नई दिल्ली और देश के विभिन्न राज्यों से आ रही ऑटोमोबाइल और सड़क सुरक्षा की खबरें इन दिनों वाहन चालकों और खरीदारों के बीच बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। गूगल ट्रेंड्स पर 'कार' विषय पर देश भर में पिछले कुछ घंटों में भारी हलचल देखने को मिली है। एक तरफ लग्जरी गाड़ियों के शौकीनों के लिए बाजार में बेहद महंगी गाड़ियां आ रही हैं, तो दूसरी तरफ आम आदमी के लिए सीएनजी गाड़ियों की माइलेज और परफॉर्मेंस की बात हो रही है। लेकिन इन सबके बीच देश की सड़कों पर होने वाले सड़क हादसे और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी लगातार खड़े हो रहे हैं, जो हर नागरिक को सोचने पर मजबूर करते हैं।
बाजार में आई नई गाड़ियों की बात करें तो मर्सिडीज-मायबाच एस 580ई का जिक्र सबसे ऊपर है। करीब तीन करोड़ बयालीस लाख रुपये की कीमत वाली इस कार में कई ऐसी हाई-टेक सुविधाएं दी गई हैं जो इसे एक चलते-फिरते लग्जरी लाउंज जैसा अहसास कराती हैं। इस कार में करीब सौ किलोमीटर तक की इलेक्ट्रिक रेंज मिलती है और पंद्रह एयरबैग दिए गए हैं जो सुरक्षा को मजबूत करते हैं। इसके अलावा फोर-डी साउंड सिस्टम इस कार के सफर को बेहद शानदार बनाता है। लेकिन इतनी महंगी गाड़ी देश के चुनिंदा रईसों या सिर्फ तीस लोगों तक ही सीमित रहने वाली है, जिसे आम आदमी केवल खबरों में ही देख सकता है।
आम आदमी के लिए सीएनजी कारों का बढ़ता क्रेज
एक तरफ जहां करोड़ों की लग्जरी गाड़ियां चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ आम और मध्यम वर्ग के खरीदार सीएनजी कारों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। हाल ही में टाटा एरिस की पहली ड्राइव और उसके सीएनजी वेरिएंट के रिव्यू काफी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों के बीच सीएनजी कारें लोगों की जेब पर कम भारी पड़ती हैं। कार बाजार के विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में सीएनजी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में और ज्यादा तेजी देखने को मिलेगी क्योंकि लोग अब कम खर्च में ज्यादा सफर करना चाहते हैं।
लेकिन इन तमाम तकनीकी तरक्की और नए मॉडल्स के बीच देश की सड़कों की कड़वी सच्चाई भी सामने आ रही है। हाल ही में उदयपुर से एक बहुत ही दर्दनाक खबर सामने आई जहां पेशी से लौट रहे एक पुलिस अधिकारी यानी एसएचओ की कार रास्ते में एक खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराई। इस भयानक हादसे में अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई। सिर्फ दो महीने पहले ही उनका तबादला उदयपुर हुआ था और यह हादसा परिवार के लिए एक कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। ऐसे हादसे देश के हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल देते हैं।
सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ और लापरवाही
सड़क सुरक्षा को लेकर देश भर में तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से भी एक बड़े सीरीज हादसे की खबर सामने आई है जहां एक बेकाबू कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी के कारण आए दिन इस तरह के सड़क हादसे हो रहे हैं जिनमें कितने ही बेकसूर लोग अपनी जान गंवा देते हैं या फिर गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी भर का दर्द झेलते हैं।
इन सभी घटनाओं और ट्रेंड्स को अगर जोड़ा जाए तो साफ पता चलता है कि भारतीय कार बाजार दो अलग-अलग दुनिया में बंटा हुआ है। एक तरफ जहां तकनीक के मामले में दुनिया की बेहतरीन और सुरक्षित गाड़ियां भारतीय बाजार में उतारी जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर खराब ड्राइविंग, गलत पार्किंग और नियमों की धज्जियां उड़ने से आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है। वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारी सिर्फ शानदार फीचर्स और दमदार इंजन देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सरकारों और ट्रैफिक विभागों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि देश की सड़कें चलने के लिए सुरक्षित हों।
सुरक्षित सफर के लिए कड़े कदम की जरूरत
कार खरीदने वाले हर ग्राहक को अब सिर्फ माइलेज और लग्जरी के साथ-साथ गाड़ी के क्रैश टेस्ट रेटिंग और सुरक्षा फीचर्स पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। सरकार और प्रशासन को भी चाहिए कि हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई करे ताकि उदयपुर जैसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। 'द फ्रीलान्स' की यह पड़ताल यही सिखाती है कि चाहे कार तीन करोड़ की हो या फिर सीएनजी वाली आम गाड़ी, सड़क पर सावधानी और यातायात नियमों का पालन ही हर नागरिक की सबसे बड़ी सुरक्षा है।









