उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अपनी आठ सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपना लिया है। पहले सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने और आय, जाति, निवास व वरासत से जुड़े ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार करने के बाद अब लेखपालों ने प्रदेशभर में संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। वेतन विसंगति, स्थानांतरण और पदोन्नति जैसे मुद्दों पर लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिससे तहसील स्तर पर प्रशासनिक कामकाज और आम जनता के दस्तावेज बनने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है।
वेतन विसंगति, ट्रांसफर और डीपीसी पर अड़े लेखपाल
लेखपालों की प्रमुख मांगों में प्रारंभिक वेतनमान लेवल-5/ग्रेड पे 2800 करना शामिल है, जो कि वर्ष 2017 से लंबित चला आ रहा है। संघ का कहना है कि अंतरमंडलीय स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लेखपाल अब भी अपने मूल तैनाती स्थल से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात हैं। इसके अलावा, विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद चयन वर्ष की पदोन्नति सूची अब तक जारी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।
भत्तों में वृद्धि और मूलभूत सुविधाओं की मांग
संघ ने शासन के समक्ष मांग रखी है कि स्टेशनरी भत्ता, नियत यात्रा भत्ता और विशेष भत्ते में तर्कसंगत बढ़ोतरी की जाए। इसके साथ ही ग्राम सचिवालयों में पर्याप्त कक्ष, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। लेखपालों का यह भी तर्क है कि उनके कार्य के दायरे को देखते हुए इस पद को तकनीकी श्रेणी में रखा जाना चाहिए और उन्हें आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाना चाहिए।
शासन को अंतिम चेतावनी
लेखपाल संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस वजह से प्रशासनिक व्यवस्था बाधित होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी।
इस खबर से संबंधित सभी तथ्य विभिन्न रिपोर्टों और संघ के बयानों पर आधारित हैं। 'The Freelance' इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। प्रशासनिक अपडेट्स के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें।
राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
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