धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही देश के उत्तरी राज्यों में वायु प्रदूषण का संकट गहराने लगा है। इस समस्या से निपटने और खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में पंजाब और हरियाणा के सबसे अधिक संवेदनशील 34 जिलों में विशेष उड़न टीमों (फ्लाइंग स्क्वॉड) को मैदान में उतार दिया गया है, जो सीधे तौर पर जमीन पर हालात की निगरानी कर रही हैं।
1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक विशेष निगरानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, CPCB द्वारा तैनात ये विशेष टीमें 1 अक्टूबर से लेकर 30 नवंबर तक सक्रिय रहेंगी। इस दो महीने की अवधि को धान की कटाई और इसके बाद के प्रबंधन के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में ये टीमें लगातार गश्त करेंगी। इनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान खेतों में बची हुई पराली को आग न लगाएं, जिससे कि जहरीला धुआं हवा में न फैले।
ये उड़न टीमें केवल मूकदर्शक नहीं रहेंगी, बल्कि इन्हें व्यापक अधिकार दिए गए हैं। खेतों में आग लगने की किसी भी सूचना या घटना पर ये टीमें तुरंत स्थानीय जिला प्रशासन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर त्वरित कार्रवाई करेंगी। साथ ही, हर रोज की गतिविधियों और जमीनी हालात की विस्तृत रिपोर्ट वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को भेजी जाएगी।
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दिल्ली-NCR की हवा सुधारने की कवायद
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब और हरियाणा में जलने वाली पराली का धुआं हवा के रुख के साथ बहकर दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचता है, जिससे सर्दियों के दिनों में वहां की आबोहवा बेहद खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाती है। हालांकि, वायु प्रदूषण के लिए अकेले पराली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वाहनों का धुआं, औद्योगिक प्रदूषण, सड़कों की धूल और निर्माण कार्यों से उठने वाले कण भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।
यही वजह है कि CAQM ने दिल्ली-NCR के तमाम इलाकों में भी प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। CPCB की इन फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत होगी और किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सख्त संदेश भी दिया जा सकेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और आधिकारिक रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' पुष्टि करता है। यह रिपोर्ट पर्यावरण और प्रशासनिक तैयारियों से जुड़ी है। साभार: CPCB / मीडिया रिपोर्ट्स।








