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राज्यपढ़ने में समय: 3 मिनट

‘साहब, मैं जिंदा हूं...’ कागजों में मृत घोषित, पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर बुजुर्ग महिला की दास्तान

सरकारी तंत्र की उदासीनता का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग महिला दफ्तर पहुंचकर अधिकारियों से कहती रही कि वह जिंदा है, जबकि कागजों में उसे मृत दिखाकर उसकी पेंशन बंद कर दी गई।
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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
प्रादेशिक एवं राज्य ब्यूरो•8 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•46
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‘साहब, मैं जिंदा हूं...’ कागजों में मृत घोषित, पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर बुजुर्ग महिला की दास्तान
📷 ‘साहब, मैं जिंदा हूं...’ कागजों में मृत घोषित, पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर बुजुर्ग महिला की दास्तान — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • वृद्धावस्था पेंशन के लिए दफ्तर पहुंची बुजुर्ग महिला, अधिकारियों से बोली- 'साहब, मैं जिंदा हूं।' कागजों में मृत दिखाकर बंद कर दी गई थी पेंशन।
  • अचानक पेंशन के पैसे आने बंद होने पर महिला ने जब पड़ताल की, तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत घोषित किया जा चुका है।
  • एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समाज कल्याण विभाग को जांच के आदेश दिए हैं, जिसके बाद प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।

देश के सरकारी तंत्र की सुस्त चाल और कागजी लापरवाही अक्सर लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन जाती है। ऐसा ही एक मार्मिक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग महिला को अधिकारियों के सामने यह साबित करना पड़ा कि वह इस दुनिया में जीवित है। सरकारी फाइलों में मृत दर्ज किए जाने के बाद यह महिला अपनी पेंशन बहाल करवाने के लिए दफ्तर-दफ्तर ठोकरें खाने को मजबूर है।

'साहब, मैं जिंदा हूं', अधिकारियों के सामने फफक पड़ी बुजुर्ग

मिली जानकारी के अनुसार, एक बुजुर्ग महिला अपनी फरियाद लेकर तहसील कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर कहा, 'साहब, मैं जिंदा हूं, फिर मुझे कागजों में क्यों मार दिया गया?' महिला को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन ही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा थी, जिससे उनके रोजमर्रा के खर्च चलते थे। कुछ समय तक पेंशन मिलने के बाद अचानक खाते में पैसे आने बंद हो गए। पहले तो महिला को लगा कि शायद किसी तकनीकी खराबी की वजह से किस्त रुकी होगी, लेकिन जब उन्होंने इसकी तहकीकात की तो जो सच सामने आया, उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी।

सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। यानी हकीकत में वह जीवित थीं और अधिकारियों के सामने खड़ी थीं, लेकिन सरकारी फाइलों में उनकी मौत हो चुकी थी।

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बिना जांच के कैसे तैयार हो गया डेथ सर्टिफिकेट?

यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और जमीनी स्तर पर सत्यापन (Verification) न होने की पोल खोलता है। महिला का आरोप है कि उन्हें मृत दर्ज करने से पहले किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी ने मौके पर आकर जमीनी हकीकत जानने की जहमत नहीं उठाई। अगर संबंधित विभाग ने थोड़ी सी भी सावधानी बरती होती, तो यह शर्मनाक स्थिति पैदा नहीं होती।

उम्र के इस पड़ाव पर जहां शरीर काम करने में असमर्थ है, वहां इस तरह की प्रशासनिक भूल ने बुजुर्ग महिला की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ पेट भरने की जद्दोजहद और दूसरी तरफ खुद के जीवित होने का सबूत देने की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

मामला तूल पकड़ने और अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम ने महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले को समाज कल्याण विभाग के पास भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है और तथ्यात्मक रिपोर्ट आने के बाद रिकॉर्ड को दुरुस्त कर जल्द से जल्द पेंशन बहाल करने की कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे सिस्टम की एक लापरवाही किसी जरूरतमंद की जिंदगी को मुश्किलों में डाल सकती है।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्थानीय रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह प्रशासनिक लापरवाही व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। साभार: संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स / स्थानीय प्रशासन।

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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

उत्तर प्रदेश व प्रादेशिक विकास रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस का प्रादेशिक ब्यूरो उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के जमीनी मुद्दों, विकास योजनाओं, प्रशासनिक कार्रवाइयों और ग्रामीण-शहरी समस्याओं की निष्पक्ष और वास्तविक रिपोर्टिंग करता है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

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