सुपौल में प्रशासनिक अमले की अनोखी पहल, रविवार को भी खुले छातापुर प्रखंड के दफ्तर
सरकारी दफ्तरों और छुट्टियों का चोली-दामन का साथ माना जाता है। अमूमन रविवार के दिन किसी भी सरकारी कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग अपने निजी कामों में व्यस्त होते हैं। लेकिन बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड में इस बार कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने सबको चौंका दिया। विकास कार्यों में हो रही सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही को दरकिनार करते हुए अधिकारियों ने छुट्टी के दिन भी अपने दफ्तरों के ताले खोले।
बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी 'कायाकल्प विशेष अभियान' को गति देने के लिए यह कदम उठाया गया। प्रखंड सह अंचल कार्यालय में दिनभर चली इस मैराथन बैठक ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो फाइलों में अटकी योजनाएं भी तेजी से धरातल पर उतर सकती हैं। इस पहल से इलाके के लोगों में विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है।
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जिला स्तर की समीक्षा बैठक के बाद उठाया गया सख्त कदम
इस पूरी कवायद के पीछे हाल ही में जिला मुख्यालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक थी। उस बैठक के दौरान अधिकारियों ने पाया कि छातापुर प्रखंड की पंचायतवार योजनाओं के चयन और उनके क्रियान्वयन में कई तरह की तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियां रह गई थीं। काम पूरा करने की समय-सीमा पहले से ही तय थी, जिसके चलते भारी दबाव बना हुआ था।
इसी दबाव और जिम्मेदारी को समझते हुए बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने रविवार की छुट्टी रद्द करने का निर्णय लिया और सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को कार्यालय तलब किया ताकि सभी कमियों को समय रहते दुरुस्त किया जा सके और योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा सके।
स्कूल, अस्पताल और आंगनबाड़ी केंद्रों की बदलेगी सूरत
ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इसके तहत उप स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों जैसी पुरानी परिसंपत्तियों का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार किया जाना है। साथ ही, जहां जरूरत है वहां नई इमारतों के निर्माण का भी प्रावधान है।
छातापुर प्रखंड की सभी 23 ग्राम पंचायतों से प्राथमिकता के आधार पर लगभग 10-10 योजनाओं का चयन किया गया है। इस तरह कुल 230 महत्वपूर्ण योजनाओं का एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। इन योजनाओं के पूरा होने से गांवों में बुनियादी सुविधाओं का संकट दूर होगा और ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
"ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का विकास हमारी प्राथमिकता है। जिला स्तर पर मिली कमियों को दूर कर सभी 230 योजनाओं को समय पर पूरा करने का खाका तैयार कर लिया गया है, ताकि आम जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।" — डॉ. राकेश गुप्ता, बीडीओ, छातापुर
ललित नारायण सभागार में घंटों चली बैठक, पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग तेज
रविवार को छातापुर प्रखंड कार्यालय स्थित ललित नारायण सभागार में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल बना रहा। इस अहम बैठक में बीपीआरओ देश कुमार, आईटी असिस्टेंट संतोष कुमार के अलावा सभी 23 पंचायतों के कार्यपालक सहायक, पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक मौजूद रहे।
बीडीओ की मौजूदगी में एक-एक योजना के प्रस्ताव, लागत, स्थान और चयन प्रक्रिया की बारीकी से जांच की गई। जिला स्तर पर पहचानी गई त्रुटियों को मौके पर ही सुधारा गया। इसके साथ ही इन सभी 230 स्वीकृत योजनाओं के डेटा को विभागीय पोर्टल पर तेजी से अपलोड करने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि जल्द से जल्द वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां मिल सकें।
पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होगी कार्यों की सख्त निगरानी
इस 'कायाकल्प अभियान' को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए शासन स्तर से कड़ी निगरानी की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला स्तर पर उप विकास आयुक्त (DDC) को नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि प्रखंड स्तर पर बीडीओ खुद इस पूरी प्रक्रिया की कमान संभाले हुए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि योजनाओं की केवल कागजी खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि धरातल पर काम शुरू होने के बाद हर चरण की प्रगति रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इससे लेटलतीफी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी और तय समय सीमा में काम पूरा हो सकेगा।
ग्रामीण विकास के नए अध्याय की ओर बढ़ते कदम
छातापुर के इन सुदूर ग्रामीण इलाकों के बाशिंदों के लिए यह अभियान किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। जर्जर हो चुके उप स्वास्थ्य केंद्रों के सुधरने से लोगों को अपने ही गांव के पास बेहतर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। इसी तरह, सुरक्षित और आधुनिक आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों से बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल मिलेगा।
सामुदायिक भवनों के निर्माण से सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक पक्की जगह मिल जाएगी। छुट्टी के दिन अधिकारियों की यह मेहनत और लगन यह दिखाती है कि अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो सरकारी मशीनरी किस कदर तेजी से काम कर सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये कागजी योजनाएं कितनी जल्दी जमीन पर उतरती हैं।






