भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की ऐतिहासिक रफ्तार
देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इन दिनों इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ईवी (EV) का डंका बज रहा है। भारतीय ग्राहक अब पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को छोड़कर तेजी से बैटरी से चलने वाले दोपहिया वाहनों को अपना रहे हैं। सरकारी वाहन पोर्टल के ताजा आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि देश में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री ने एक नया इतिहास रच दिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के पहले नौ महीनों में ही रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की गई है, जिसने पिछले सभी पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते लोग अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। वाहन निर्माताओं ने भी ग्राहकों की इस जरूरत को समझते हुए बाजार में बेहतरीन रेंज, शानदार फीचर्स और दमदार परफॉर्मेंस वाले स्कूटर उतार दिए हैं। यही वजह है कि आज महानगरों से लेकर छोटे शहरों और कस्बों तक हर जगह बैटरी वाले स्कूटर सड़कों पर दौड़ते हुए नजर आ रहे हैं।
इस सेगमेंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हर वर्ग के ग्राहकों के लिए विकल्प मौजूद हैं। बजट फ्रेंडली स्कूटर से लेकर प्रीमियम और हाई-स्पीड मॉडल तक, खरीदारों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है। ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का अनुमान आने वाले त्योहारी सीजन में इस बिक्री के आंकड़े को और भी ऊपर ले जाएगा, जिससे कंपनियों के मुनाफे में भारी उछाल आना तय है।
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नौ महीने में पार हुआ 15 लाख यूनिट्स का जादुई आंकड़ा
इस साल यानी 2026 के शुरुआती नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) के बिक्री आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह तस्वीर साफ हो जाती है कि भारतीय बाजार में ईवी क्रांति कितनी तेजी से फैल रही है। इस दौरान देश भर में कुल 15.61 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। पिछले साल यानी 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा महज 9.61 लाख यूनिट्स पर सिमटा हुआ था।
सालाना आधार पर तुलना करें तो इस साल इन नौ महीनों के भीतर ही बिक्री में लगभग 6 लाख यूनिट्स की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सीधे तौर पर 62 प्रतिशत की जबरदस्त ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2025 के पूरे बारह महीनों में कुल मिलाकर 13.42 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बिके थे, जिसे चालू वर्ष ने केवल नौ महीने में ही पीछे छोड़ दिया है।
केवल सितंबर महीने की बात करें तो देश में लगभग 1.97 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं, जो अगस्त के मुकाबले करीब 7.7 प्रतिशत अधिक है। यह लगातार बढ़ता ग्राफ इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार पूरी तरह से इलेक्ट्रिक भविष्य की ओर अग्रसर हो चुका है और ग्राहकों का विश्वास इस तकनीक पर तेजी से मजबूत हो रहा है।
इन चार दिग्गज कंपनियों का बाजार पर है एकछत्र राज
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में भले ही कई नई कंपनियां उतर चुकी हैं, लेकिन असली मुकाबला चुनिंदा स्थापित ब्रांड्स के बीच ही देखने को मिल रहा है। इस साल के शुरुआती नौ महीनों में हुई कुल बिक्री का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा केवल चार प्रमुख कंपनियों के पास है। यानी इन दिग्गजों का पूरे मार्केट पर लगभग एकाधिकार बना हुआ है।
इस फेहरिस्त में टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है, जो बिक्री के मामले में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इसके अलावा एथर एनर्जी और हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। टीवीएस का आईक्यूब (iQube) और बजाज का चेतक (Chetak) ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। वहीं एथर का रिज्टा और हीरो का विडा भी अपनी खासियतों की वजह से अच्छी खासी संख्या में बिक रहे हैं।
"भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की यह ग्रोथ किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिस रफ्तार से उपभोक्ता पारंपरिक स्कूटरों को छोड़कर ईवी अपना रहे हैं, वह आने वाले समय में पेट्रोल वाहनों के युग के अंत का स्पष्ट संकेत देता है। आगामी वर्षों में यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में भी एक बड़ा योगदान देगा।" — ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट, द फ्रीलांस रिसर्च विंग
शानदार रेंज और कम खर्च बना सबसे बड़ा यूएसपी
इलेक्ट्रिक स्कूटरों की इस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री के पीछे सबसे बड़ा कारण इनका किफायती होना है। आज के समय में जब ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं, तब एक इलेक्ट्रिक स्कूटर महज कुछ पैसों के खर्च में कई किलोमीटर का सफर तय करा देता है। उदाहरण के तौर पर, टीवीएस आईक्यूब एसटी जैसे मॉडल सिंगल चार्ज पर 200 किलोमीटर से ज्यादा की लंबी रेंज देने में सक्षम हैं, जिससे बार-बार चार्ज करने की झंझट से मुक्ति मिल जाती है।
इसके अलावा इन स्कूटरों में मिलने वाली आधुनिक तकनीक भी लोगों को आकर्षित कर रही है। टचस्क्रीन डैशबोर्ड, स्मार्ट कनेक्टिविटी, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, बड़ी अंडर-सीट स्टोरेज और बेहतरीन वाटर-डस्टप्रूफ बैटरी रेटिंग जैसी सुविधाएं ग्राहकों के सफर को बेहद आरामदायक बनाती हैं। वाहन निर्माताओं ने सुरक्षा और परफॉर्मेंस के स्तर को भी काफी ऊपर उठाया है, जिससे ग्राहकों का भरोसा इन गाड़ियों पर अटूट होता जा रहा है।
बैटरी तकनीक में आ रहे सुधारों और देश भर में तेजी से विकसित हो रहे चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 'रेंज एंग्जाइटी' यानी बैटरी खत्म होने के डर को भी काफी हद तक कम कर दिया है। सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाओं ने भी मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इन्हें खरीदना आसान बना दिया है।
भविष्य की राह और साल के अंत तक की उम्मीदें
अभी साल के आखिरी तीन महीने यानी त्योहारी सीजन बाकी है, जिसमें ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है। चूंकि नौ महीनों का आंकड़ा ही पिछले साल के कुल रिकॉर्ड को तोड़ चुका है, ऐसे में साल के अंत तक यह आंकड़ा कहां पहुंचेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। जानकारों का अनुमान है कि यह साल भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
कंपनियां भी आने वाले दिनों में और भी नए मॉडल्स और आकर्षक ऑफर्स के साथ बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं। इससे न सिर्फ ग्राहकों को और बेहतर विकल्प मिलेंगे, बल्कि देश में प्रदूषण कम करने के लक्ष्य को भी एक नया बल मिलेगा। कुल मिलाकर, भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक स्कूटरों का यह सफर अब रुकने वाला नहीं है, और आने वाला कल पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का ही होने वाला है।








