होम/राजनीति/असम के चहेते गायक जुबीन गर्ग की मौत का एक साल: सिंगापुर के समंदर से शुरू हुआ था विवाद, अब भी न्याय की आस
राजनीतिपढ़ने में समय: 5 मिनट

असम के चहेते गायक जुबीन गर्ग की मौत का एक साल: सिंगापुर के समंदर से शुरू हुआ था विवाद, अब भी न्याय की आस

असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की सिंगापुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को एक साल पूरा हो गया है। सिंगापुर पुलिस ने इसे हादसा माना है, वहीं असम में इसे हत्या बताते हुए कोर्ट में सात आरोपियों पर मुकदमा चल रहा है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
18 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
असम के चहेते गायक जुबीन गर्ग की मौत का एक साल: सिंगापुर के समंदर से शुरू हुआ था विवाद, अब भी न्याय की आस
📷 असम के चहेते गायक जुबीन गर्ग की मौत का एक साल: सिंगापुर के समंदर से शुरू हुआ था विवाद, अब भी न्याय की आस — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • सिंगापुर के लाजारस द्वीप के पास पिछले साल 19 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी जुबीन गर्ग की मौत।
  • असम सरकार ने एसआईटी जांच बिठाई जिसके बाद मामले को हत्या मानते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।
  • सिंगापुर के अधिकारियों ने इसे लाइफ जैकेट उतारने और ज्यादा शराब पीने के कारण डूबने से हुई दुर्घटना करार दिया है।
  • असम में उनके प्रशंसकों की याद में 'जुबीन क्षेत्र' का निर्माण किया गया है और उनकी विरासत आज भी जीवित है।
प्रायोजित • SPONSOREDVoterAction Campaign Suite
VoterAction - कागज़ पर नहीं, ऐप पर लड़े जाते हैं चुनाव | अभियान की पूरी कमान

सिंगापुर के समंदर में कैसे हुआ था वह हादसा

असम के दिलों पर राज करने वाले मशहूर गायक जुबीन गर्ग की मौत को एक साल बीत चुका है, लेकिन उनके जाने का गम और उससे जुड़े सवाल आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। पिछले साल 19 सितंबर को नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने से ठीक पहले जुबीन सिंगापुर में थे। वहां वह एक प्राइवेट यॉट पार्टी के तहत लाजारस द्वीप के पास समंदर में उतरे थे।

जांच के मुताबिक, जुबीन दो बार पानी के अंदर गए थे और दूसरी बार जब वह उतरे तो अचेत हो गए। तुरंत सीपीआर और मेडिकल मदद देने के बाद उन्हें सिंगापुर जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सिंगापुर पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया और कहा कि उन्होंने लाइफ जैकेट उतार दी थी।

टोक्सिकोलोजी रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उनके शरीर में अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा थी। इसके बावजूद असम के लोगों के मन में इस थ्योरी को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे और देखते ही देखते यह मामला एक बड़े विवाद में बदल गया।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

असम में फूटा गुस्सा और दर्ज हुईं साठ से ज्यादा एफआईआर

जुबीन गर्ग की मौत की खबर जब असम पहुंची, तो पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। गुवाहाटी के पास सोणापुर के कमारकुची इलाके में जब उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, तो उसमें डेढ़ मिलियन से ज्यादा लोग शामिल हुए। माइकल जैक्सन के अंतिम संस्कार की तरह जुबीन को भी पूरे राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।

लेकिन यह दुख धीरे-धीरे गुस्से और शक में तब्दील हो गया। जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने भी न्याय की इस मुहिम का समर्थन किया और असमभर में 60 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। जनता के बढ़ते दबाव को देखते हुए असम सरकार ने तुरंत एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी का गठन कर दिया।

जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ा, पुलिस ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही सिंगापुर फेस्टिवल के ऑर्गेनाइजर श्यामकानु महंता, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, संगीतकार अमृतप्रभा महंता और शेखर ज्योति गोस्वामी समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इन पर हत्या, आपराधिक साजिश और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।

सिंगापुर की रिपोर्ट और असम कोर्ट की कानूनी जंग

मामले की जांच कर रही एसआईटी ने दिसंबर तक करीब ढाई हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी, जिसमें 300 गवाहों के बयान शामिल थे। इस बीच आरोपियों में से एक शेखर ज्योति गोस्वामी ने दावा किया कि यह पूरी प्लानिंग के तहत दिया गया जहर था। हालांकि, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ कहा कि यह आरोपी का खुद को बचाने का हथकंडो भी हो सकता है।

मार्च 2026 में सिंगापुर के स्टेट कोरोनर एडम नाखोदा ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से इसे दुर्घटनावश डूबने से हुई मौत बताया। सिंगापुर पुलिस ने अपनी जांच बंद कर दी, लेकिन असम में कानूनी प्रक्रिया लगातार जारी रही। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया और मई में सभी सात आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए गए।

असम की संस्कृति में आज भी अमर हैं जुबीन गर्ग

कानूनी दांवपेच के बीच असम सरकार ने गायक की याद को हमेशा के लिए संजोने के कई कदम उठाए हैं। कमारकुची में 10 बीघा जमीन पर 'जुबीन क्षेत्र' नाम से एक स्थाई स्मारक बनाया जा रहा है। जोरहाट में भी एक और स्मारक की घोषणा की गई है, और कोकराझार में उनके जन्मदिन पर 25 हजार कलाकारों ने मिलकर 'मायाबिनी' गाना गाकर उन्हें अनोखी श्रद्धांजलि दी।

एआर रहमान और श्रेया घोषाल से लेकर अंतरराष्ट्रीय कलाकार पोस्ट मेलन तक ने जुबीन को एक लीजेंड के रूप में याद किया। काजीरंगा नेशनल पार्क में जन्मे एक नवजात हाथी के बच्चे का नाम भी 'मायाबिनी' रखा गया है। उनकी आखिरी फिल्म 'रोई रोई बिनाले' बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी और उनकी बरसी पर यह फिल्म एक बार फिर सिनेमाघरों में लौट रही है।

"मैं अभी भी यह मानने को तैयार नहीं हूं कि मेरे जुबीन दा अब इस दुनिया में नहीं हैं। हम प्रशंसकों के लिए 19 सितंबर का दिन बिताना सबसे कठिन होगा।" — मन्ना भट्टाचार्य, व्यवसायी और जुबीन के प्रशंसक

असम के लोगों के लिए जुबीन सिर्फ एक गायक नहीं थे, बल्कि वह परिवार के सदस्य की तरह थे। आज भी 'जुबीन क्षेत्र' उनके चाहने वालों के लिए किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है, जहां वे आकर चुपचाप अपने चहेते कलाकार को याद करते हैं।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED