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खेलपढ़ने में समय: 7 मिनट

एशियाई खेलों में मनु भाकर और तेजिंदर पाल सिंह तूर होंगे भारत के ध्वजवाहक, उद्घाटन से पहले नागोया में हंगामा

जापान के नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह के लिए स्टार निशानेबाज मनु भाकर और शॉटपुट चैंपियन तेजिंदर पाल सिंह तूर को भारत का ध्वजवाहक चुना गया है। हालांकि, खेल के आगाज से ठीक पहले फ्लैग होस्टिंग समारोह में अचानक आई रुकावटों और आयोजनों की व्यवस्थाओं को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।
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19 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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एशियाई खेलों में मनु भाकर और तेजिंदर पाल सिंह तूर होंगे भारत के ध्वजवाहक, उद्घाटन से पहले नागोया में हंगामा
📷 एशियाई खेलों में मनु भाकर और तेजिंदर पाल सिंह तूर होंगे भारत के ध्वजवाहक, उद्घाटन से पहले नागोया में हंगामा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली निशानेबाज मनु भाकर और शॉटपुट के गत चैंपियन तेजिंदर पाल सिंह तूर होंगे एशियाई खेलों में भारत के ध्वजवाहक।
  • नागोया में होने वाले पारंपरिक फ्लैग होस्टिंग समारोह को आयोजन के दौरान अचानक रोकना पड़ा, जिससे व्यवस्थाओं पर उठे सवाल।
  • खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए कंटेनर शैली के आवास और परिवहन में देरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है भारतीय दल।

एशियाई खेलों के महाकुंभ में भारत का नेतृत्व करेंगे मनु भाकर और तेजिंदर पाल सिंह तूर

जापान के नागोया शहर में आयोजित होने जा रहे एशियाई खेलों का रोमांच अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। खेलों के आधिकारिक उद्घाटन समारोह से पहले भारतीय दल के लिए एक बहुत बड़ी और गर्व की खबर सामने आई है। भारत के दो सबसे बड़े और अनुभवी एथलीट इस महाकुंभ के उद्घाटन समारोह में देश का तिरंगा झंडा थामेंगे। डबल ओलंपिक मेडलिस्ट स्टार निशानेबाज मनु भाकर और शॉटपुट के मौजूदा एशियाई चैंपियन तेजिंदर पाल सिंह तूर को भारत का ध्वजवाहक चुना गया है।

भारतीय दल के शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि मनु भाकर देश की तरफ से मुख्य ध्वजवाहक की भूमिका निभाएंगी। इसके तुरंत बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने भी यह साफ कर दिया कि उनके साथ स्टार शॉटपुट खिलाड़ी तेजिंदर पाल सिंह तूर भी सह-ध्वजवाहक के रूप में तिरंगा थामेंगे। इन दोनों खिलाड़ियों का खेल जगत में बहुत बड़ा नाम है और उनकी यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

यह जिम्मेदारी मिलने के बाद से ही दोनों खिलाड़ियों के फैंस में भारी उत्साह देखा जा रहा है। खेल प्रेमियों का मानना है कि इन दोनों दिग्गजों के हाथों में देश का झंडा होना भारतीय दल के लिए एक बड़ा मोटिवेशन साबित होगा। उद्घाटन समारोह में जब ये दोनों खिलाड़ी तिरंगे के साथ आगे बढ़ेंगे, तो पूरी दुनिया की निगाहें भारतीय दल पर टिकी होंगी।

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मनु भाकर और तेजिंदर पाल सिंह तूर का शानदार खेल सफर

निशानेबाज मनु भाकर के लिए यह सम्मान किसी बड़े सपने के सच होने जैसा है। पेरिस ओलंपिक 2024 में अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाली मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में दो कांस्य पदक अपने नाम किए थे। वह स्वतंत्र भारत की ऐसी पहली खिलाड़ी बनी थीं, जिन्होंने एक ही ओलंपिक खेलों में दो पदक जीतने का कारनामा किया था। उनकी इस सफलता ने भारत में शूटिंग के खेल को एक नया आयाम दिया है।

दूसरी ओर, तेजिंदर पाल सिंह तूर भी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। तूर पिछले दो एशियाई खेलों में लगातार स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा चुके हैं। शॉटपुट के क्षेत्र में उनका दबदबा एशिया स्तर पर लंबे समय से कायम रहा है। नागोया के इस बड़े मंच पर एक बार फिर से उनसे देश को स्वर्ण पदक की पूरी उम्मीद है।

इन दोनों खिलाड़ियों का ध्वजवाहक बनना इस बात का प्रमाण है कि भारत के व्यक्तिगत खेलों के खिलाड़ी अब वैश्विक स्तर पर देश का नेतृत्व करने के लिए सबसे आगे खड़े हैं। उनकी मेहनत, लगन और संघर्ष ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है, जहां पूरा देश उनके पीछे एकजुट होकर खड़ा नजर आता है।

उद्घाटन से पहले नागोया में फ्लैग होस्टिंग समारोह में आई बड़ी रुकावट

एक तरफ जहां ध्वजवाहक बनने की खबर से चारों तरफ खुशी का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ नागोया से आ रही व्यवस्था से जुड़ी तस्वीरें चिंता बढ़ाने वाली हैं। शनिवार को होने वाले आधिकारिक उद्घाटन समारोह से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को पारंपरिक फ्लैग होस्टिंग समारोह आयोजित किया जाना था। इस कार्यक्रम में भारत समेत कुल पांच देशों के दलों को हिस्सा लेना था, लेकिन ऐन वक्त पर इसमें भारी रुकावटें देखने को मिलीं।

