महासप्तमी की खुशियां बदलीं मातम में
पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले कोलकाता में दुर्गा पूजा का पावन पर्व इस बार गहरे सदमे में तब्दील हो गया है। उत्तरी कोलकाता के व्यस्त इलाके में स्थित प्रसिद्ध चोरबागान सर्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी के दिन एक भयंकर हादसा सामने आया। शाम के वक्त जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए पंडाल की ओर बढ़ रहे थे, तभी अचानक मौसम ने करवट ली और भारी बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने और खुद को बचाने की जद्दोजहद में लोग तेजी से पंडाल परिसर और उसके निकास द्वारों की तरफ दौड़ पड़े। इसी बेकाबू भीड़ और अफरातफरी के बीच देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और एक भीषण भगदड़ मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस हादसे की भयावहता इतनी अधिक थी कि कई लोग जमीन पर गिर पड़े और उनके ऊपर से भीड़ गुजरती चली गई। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पन्नों में उत्सव का माहौल मातम में बदल गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आने से पहले ही वहां मौजूद लोगों ने अपनों को बचाने के लिए संघर्ष शुरू कर दिया था। इस त्रासदी में आधिकारिक तौर पर 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 35 से 40 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।
बारिश और अचानक उमड़ी भीड़ बनी जानलेवा
कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान उमड़ने वाली भीड़ हमेशा से चर्चा का विषय रही है। चोरबागान का यह पंडाल शहर के सबसे पुराने और लोकप्रिय आयोजनों में गिना जाता है। महासप्तमी के दिन यहां भक्तों का तांता लगा हुआ था। शाम करीब साढ़े सात बजे के बाद जब अचानक बादलों ने डेरा डाला और मूसलाधार बारिश शुरू हुई, तो सड़क पर खुले में खड़े हजारों लोग फौरन शरण लेने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने लगे। पंडाल का प्रवेश द्वार और निकास रास्ता पहले से ही सीमित था, जिसके चलते भारी दबाव बन गया।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब अफरा-तफरी के बीच किसी ने अफवाह फैला दी या तेज आवाज में सीटी बजाकर लोगों को आगे धकेलने की कोशिश की। इसके बाद पीछे से आ रही भारी भीड़ ने आगे खड़े लोगों को कुचलना शुरू कर दिया। सड़क संकरी होने और उचित निकासी मार्ग न होने के कारण लोग संभल नहीं पाए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पंडाल के आसपास रोशनी की कमी और भीड़ प्रबंधन में हुई छोटी सी चूक ने इस बड़े हादसे को न्योता दिया। पुलिस और दमकल विभाग के जवानों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और स्थिति को काबू में किया।
प्रशासनिक अमला हरकत में, अस्पताल पहुंचे आला अधिकारी
घटना की सूचना मिलते ही पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता पुलिस का पूरा तंत्र हरकत में आ गया। मुख्यमंत्री और तमाम वरिष्ठ मंत्री तुरंत स्थिति का जायजा लेने के लिए अस्पतालों की ओर रवाना हुए। घायलों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया गया। राज्य सरकार ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अपने सभी निर्धारित वीआईपी कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय और अन्य स्तरों से भी इस हादसे पर दुख जताया गया है।
"यह एक बेहद दुखद और हृदय को झकझोर देने वाली घटना है। महासप्तमी के पावन अवसर पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाना अपूरणीय क्षति है। हमारी सरकार और पूरा प्रशासन इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। घायलों का इलाज हमारी पहली प्राथमिकता है।"— राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ मंत्री
अस्पतालों में भर्ती कराए गए घायलों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कई लोगों की पहचान अभी भी की जा रही है क्योंकि हादसे के वक्त कई लोग अपनों से बिछड़ गए थे। सरकार की तरफ से राहत शिविरों और मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए गए हैं ताकि परिजनों को सही जानकारी मिल सके। इस घटना के बाद कोलकाता के कई अन्य बड़े पूजा पंडालों में भी एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और लाइट एंड साउंड शो जैसे आयोजनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।












