भागलपुर जंक्शन पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव, महिला यात्री की जान पर आई आफत
भारतीय रेलवे देश के कोने-कोने को जोड़ने का काम करता है और रोजाना करोड़ों लोग ट्रेनों से सफर करते हैं। रेलवे की तरफ से यात्रियों की सुविधाओं के लिए तमाम बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। पूर्व रेलवे के मालदा रेल मंडल के तहत आने वाले ए-वन श्रेणी के भागलपुर रेलवे जंक्शन पर कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिला है। यहां बुनियादी नागरिक सुविधाओं का घोर अभाव अब सीधे तौर पर यात्रियों की जान पर भारी पड़ने लगा है। जंक्शन के सबसे व्यस्त माने जाने वाले प्लेटफार्म संख्या दो और तीन पर शौचालय की व्यवस्था न होना यात्रियों के लिए एक विकराल समस्या बन चुका है।
बुधवार को इसी बड़ी लापरवाही के चलते एक गंभीर रेल हादसा होते-होते टल गया। प्लेटफार्म पर शौचालय न मिलने के कारण परेशान एक महिला यात्री को अपनी जान जोखिम में डालकर चलती ट्रेन से छलांग लगानी पड़ी। इस घटना के बाद से रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नींद तब टूटी जब एक महिला की जान पर बन आई।
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घटना के दिन की पूरी कहानी बेहद डरावनी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्लेटफार्म संख्या दो और तीन पर शौचालय की सुविधा न होने के कारण यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ता है। यदि किसी यात्री को आपात स्थिति में शौच जाना पड़े, तो उसे फुटओवर ब्रिज यानी एफओबी पार करके प्लेटफार्म नंबर एक पर जाना पड़ता है। शारीरिक रूप से कमजोर, बुजुर्ग या फिर गंभीर स्थिति वाले यात्री इतनी दूर जाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में मजबूरी में लोग प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेनों के बायो-टॉयलेट का इस्तेमाल करने के लिए डिब्बों में चढ़ जाते हैं।
बुधवार को मुजफ्फरपुर जाने वाली जनसेवा एक्सप्रेस भागलपुर जंक्शन के इसी प्लेटफार्म पर खड़ी थी। इसी दौरान दो महिला यात्रियों को शौच की जरूरत महसूस हुई और वे शौचालय का उपयोग करने के लिए ट्रेन के एक डिब्बे में चढ़ गईं। महिलाएं अभी अपना काम पूरा कर ही रही थीं कि अचानक ट्रेन का सिग्नल ग्रीन हो गया और ट्रेन ने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू कर दिया। जैसे ही महिलाओं ने महसूस किया कि ट्रेन चल पड़ी है, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे बुरी तरह घबरा गईं।
चलती बोगी से कूदने को मजबूर हुई महिला, कुलियों की सतर्कता से बची जान
ट्रेन के रफ्तार पकड़ते ही डिब्बे के अंदर मौजूद दोनों महिलाओं में चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। नीचे उतरने की हड़बड़ी और घबराहट में एक महिला यात्री ने चलती ट्रेन से ही प्लेटफार्म पर छलांग लगा दी। गनीमत यह रही कि उस समय ट्रेन की गति काफी धीमी थी और महिला का संतुलन पूरी तरह बिगड़ने से पहले वह प्लेटफार्म की दिशा में ही गिरी। यदि वह जरा भी असंतुलित होकर पटरी की तरफ गिर जाती, तो एक भयानक दुर्घटना हो सकती थी और उसकी जान भी जा सकती थी।
हाथों में सामान और चेहरे पर खौफ लिए महिला को गिरते देख प्लेटफार्म पर मौजूद कुछ कुलियों और अन्य सतर्क यात्रियों ने तुरंत अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़ लगाई। उन्होंने तुरंत महिला को संभाला और सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद कुछ देर के लिए प्लेटफार्म पर भारी हंगामा और अफरातफरी का माहौल बन गया। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि बुनियादी सुविधाओं के बिना यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
अमृत भारत योजना का काम जारी, लेकिन आम आदमी की बुनियादी जरूरत पर जमी धूल
भागलपुर जंक्शन पर इन दिनों पुनर्विकास का कार्य तेजी से चल रहा है। 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत स्टेशन को आधुनिक रूप देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्लेटफार्म संख्या दो और तीन पर सीढ़ियों को चौड़ा करने, नए शेड लगाने और लिफ्ट व एस्केलेटर लगाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। लेकिन विडंबना यह है कि इन तमाम विकास कार्यों के बीच यात्रियों की सबसे पहली और बुनियादी जरूरत यानी 'शौचालय' का निर्माण कराने की सुधि किसी को नहीं आई।
स्थानीय यात्री संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई बार रेलवे के उच्च अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं कि व्यस्त प्लेटफार्मों पर टॉयलेट न होने से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में बने सामान्य शौचालयों में भी अक्सर ताले लटके रहते हैं, जिसके कारण यात्रियों को मजबूरन पैसे चुकाकर 'पे एंड यूज' सेवाओं का रुख करना पड़ता है, जो हर समय और हर यात्री के लिए सुलभ नहीं होता है।
रेलवे प्रशासन ने मानी गलती, महिला यात्री की सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता
एक महिला यात्री की जान पर आई इस आफत और मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद आखिरकार रेलवे प्रशासन हरकत में आया। रेल अधिकारियों ने इस बात को खुले तौर पर स्वीकार किया कि प्लेटफार्म संख्या दो-तीन पर शौचालय का न होना एक गंभीर प्रशासनिक चूक है। रेलवे ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख जताया है और महिला यात्री को हुई भारी मानसिक व शारीरिक असुविधा के लिए आधिकारिक तौर पर माफी भी मांगी है।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि रेलवे के लिए हर यात्री की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि है। इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए रेलवे ने तुरंत प्रभाव से बड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है।
"भागलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म दो-तीन पर शौचालय न होने के कारण महिला यात्री को हुई असुविधा और उत्पन्न हुई स्थिति के लिए रेलवे खेद प्रकट करता है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। महिला एवं बुजुर्ग यात्रियों को भविष्य में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्लेटफार्म पर तत्काल प्रभाव से एक ठोस वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।" — सीपीआरओ, पूर्व रेलवे
निष्कर्ष और आगे की राह: क्या अब सुधरेगा रेलवे का रवैया?
भागलपुर जंक्शन की यह घटना सिर्फ एक बानगी है कि कैसे छोटे-छोटे प्रशासनिक सुधारों की अनदेखी बड़े हादसों का सबब बन सकती है। देश के तमाम बड़े रेलवे स्टेशनों पर करोड़ों रुपए विज्ञापनों और सौंदर्यीकरण पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी कई जगह बदहाल स्थिति में हैं। यदि रेलवे वाकई यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का दावा करता है, तो उसे सबसे पहले जमीनी स्तर की इन कमियों को दूर करना होगा।
रेलवे प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद अब देखना यह होगा कि कब तक भागलपुर जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दो और तीन पर स्थाई या वैकल्पिक शौचालयों का निर्माण पूरा होता है। फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर से इस बात की याद दिला दी है कि यात्रियों की सुरक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतों के साथ कोई भी समझौता भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि रेल विभाग जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा ताकि भविष्य में किसी भी मुसाफिर को अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन से कूदने जैसी नौबत का सामना न करना पड़े।


