मानवता की अनूठी मिसाल: सोशल मीडिया पर दर्द देख आगे आई बांदा रोटी बैंक सोसाइटी
समाज में जब चारों तरफ स्वार्थ और निराशा की खबरें सुनने को मिलती हैं, तब कुछ ऐसी संस्थाएं और लोग सामने आते हैं जो मानवता पर से भरोसा उठने नहीं देते। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है, जहां 'रोटी बैंक सोसाइटी' ने एक जरूरतमंद परिवार की मदद करके यह साबित कर दिया कि सच्ची इंसानियत आज भी जिंदा है। संस्था के पदाधिकारियों ने एक गरीब और असहाय परिवार की सुध लेते हुए उन्हें न सिर्फ राशन और कपड़े दिए, बल्कि आर्थिक मदद भी पहुंचाई ताकि वे अपनी जिंदगी की मुश्किलों से पार पा सकें।
यह पूरा मामला बांदा जिले की बबेरू तहसील से जुड़ा हुआ है। यहां रहने वाले एक परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और उनके पास दो वक्त की रोटी का भी इंतजाम नहीं था। परिवार के हालात इस कदर बदतर हो चुके थे कि वे जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे थे। ऐसे कठिन समय में मसीहा बनकर आई बांदा रोटी बैंक सोसाइटी, जिसने बिना किसी देरी के पीड़ित परिवार के दरवाजे पर पहुंचकर राहत सामग्री और जरूरी सामान सौंपा।
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यूट्यूबर के कैमरे से सामने आई थी परिवार की दर्दनाक दास्तान और बेबसी
इस पूरे मामले के सामने आने के पीछे सोशल मीडिया की एक सकारात्मक भूमिका देखने को मिली। बबेरू के एक स्थानीय यूट्यूबर सूरज ने अपने चैनल के माध्यम से इस गरीब परिवार की दयनीय स्थिति को दुनिया के सामने उजागर किया था। वीडियो में दिखाया गया था कि कैसे यह परिवार भुखमरी और कड़ाके की ठंड या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे देखा, लेकिन बांदा रोटी बैंक सोसाइटी की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने तुरंत कड़ा कदम उठाने का फैसला किया।
यूट्यूबर सूरज की इस पहल और समाजसेवी अरुणेश गुप्ता ‘सोनू’ के सहयोग से यह जानकारी सीधे रोटी बैंक सोसाइटी के प्रमुख पदाधिकारियों तक पहुंची। सूचना मिलते ही संस्था ने बिना एक पल गंवाए राहत अभियान चलाने की रूपरेखा तैयार की। इस प्रकार सोशल मीडिया और जमीनी स्तर के समाजसेवियों के आपसी तालमेल से एक जरूरतमंद परिवार तक समय पर मदद पहुंच सकी, जिसने यह दिखा दिया कि तकनीक का सही इस्तेमाल समाज सुधार और मदद के लिए कैसे किया जा सकता है।
संस्था ने परिवार को सौंपी जरूरत की हर एक चीज, चेहरे पर लौटी मुस्कान
रोटी बैंक सोसाइटी के सदस्यों ने जब बबेरू तहसील में पीड़ित परिवार के घर का रुख किया, तो वे अपने साथ राहत सामग्री का पूरा जखीरा लेकर गए थे। संस्था की ओर से परिवार को सिर्फ एक या दो चीजें नहीं, बल्कि जीवनयापन के लिए जरूरी तमाम वस्तुएं प्रदान की गईं। इसमें मुख्य रूप से नगद राशि, भारी मात्रा में राशन, नए कपड़े, साड़ियां, कंबलों के साथ-साथ जूते-चप्पल और रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली तमाम गृहस्थी की चीजें शामिल थीं।
लंबे समय से घोर अभाव में जी रहे परिवार के सदस्यों को जब अचानक इतनी सारी मदद मिली, तो उनकी आंखें नम हो गईं और चेहरों पर एक अनूठी मुस्कान तैर गई। स्थानीय लोगों ने भी संस्था के इस नेक काम की जमकर सराहना की। इस मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि इस तरह की मदद न सिर्फ आर्थिक संबल देती है, बल्कि इंसान को मुश्किल हालातों से लड़ने की मानसिक ताकत भी प्रदान करती है।
आठ साल से लगातार जारी है गरीबों की सेवा का यह अनथक कारवां
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कोई पहली बार नहीं है जब बांदा रोटी बैंक सोसाइटी ने इस तरह का कोई सराहनीय कार्य किया हो। यह संस्था पिछले पूरे आठ सालों से लगातार हर रविवार को समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों की सेवा करती आ रही है। संस्था के सदस्यों का संकल्प है कि वे शहर से लेकर दूर-दराज के गांवों तक पहुंचेंगे और किसी भी जरूरतमंद को भूखा या बेसहारा नहीं रहने देंगे।
यह पूरा सेवा अभियान सह संरक्षक चंद्रमौली भारद्वाज के संरक्षण, अध्यक्ष रिजवान अली की अध्यक्षता और कार्यालय प्रभारी मोहम्मद शमीम के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक समाज में एक भी व्यक्ति ऐसा रहेगा जिसे मदद की जरूरत है, उनका यह कारवां यूं ही बिना रुके और बिना थके आगे बढ़ता रहेगा। समाज के सक्षम लोगों से भी लगातार अपील की जाती है कि वे आगे आएं और इस प्रकार के अभियानों में अपना योगदान दें।
पर्यावरण संरक्षण और कानूनी अधिकारों की भी दी गई जरूरी जानकारी
इस राहत वितरण कार्यक्रम के दौरान केवल सामग्री ही नहीं बांटी गई, बल्कि समाज के प्रति अन्य जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया गया। संगठन मंत्री सुनील सक्सेना ने इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए अधिक से अधिक पेड़ लगाने की बात कही। उन्होंने साफ-सफाई, अच्छे स्वास्थ्य, ट्रैफिक नियमों के पालन और नागरिकों के मौलिक कानूनी अधिकारों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
"सच्ची सेवा का मतलब सिर्फ किसी को एक वक्त का खाना देना नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों के कंधे से कंधا मिलाकर खड़े होना और उनके जीवन में खोई हुई उम्मीद और मुस्कान वापस लाना है। हम समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।" — जगदीश श्रीवास, शाखा प्रमुख
कार्यक्रम के अंत में शाखा प्रमुख खाईपार जगदीश श्रीवास ने सभी दानदाताओं, सहयोगियों, स्थानीय निवासियों और ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिना जनसहयोग के इतने बड़े स्तर पर लगातार सेवा कार्य चलाना संभव नहीं है। इस मौके पर रिजवान अली, सुनील सक्सेना, मोहम्मद शमीम, नसीर खान, जगदीश श्रीवास, शहाना खान, अलीमुद्दीन, निहाल खान, मोहम्मद अदीब, यूट्यूबर सूरज और अरुणेश गुप्ता ‘सोनू’ सहित संस्था के तमाम प्रमुख पदाधिकारी, सदस्य और स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे।




