स्मार्टफोन बाजार में पलटा समीकरण, कम कीमत वाले 5G फोन्स की कमी से बढ़ी परेशानी
भारतीय मोबाइल बाजार इन दिनों एक दिलचस्प दौर से गुजर रहा है। कुछ साल पहले तक जो ग्राहक 10 हजार रुपये के बजट में एक अच्छा 5G स्मार्टफोन, बड़ी बैटरी और संतोषजनक कैमरा आसानी से पा लेते थे, उनके लिए अब यह सपना जैसा हो गया है। आज के समय में उस शुरुआती बजट में न तो ढंग का 5G फोन मिल पा रहा है और न ही पहले जैसी सहूलियतें। इस वजह से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है और बाजार की पूरी चाल ही बदल गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वीवो, सैमसंग, रियलमी, पोको और शाओमी जैसे बड़े ब्रांड्स के स्मार्टफोन्स की कीमतें पिछले कुछ महीनों में लगातार ऊपर गई हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि बजट सेगमेंट के खरीदारों के लिए अच्छे विकल्प तलाशना बेहद कठिन हो गया है। इसी बीच, बाजार के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला ट्रेंड दिखाया है, जहां ग्राहक महंगे 5G फोन्स से दूरी बनाकर फिर से किफायती 4G स्मार्टफोन्स को अपना रहे हैं।
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मेमोरी और कलपुर्जों की लागत बढ़ने से महंगे हुए डिवाइसेज
आखिर मोबाइल फोन इतनी तेजी से महंगे क्यों हो रहे हैं? इस सवाल के जवाब में मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ रैम और स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND जैसी मेमोरी की कीमतों में आया भारी उछाल है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, कम कीमत वाले स्मार्टफोन में हार्डवेयर की लागत यानी बिल ऑफ मैटेरियल्स में करीब 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की कमजोरी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इम्पोर्ट किए जाने वाले कंपोनेंट्स महंगे होने की वजह से लोकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए पुरानी कीमतों पर फोन बेचना नामुमकिन हो गया है। यही कारण है कि साल 2026 की पहली छमाही में देश में मोबाइल फोन औसतन 16 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं, और 10 हजार रुपये से कम दाम वाले फोन तो 32 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं।
10 हजार से कम के फोन सबसे ज्यादा प्रभावित, थोक बिक्री में आई भारी गिरावट
कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर एंट्री-लेवल यानी 10,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट पर पड़ा है। इस कैटेगरी के फोन 32 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं, जिसके चलते इनकी थोक बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 65 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, 10,000 से 15,000 रुपये तक की रेंज वाले फोन्स की मांग में भी 20 प्रतिशत की कमी आई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मेमोरी के दाम नीचे नहीं आते, तब तक बजट सेगमेंट के खरीदारों को राहत मिलना मुश्किल है। हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का अनुमान है कि वर्ष 2028 से पहले मेमोरी की कीमतें कम होने की कोई खास उम्मीद नहीं है, जिससे आने वाले समय में भी कंपनियों और ग्राहकों दोनों पर आर्थिक दबाव बना रहेगा।
सस्ते और भरोसेमंद विकल्प की तलाश में 4G की तरफ लौट रहे ग्राहक
इस मंहगाई के माहौल में एक हैरान करने वाला ट्रेंड यह सामने आया है कि लोग 5G तकनीक की तरफ भागने के बजाय अब फिर से 4G स्मार्टफोन्स की तरफ लौट रहे हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल भारी गिरावट झेलने के बाद अब 2026 में 4G स्मार्टफोन की बिक्री में सालाना आधार पर तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। बाजार में 4G की हिस्सेदारी जो 2025 में सिर्फ 11 प्रतिशत थी, वह बढ़कर 2026 में 13 प्रतिशत और 2027 तक 15 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
"भारत में 4जी की वापसी अब पारंपरिक शुरुआती स्तर की श्रेणी से आगे बढ़ रही है और 20,000 रुपये से कम कीमत वाले खंड में मांग तेजी से बढ़ रही है। उपभोक्ता 5जी से जुड़ी अधिक कीमत के बिना बेहतर फीचर्स और उपकरण का अनुभव चाहते हैं।"— प्राचीर सिंह, वरिष्ठ विश्लेषक, काउंटरपॉइंट रिसर्च
मोबाइल निर्माता कंपनियों ने बदली रणनीति, 20 हजार से कम के 4G मॉडल उतारे बाजार में
ग्राहकों के इस बदलते मिजाज को देखते हुए मोबाइल निर्माता कंपनियों (OEMs) ने भी अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। जो कंपनियां केवल 5G फोन्स पर फोकस कर रही थीं, वे अब 10,000 से 20,000 रुपये के प्राइस ब्रैकेट में अपने 4G सेगमेंट का तेजी से विस्तार कर रही हैं। साल 2025 में बजट कैटेगरी में सिर्फ दो कंपनियां ही 4G मॉडल पेश कर रही थीं, जिनकी संख्या बढ़कर अब 12 हो चुकी है।
यह साफ दिखाता है कि भारतीय बाजार में अभी भी ऐसे करोड़ों उपभोक्ता मौजूद हैं, जिन्हें इंटरनेट की हाई-स्पीड से ज्यादा अपनी जेब के बजट और बेहतर रोजमर्रा के परफॉर्मेंस की फिक्र है। महंगे 5G फोन्स के दौर में 4G स्मार्टफोन्स की यह वापसी टेक मार्केट में एक नया और दिलचस्प मोड़ लेकर आई है।








