एशियन गेम्स और भूगोल का उलझा हुआ समीकरण
एशियन गेम्स को अक्सर एशिया का ओलिंपिक कहा जाता है, जिसमें महाद्वीप के 45 देशों के खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन जब हम एशिया के नक्शे पर नजर डालते हैं, तो कुछ बड़े नाम ऐसे हैं जो भौगोलिक रूप से इस महाद्वीप का हिस्सा होने के बावजूद इन खेलों में दिखाई नहीं देते। रूस, तुर्किये और इजरायल इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। इन तीनों देशों की जमीन का एक बड़ा हिस्सा एशिया में आता है, लेकिन वे एशियाई खेलों का हिस्सा नहीं हैं।
इस अजीब स्थिति का जवाब केवल भूगोल से नहीं मिलता। किसी भी देश की खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसकी सीमाएं कहां तक फैली हैं। इसके पीछे देशों का इतिहास, खेल संस्थाओं की सदस्यता, अंतरराष्ट्रीय संबंध और जटिल राजनीतिक परिस्थितियां अहम भूमिका निभाती हैं। यहीं से इन तीनों देशों की खेल कहानी पूरी तरह अलग दिशा पकड़ लेती है।
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इजरायल का एशियन गेम्स से बाहर होने का राजनीतिक इतिहास
इजरायल हमेशा से एशियन गेम्स से दूर नहीं था। उसने शुरुआती दौर में इन खेलों में सक्रिय रूप से भाग लिया था। साल 1954 से 1974 के बीच इजरायली खिलाड़ियों ने कई एशियन गेम्स में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि, जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक संघर्ष बढ़े, उसका असर सीधे तौर पर खेल के मैदानों पर भी दिखने लगा।
वर्ष 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स के दौरान मेजबान देश इंडोनेशिया ने इजरायल को आधिकारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया था। इसके अलावा, कई अरब देशों ने इजरायली खिलाड़ियों के खिलाफ किसी भी मुकाबले में उतरने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। बाद में 1981 में जब ओलिंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) का औपचारिक गठन हुआ, तब इजरायल को उसमें सदस्यता नहीं मिली। इसके बाद इजरायल ने एशियाई खेल संस्थाओं से दूरी बनाते हुए यूरोपियन खेल निकायों के साथ अपने संबंध मजबूत कर लिए, और आज उसकी फुटबॉल टीम यूरोपियन फुटबॉल एसोसिएशन के तहत खेलती है।
तुर्किये: जमीन एशिया की, लेकिन खेल पहचान पूरी तरह यूरोप की
तुर्किये एक ऐसा देश है जिसका करीब 97 प्रतिशत भूभाग एशियाई हिस्से यानी अनातोलिया में स्थित है, जबकि उसका केवल 3 प्रतिशत हिस्सा ही यूरोप में आता है। इसके बावजूद तुर्किये ने राजनीतिक, आर्थिक और खेल के क्षेत्र में यूरोपीय ढांचे के साथ मजबूत और अटूट जुड़ाव रखा है।
आधुनिक तुर्किये के गठन के बाद से ही उसका झुकाव पश्चिमी संस्थाओं की ओर रहा है। खेलों की दुनिया में भी उसने यूरोपीय व्यवस्था को ही अपनी प्राथमिकता बनाया। तुर्किये की फुटबॉल टीम यूरोपियन फुटबॉल एसोसिएशन की सदस्य है। इसके अलावा बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स जैसे तमाम लोकप्रिय खेलों में भी तुर्किये एशियाई प्रतियोगिताओं की बजाय यूरोपीय प्रतियोगिताओं में ही हिस्सा लेता आया है।
"खेलों में किसी भी देश की भागीदारी सिर्फ नक्शे पर उसकी स्थिति से तय नहीं होती, बल्कि खेल संगठनों की सदस्यता और राजनीतिक समझौते भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाते हैं।" — खेल विशेषज्ञ विश्लेषण
रूस: क्षेत्रफल एशिया का बड़ा हिस्सा, लेकिन आबादी और संस्कृति यूरोप से जुड़ी
रूस का भौगोलिक विस्तार बेहद विशाल है और उसकी लगभग 75 प्रतिशत जमीन एशिया महाद्वीप के भीतर आती है। हालांकि, व्यावहारिक सच्चाई यह है कि देश की 75 प्रतिशत आबादी यूरोपीय रूस में निवास करती है। देश की राजधानी मॉस्को और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर सेंट पीटर्सबर्ग भी इसके यूरोपीय हिस्से में ही आते हैं.
ऐतिहासिक रूप से सोवियत संघ के दौर से ही रूस की खेल संरचना यूरोपीय खेल संस्थाओं से गहराई से जुड़ी रही है। फुटबॉल समेत कई प्रमुख खेलों में रूस लंबे समय से यूरोपीय खेल ढांचे का ही हिस्सा रहा है। यही वजह है कि रूस ओलिंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) का नियमित सदस्य नहीं है, हालांकि हाल के वर्षों में एशियाई खेल गतिविधियों के साथ उसका सांस्कृतिक और युवा स्तर पर कुछ जुड़ाव जरूर बढ़ा है।
ऑस्ट्रेलिया का अनूठा मामला: एशिया का न होकर भी खेलों में नजदीकी
दिलचस्प बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया भौगोलिक रूप से एशिया का हिस्सा बिल्कुल नहीं है, फिर भी खेल के मैदान पर उसका एशिया के साथ बेहद मजबूत और गहरा जुड़ाव बन चुका है। साल 2006 में ऑस्ट्रेलिया ने ओशिनिया फुटबॉल कॉन्फेडरेशन को छोड़कर एशियन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन की सदस्यता हासिल कर ली थी।
इस बड़े फैसले के पीछे मुख्य वजह फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफिकेशन का रास्ता आसान करना था। ओशिनिया क्षेत्र की टीमों को वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए कठिन प्लेऑफ खेलना पड़ता था, जबकि एशियाई कोटे में सीधे क्वालिफिकेशन के अवसर ज्यादा थे। हालांकि, एशियन फुटबॉल की सदस्यता मिलना अलग बात है और एशियन गेम्स खेलना अलग, क्योंकि एशियन गेम्स ओलिंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के नियमों के तहत आयोजित होते हैं। फिर भी, ओसीए ने अब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों को अतिथि के रूप में कुछ खास एशियाई आयोजनों में शामिल करना शुरू कर दिया है, जो भविष्य के बड़े बदलावों का संकेत हो सकता है।