समारोह शुरू होने से पहले ही इसमें देरी हो गई और कुछ ही देर बाद इसे अचानक रोक दिया गया। गार्डन पियर पर भारत के प्रतिनिधिमंडल के साथ-साथ यमन, उत्तर कोरिया, फिलिस्तीन और तिमोर-लेस्ते के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। भारत की तरफ से चार डिप्टी शेफ डी मिशन अचंता शरत कमल, लिजो डेविड थोट्टन, अलकनंदा अशोक और अंजलि भागवत वहां उपस्थित थे, जिन्हें इस औपचारिकता में भाग लेना था।

स्थानीय आयोजकों ने इस देरी के पीछे किसी एक टीम से जुड़ी 'कुछ परेशानी' का हवाला दिया। हालांकि, शुरुआत में उन्होंने स्थिति को 15 मिनट में सामान्य करने की बात कही थी। करीब 20 मिनट की देरी के बाद कार्यक्रम शुरू भी हुआ, लेकिन कुछ ही पलों में इसे फिर से रोक दिया गया। इस घटना के बाद वहां मौजूद खिलाड़ियों और अधिकारियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।

मंच तक पहुंचकर वापस लौटने पड़े भारतीय प्रतिनिधि

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत के प्रतिनिधि मंच की ओर आगे बढ़ चुके थे, लेकिन कार्यक्रम के अचानक बीच में रुक जाने की वजह से उन्हें वापस प्रतीक्षा क्षेत्र में लौटना पड़ा। टेबल टेनिस के दिग्गज और डिप्टी शेफ डी मिशन अचंता शरत कमल और अंजलि भागवत मंच के बिल्कुल करीब पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।

आयोजकों की तरफ से बार-बार यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आखिर वह कौन सी टीम थी और किस तरह की परेशानी थी जिसके कारण इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को रोकना पड़ा। इस तरह की अव्यवस्था ने एशियाई खेलों के शुरुआती दिनों में ही आयोजकों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की छोटी-छोटी तकनीकी या प्रबंधकीय खामियां खिलाड़ियों के मानसिक सुकून पर असर डालती हैं। बड़े टूर्नामेंट्स में इस स्तर की लापरवाही की उम्मीद नहीं की जाती है, खासकर तब जब दुनिया भर के तमाम देशों के सर्वश्रेष्ठ एथलीट वहां अपनी कला का प्रदर्शन करने पहुंचे हों।

खिलाड़ियों के आवास और परिवहन को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

नागोया एशियाई खेलों की आयोजन व्यवस्थाओं को लेकर सिर्फ फ्लैग होस्टिंग की घटना ही नहीं, बल्कि इससे पहले भी कई तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस बार पारंपरिक गेम्स विलेज बनाने के बजाय खिलाड़ियों और अधिकारियों के ठहरने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। इसमें कंटेनर शैली के आवास, होटल और कोस्टा सेरेना क्रूज शिप तक को शामिल किया गया है, जिससे मिक्स्ड रिएक्शन मिल रहे हैं।

खिलाड़ियों और अधिकारियों को कमरों के आवंटन में देरी और ट्रेनिंग वेन्यू तक पहुंचने के लिए परिवहन संबंधी समस्याओं से दो-चार होना पड़ा है। भारतीय एमएमए खिलाड़ी वरुण सान्याल ने भी आवास व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर साझा की थीं। इसके अलावा, भारत के शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने भी कुछ मामलों में मिसमैनेजमेंट की बात स्वीकार की थी।

बैडमिंटन स्टार सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने एक मौके पर बताया था कि भारतीय दल के सदस्यों को ट्रांसपोर्ट के लिए कई-कई घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ा। इन तमाम परेशानियों के बीच खेल की शुरुआत होना अपने आप में एक कठिन चुनौती साबित हो रहा है।

"नागोया में शुरुआती कुछ आयोजनों में प्रबंधन से जुड़ी कुछ छोटी-मोटी दिक्कतें सामने जरूर आई हैं, लेकिन हमारे खिलाड़ी इन सब बातों से ध्यान भटकाए बिना पूरी तरह से अपने खेल पर फोकस कर रहे हैं और देश के लिए अपना बेस्ट देने को तैयार हैं।" — सहदेव यादव, शेफ डी मिशन (भारतीय दल)

अब सबकी निगाहें शनिवार के मुख्य उद्घाटन समारोह पर टिकी हैं

तमाम तरह की व्यवस्थागत कमियों और शुरुआती रुकावटों के बाद अब पूरा ध्यान शनिवार को होने वाले आधिकारिक उद्घाटन समारोह पर टिक गया है। हालांकि कई खेलों के मुकाबले पहले ही शुरू हो चुके हैं, लेकिन उद्घाटन समारोह के साथ ही इस महाकुंभ का औपचारिक आगाज माना जाता है।

जब मनु भाकर और तेजिंदर पाल सिंह तूर तिरंगा थामकर मैदान पर उतरेंगे, तो वह पल हर भारतीय के लिए बेहद खास होगा। देशवासी यही उम्मीद कर रहे हैं कि हमारे खिलाड़ी तमाम बाहरी परेशानियों को पीछे छोड़कर केवल अपने खेल पर ध्यान देंगे और पिछले संस्करणों से भी बेहतर प्रदर्शन कर देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेंगे।

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