तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की दो महत्वपूर्ण आरक्षित विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से ही सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, इन सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को चुनावी नतीजे सामने आएंगे। यह मुकाबला इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इसी साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर सरकार बनाने वाली टीवीके (TVK) पार्टी के लिए यह पहली चुनावी परीक्षा होगी।
मथुरान्तकम और धारापुरम सीटों पर क्यों हो रहा है उपचुनाव?
मथुरान्तकम (एससी) और धारापुरम (एससी) विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की मुख्य वजह मौजूदा विधायकों का इस्तीफा देना है। मथुरान्तकम सीट मारगाथम कुमारावेल के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जबकि धारापुरम सीट पी. सत्यभामा के विधायक पद छोड़ने के कारण रिक्त हुई थी। चुनाव आयोग द्वारा स्क्रूटनी के बाद दोनों सीटों पर कुल 58 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल के अनुसार, मथुरान्तकम में 28 और धारापुरम में 30 उम्मीदवारों के पर्चे सही पाए गए हैं।
सीएम विजय की पार्टी ने इन चेहरों पर लगाया दांव
अप्रैल के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के जरिए सत्ता हासिल करने वाले मुख्यमंत्री और टीवीके संस्थापक सी जोसेफ विजय ने उपचुनाव के लिए बड़ा दांव चला है। पार्टी ने मथुरान्तकम से पूर्व एआईएडीएमके विधायक मारगाथम कुमारावेल और धारापुरम से पी. सत्यभामा को अपना उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि ये दोनों नेता अप्रैल चुनाव में एआईएडीएमके के टिकट पर जीते थे, लेकिन बाद में विधायक पद से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके पार्टी में शामिल हो गए थे। अब देखना यह है कि जनता पाला बदलने वाले इन नेताओं को कितना समर्थन देती है।
विपक्षी दलों की जोरदार तैयारी और पांच-कोणीय मुकाबला
इस उपचुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो गया है क्योंकि यहां पांच-कोणीय (फाइव-कॉर्नर) मुकाबला देखने को मिल रहा है। डीएमके ने मथुरान्तकम से आई. परांथम और धारापुरम से एस. सुकन्या को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं, एनडीए की अगुवाई कर रही एआईएडीएमके ने पूरी तरह महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए मथुरान्तकम से कनिथा संपथ और धारापुरम से के. भानुमती को टिकट दिया है। इसके अलावा, वाम दलों (CPI और CPI-M) ने भी अपने उम्मीदवार उतारकर पारंपरिक गठबंधनों से अलग स्वतंत्र रूप से लड़ने का फैसला किया है।
"तमिलनाडु के उपचुनाव जनता के लिए अपनी राय व्यक्त करने और सुशासन के प्रति अपना समर्थन दोहराने का एक और बड़ा अवसर हैं। लोकतंत्र के इस महापर्व में सभी मतदाता बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।" — सी जोसेफ विजय, मुख्यमंत्री, तमिलनाडु
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव भले ही सिर्फ दो विधानसभा सीटों पर हो रहा है, लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक असर पूरे राज्य की राजनीति पर पड़ेगा। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री विजय के सामने अपनी नई सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर लगवाने की चुनौती है, वहीं डीएमके और एआईएडीएमके इस चुनाव के जरिए अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की फिराक में हैं। वाम दलों के अलग उतरने से मुकाबला और भी त्रिकोणीय और संघर्षपूर्ण हो गया है, जिसकी वजह से चुनावी मैदान का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।



