उत्तर प्रदेश के फरीदपुर में स्थित फ्यूचर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में शुक्रवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण अभ्यास देखने को मिला। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) की ओर से यहां राज्य स्तरीय भूकंप एवं अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल-2026 का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्राकृतिक आपदा या अचानक लगने वाली आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल की तैयारियों को परखना था।
प्रशासन और मेडिकल टीमों ने दिखाया बेहतरीन तालमेल
इस पूरे अभियान को फरीदपुर की एसडीएम विदुषी सिंह के कड़े समन्वय में अंजाम दिया गया। मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग (फायर) और रेस्क्यू टीम के साथ-साथ 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा ने पूरी मुस्तैदी दिखाई। सभी विभागों ने मिलकर एक ऐसी काल्पनिक स्थिति का सामना किया जिसमें किसी आपदा के वक्त तेजी से राहत और बचाव कार्य किए जाने थे।
अभ्यास के दौरान सबसे पहले अस्पताल परिसर में मरीजों की सुरक्षित निकासी का काम किया गया। इसके बाद घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनका रेस्क्यू और सुरक्षित स्थानांतरण किया गया। इस दौरान प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड), कैजुअल्टी प्रबंधन और एम्बुलेंस के जरिए मरीजों को तुरंत अस्पताल भेजने की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी समझ गए कि संकट के समय कैसे काम किया जाता है।
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सीएचसी फरीदपुर की मेडिकल टीम रही पूरी तरह मुस्तैद
इस पूरी मॉक ड्रिल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) फरीदपुर की मेडिकल टीम ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। टीम में शामिल डॉ. जीए राही, डॉ. अजय, शालिनी, सुनीता और अनुपम कुमार जैसे स्वास्थ्य कर्मियों ने आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने आपदा के दौरान घायलों को तुरंत मेडिकल हेल्प देने और उन्हें सुरक्षित रूप से दूसरे वार्ड या अस्पताल में शिफ्ट करने में पूरा सहयोग दिया।
आपदा प्रबंधन के जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से वास्तविक संकट के समय घबराहट कम होती है और काम तेजी से होता है। सभी विभागों ने तय समय सीमा के भीतर अपने-अपने काम को पूरा करके दिखाया, जिससे यह अभ्यास पूरी तरह सफल रहा।
आपदा के वक्त हर एक मिनट की होती है बड़ी कीमत
मॉक ड्रिल के बाद अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान आपातकाल से जुड़ी बारीकियों पर चर्चा की गई ताकि भविष्य में किसी भी अनहोनी से पूरी ताकत और सुरक्षा के साथ निपटा जा सके।
"आपाताकाल या किसी भी आपदा के समय प्रत्येक मिनट बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से हमने अस्पताल की आपदा-प्रतिक्रिया व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षित निकासी, रेस्क्यू, त्वरित चिकित्सा सहायता और रेफरल व्यवस्था को जमीन पर उतारकर परखा है। इस तरह के अभ्यास से हमारी कमियां समय रहते दूर हो जाती हैं।" — डॉ. अनुराग गौतम, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी फरीदपुर
इस सफल आयोजन के बाद स्थानीय प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने राहत की सांस ली है। इस तरह के आयोजनों से न केवल अस्पताल का स्टाफ सतर्क होता है, बल्कि आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों में भी सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ता है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे सुरक्षा अभ्यास लगातार जारी रखे जाएंगे।




