रांची जिले के ग्रामीण इलाकों में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में तोरपा महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति की छठवीं वार्षिक आमसभा का आयोजन किसान पाठशाला परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों, महिला कृषकों और कृषि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को लाभ का सौदा बनाना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना था।
पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर बढ़ता कदम
झारखंड जैसे राज्यों में कृषि आज भी ग्रामीण आजीविका का मुख्य आधार है, लेकिन पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता के कारण किसानों को कई बार मौसम की अनिश्चितता और कम मुनाफे का सामना करना पड़ता है। तोरपा की इस सहकारी समिति ने क्षेत्र के किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने का बीड़ा उठाया है। वार्षिक आमसभा के दौरान किसानों को ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तकनीक, जैविक खाद के उपयोग और कम पानी में अधिक पैदाوار वाली फसलों के बारे में विस्तार से समझाया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि अगर किसान अपनी फसल के पैटर्न में बदलाव लाएं और बागवानी या सब्जियों की खेती को अपनाएं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। समिति पिछले कुछ वर्षों से लगातार इस दिशा में काम कर रही है और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है।
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अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया आमसभा का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया, जिला परिषद सदस्य सुशांति कोंगाड़ी, उपप्रमुख संतोष कर, मुखिया शिशिर तोपनो तथा प्रदान संस्था के प्रतिनिधि अभिषेक और रविरंजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने समिति के अब तक के सफर की सराहना की और ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को समाज के विकास के लिए बेहद जरूरी बताया।
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि जब देश का किसान और ग्रामीण महिला मजबूत होगी, तभी देश वास्तव में आत्मनिर्भर बन पाएगा। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ उठाने की भी अपील की, ताकि किसानों को वित्तीय सहायता मिल सके।
"किसानों और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ही हमारे देश की असली ताकत है। जब महिलाएं कृषि और बागवानी के क्षेत्र में आगे आती हैं, तो पूरा परिवार और समाज आर्थिक रूप से सशक्त होता है। हमें मिलकर आधुनिक खेती को बढ़ावा देना होगा।"— मसीह गुड़िया, जिला परिषद अध्यक्ष
सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की मिली जानकारी
कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा किसानों को सरकारी योजनाओं से अवगत कराना था। अक्सर जानकारी के अभाव में ग्रामीण इलाकों के लोग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ नहीं उठा पाते हैं। इस आमसभा में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग और उद्यान विभाग से जुड़ी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल बीमा योजना, और कृषि यंत्र सब्सिडी के बारे में जानकारी दी गई।
प्रदान संस्था के प्रतिनिधियों अभिषेक और रविरंजन ने किसानों को बताया कि वे किस प्रकार एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से अपनी उपज को सीधे बाजार में बेच सकते हैं और बिचौलियों से बच सकते हैं। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिलता है।
महिला किसानों की सफलता और आगे की राह
तोरपा की महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कार्यप्रणाली से एक मिसाल कायम की है। समिति से जुड़ी महिलाएं न केवल खेती कर रही हैं, बल्कि मूल्यवर्धन (Value Addition) के जरिए अचार, पापड़, और स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग भी सीख रही हैं। इससे उनकी आय में सुधार हुआ है और वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं।
आमसभा के अंत में आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए नई योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई। समिति ने यह संकल्प लिया कि वह आने वाले दिनों में अधिक से अधिक किसानों को जोड़ेगी और उन्हें प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से सशक्त बनाएगी। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।


