे खिलाड़ी भारत में खासे लोकप्रिय हैं। जब ये खिलाड़ी अपने बोर्ड के साथ किसी विवाद में फंसते हैं, तो भारतीय फैंस भी उस पर तुरंत नजर रखते हैं। हाल ही में बोर्ड की तरफ से कुछ ऐसे बयान आए हैं जिन्होंने खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन बयानों के बाद से ही गूगल पर इससे जुड़े सवालों की बाढ़ आ गई है।
वेस्टइंडीज क्रिकेट का भविष्य और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां
आने वाले महीनों में वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम को कई अहम सीरीज खेलनी हैं। ऐसे समय में बोर्ड का यह आंतरिक संकट टीम के प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। अगर बेहतरीन खिलाड़ी बोर्ड के साथ अनुबंध नहीं करेंगे, तो मैदान पर टीम कमजोर नजर आएगी। इससे आईसीसी की प्रतियोगिताओं में भी वेस्टइंडीज की साख पर बट्टा लग सकता है। क्रिकेट प्रेमियों और खेल विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बोर्ड इस समस्या का क्या हल निकालता है। क्या वे खिलाड़ियों को मनाने में कामयाब होंगे या फिर यह विवाद और बढ़ेगा?
द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, तो यह बात सामने आई कि केवल खिलाड़ी ही नहीं बल्कि बोर्ड की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय क्रिकेट ढांचे को मजबूत करने के लिए जिस फंड की जरूरत होती है, उसकी कमी साफ दिखाई देती है। जब तक बुनियादी स्तर पर सुधार नहीं होगा, तब तक कैरेबियाई क्रिकेट अपनी पुरानी चमक वापस नहीं पा सकेगा। फैंस बस यही चाहते हैं कि खेल की राजनीति खत्म हो और मैदान पर वही आक्रामक अंदाज फिर से देखने को मिले जिसके लिए वेस्टइंडीज की टीम दुनिया भर में मशहूर रही है।
भारतीय फैंस के बीच अचानक क्यों बढ़ी इस विषय पर उत्सुकता?
भारत में क्रिकेट किसी धर्म की तरह है और यहां के लोग खेल की हर बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं। वेस्टइंडीज के साथ भारतीय टीम के पुराने मुकाबले और ऐतिहासिक द्वंद्व आज भी लोगों को याद हैं। जब भी वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड से जुड़ा कोई बड़ा नीतिगत फैसला आता है, तो भारतीय खेल प्रेमी उसके मायने तलाशने लगते हैं। इस बार भी इंटरनेट सर्च के आंकड़े यही बता रहे हैं कि लोग जानना चाहते हैं कि कैरेबियाई क्रिकेट में आखिर अंदरखाने क्या चल रहा है।
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट और डिजिटल ट्रैकिंग से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय सीरीज नजदीक आएंगी, बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच की शर्तें सार्वजनिक होती जाएंगी। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आपको सबसे सटीक तथा निष्पक्ष खबरें देता रहेगा। खेल जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें ताकि कोई भी जरूरी सच आपसे न छूटे।










